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Home » कावेरी जल विवाद: केंद्र ने मेकेदातु परियोजना की DPR लौटाई, कर्नाटक से मांगी संशोधित रिपोर्ट

Politics

कावेरी जल विवाद: केंद्र ने मेकेदातु परियोजना की DPR लौटाई, कर्नाटक से मांगी संशोधित रिपोर्ट

SA News
Last updated: August 1, 2026 11:50 am
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कावेरी जल विवाद: केंद्र ने मेकेदातु परियोजना की DPR लौटाई, कर्नाटक से मांगी संशोधित रिपोर्ट
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कावेरी जल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर-सह-पेयजल परियोजना को अभी मंजूरी नहीं मिली है। सरकार ने बताया कि कर्नाटक ने वर्ष 2019 में इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भेजी थी, लेकिन जांच के दौरान उसमें कुछ कमियां सामने आईं। इसी वजह से रिपोर्ट वापस भेज दी गई और राज्य सरकार से संशोधित DPR तैयार करने को कहा गया है।

Contents
  • रिपोर्ट में क्या कमी मिली?
  • क्या है मेकेदातु परियोजना?
  • तमिलनाडु क्यों कर रहा है विरोध?
  • सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल का फैसला क्यों अहम है?
  • अब कर्नाटक के सामने क्या चुनौती?
  • दोनों राज्यों की नजर अगले कदम पर
  • फिलहाल क्या है स्थिति?

रिपोर्ट में क्या कमी मिली?

केंद्र सरकार के मुताबिक, भेजी गई DPR पूरी तरह उन नियमों के अनुरूप नहीं थी, जिनका पालन इस तरह की परियोजनाओं में जरूरी होता है। सरकार ने कहा कि रिपोर्ट को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के फैसले, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और केंद्रीय जल आयोग (CWC) के तकनीकी मानकों के अनुसार दोबारा तैयार करना होगा। संशोधित रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।

फिलहाल केंद्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा DPR के आधार पर किसी तरह की मंजूरी नहीं दी गई है।

क्या है मेकेदातु परियोजना?

मेकेदातु परियोजना कर्नाटक सरकार की काफी समय से प्रस्तावित योजना है। इसके तहत कावेरी नदी पर एक बैलेंसिंग रिजर्वायर बनाने का प्रस्ताव है। कर्नाटक का कहना है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार का यह भी दावा रहा है कि परियोजना से पानी का बेहतर प्रबंधन होगा और बारिश के दौरान अतिरिक्त जल का संग्रह किया जा सकेगा। कर्नाटक का कहना है कि इससे किसी राज्य के हिस्से के पानी में कटौती नहीं होगी।

तमिलनाडु क्यों कर रहा है विरोध?

दूसरी ओर तमिलनाडु लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करता रहा है। राज्य का कहना है कि यदि कर्नाटक कावेरी नदी पर नया जलाशय बनाता है तो नीचे की ओर बहने वाले पानी की मात्रा प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर तमिलनाडु के कई जिलों की सिंचाई व्यवस्था और किसानों पर पड़ने की आशंका जताई जाती है।

तमिलनाडु का यह भी कहना है कि जब तक सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं और संबंधित संस्थाओं से मंजूरी नहीं मिलती, तब तक परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल का फैसला क्यों अहम है?

कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली है। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण ने विस्तृत फैसला दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अपना निर्णय सुनाया और दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर व्यवस्था तय की।

इसी वजह से अब किसी भी नई परियोजना का मूल्यांकन इन्हीं फैसलों के आधार पर किया जाता है। यदि कोई प्रस्ताव तय नियमों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो उसे मंजूरी मिलने में देरी हो सकती है।

अब कर्नाटक के सामने क्या चुनौती?

केंद्र की ओर से DPR लौटाए जाने के बाद अब कर्नाटक सरकार को परियोजना रिपोर्ट में जरूरी बदलाव करने होंगे। संशोधित रिपोर्ट में यह बताना होगा कि परियोजना से जल बंटवारे के मौजूदा नियमों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सभी तकनीकी पहलुओं का पालन किया गया है।

इसके बाद केंद्रीय जल आयोग रिपोर्ट की दोबारा जांच करेगा। यदि सभी बिंदु संतोषजनक पाए गए तो आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि इसमें कितना समय लगेगा, इसे लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

दोनों राज्यों की नजर अगले कदम पर

मेकेदातु परियोजना केवल एक जल परियोजना नहीं, बल्कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा भी है। दोनों राज्यों की सरकारें समय-समय पर अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रखती रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार का यह जवाब दोनों राज्यों के लिए अहम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में तकनीकी रिपोर्ट के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी होता है। इसलिए अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि कर्नाटक संशोधित DPR कब तक तैयार करता है और उस पर केंद्र का अगला फैसला क्या होता है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

अभी की स्थिति में मेकेदातु परियोजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। केंद्र सरकार ने केवल यह कहा है कि मौजूदा DPR में सुधार की जरूरत है और संशोधित रिपोर्ट आने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में कावेरी जल विवाद से जुड़ा यह मामला आने वाले समय में भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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