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Home » साधु के वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव के वेषभूषा पर बहस, क्या बदल सकते हैं भेष? जानिए पोशाक और विरोध सामग्री से जुड़े नियम!

Politics

साधु के वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव के वेषभूषा पर बहस, क्या बदल सकते हैं भेष? जानिए पोशाक और विरोध सामग्री से जुड़े नियम!

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Last updated: August 1, 2026 11:46 am
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साधु के वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव के वेषभूषा पर बहस
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पिछले दिनों बिहार की पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने संसद भवन परिसर में लाल कपड़े धारण कर साधु के वेश में पहुंचकर एक बड़ा प्रदर्शन किया। आइए जानते हैं इस खबर की पूरी जानकारी।

Contents
  • मुख्य बिंदु:- 
  • साधु के वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव, सांसदों की वेशभूषा को लेकर उठे सवाल।
  • सांसदों के लिए कोई निर्धारित ड्रेस कोड नहीं।
  • क्या सांसद अपनी वेशभूषा या भेष बदल सकते हैं? 
  • पोशाक पर नारे और विरोध की सामग्री लेकर सदन में प्रवेश की अनुमति नहीं।

मुख्य बिंदु:- 

  1. साधु के वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव, सांसदों की पोशाक पर मचा बवाल
  1. सांसदों के ड्रेस कोड पर बड़ा सवाल, संसद में क्या हैं वेशभूषा के नियम?
  1. क्या सांसद संसद में बदल सकते हैं भेष? जानिए वेशभूषा को लेकर नियम
  1. पोशाक पर नारे या विरोधी संदेश पर रोक, संसद में एंट्री के क्या हैं नियम?

साधु के वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव, सांसदों की वेशभूषा को लेकर उठे सवाल।

बिहार की पूर्णिया क्षेत्र से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने अयोध्या राम मंदिर में दिए गए दान राशि कि चोरी के विरोध में साधु के वेश में संसद भवन परिसर पहुंचकर सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने संसद के बाहर प्रदर्शन किया जिसमे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ-साथ विपक्ष के कई सांसदों ने उनके इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। इस घटना ने इन विषय पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि क्या सांसदों को संसद भवन में शामिल होने के बाद वेशभूषा या फिर भेष बदलने की अनुमति है। 

सांसदों के लिए कोई निर्धारित ड्रेस कोड नहीं।

भारतीय संविधान और लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों की नियम पुस्तकों में सांसदों के लिए कोई भी आधिकारिक या अनिवार्य ड्रेस कोड तय नहीं किया गया है। प्रत्येक सदस्य भारतीय सांस्कृतिक तथा विविधता को प्रदर्शित करने वाले पारंपरिक या फिर औपचारिक कपड़े पहनने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। सांसदों को कुर्ता पजामा, टी – शर्ट, धोती, साड़ी, सूट, मेखला चादर के साथ – साथ दूसरी क्षेत्रीय पोशाक पहने हुए देखना आम बात है। यद्यपि संसद सदन की मर्यादा को बनाए रखने के सिद्धांत पर काम करती है और संसद सदस्यों से बैठक प्रक्रिया के दौरान सभ्य और उपयुक्त कपड़े पहनने की उम्मीद की जाती है।

क्या सांसद अपनी वेशभूषा या भेष बदल सकते हैं? 

सांसदीय वेशभूषा या कोई भी पोशाक पर रोक लगाने वाला फिरहाल कोई भी नियम अभी तय नहीं है। लेकिन संसदीय नियम सदस्यों को कार्यवाही में व्यावधान डालना या फिर सदन को प्रदर्शन का मंच बनाने के साधन के रूप में पहनावे का इस्तेमाल करने से रोकते हैं। लोकसभा में पद्धति और कार्यप्रणाली के नियम 349 के तहत सांसदों से शिष्टाचार व अनुशासन बनाए रखने और ऐसे किसी भी व्यवहार या गतिविधि से बचने की उम्मीद की जाती है जो संसद की गरिमा या मान को बदनाम करता हो। इसका मतलब है कि सदन के अंदर विभिम्न प्रकार के पहनावे, प्रतीकात्मक वेशभूषा या फिर कोई और दूसरी नाटकीय पोशाक पहनने पर अध्यक्ष की तरफ से आपत्ति जताई जा सकती है।

पोशाक पर नारे और विरोध की सामग्री लेकर सदन में प्रवेश की अनुमति नहीं।

संसदीय व्यवस्था सदन की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक नारों या फिर कोई संदेशों वाले कपड़ों के उपयोग को भी प्रतिबंध लगाया गया हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि सदन के अंदर नारे लिखी कपड़े या फ़िर टी-शर्ट पहनना संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन है। इसी तरह सांसदों को सदन की बैठक के दौरान तख्ती, झंडा, दान पेटी, बैनर या फिर विरोध प्रदर्शन की दूसरी संकेतात्मक सामग्री लाने का आदेश नहीं है। इसका उद्देश्य इस बात को स्पष्ट करना है कि बहस दृश्य सदन में निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से मुद्दा उठाने के बजाय संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए से आयोजित की जाए।

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