नई दिल्ली: भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। इनमें से कई लोगों की जान केवल इसलिए चली जाती है क्योंकि उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इसी समस्या का समाधान करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा भारत के प्रमुख मोबिलिटी प्लेटफॉर्म रैपिडो (Rapido) ने हाथ मिलाया है। इस ऐतिहासिक साझेदारी के तहत देश भर में ‘राहवीर योजना’ (Rahveer Scheme) और ‘पीएम-राहत’ (PM-RAHAT) स्कीम को जमीनी स्तर पर लागू करने का फैसला लिया गया है।
क्या है राहवीर योजना और पीएम-राहत स्कीम?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में इस राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) यानी दुर्घटना के पहले एक घंटे के भीतर तुरंत चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।
गोल्डन ऑवर क्या है?
दुर्घटना के बाद का पहला 1 घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि इस समय के भीतर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुँचा दिया जाए, तो मृत्यु की संभावना 30% से 40% तक कम हो जाती है।
इस मुहिम के तहत मदद करने वाले नागरिकों (जिन्हें ‘राहवीर’ या गुड समैरिटन कहा जाता है) को न केवल कानूनी सुरक्षा दी जाएगी, बल्कि सरकार की तरफ से वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
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योजना की प्रमुख विशेषताएं और मिलने वाले लाभ
इस सरकारी नीति को पूरी तरह से पारदर्शी और कैशलेस बनाया गया है ताकि अस्पताल या पुलिस स्तर पर किसी भी देरी से बचा जा सके। योजना के मुख्य बिंदु नीचे तालिका में दिए गए हैं:
| मुख्य विशेषता | मिलने वाला लाभ / विवरण |
| नकद पुरस्कार (Cash Reward) | पीड़ित को ‘गोल्डन ऑवर’ में अस्पताल पहुँचाने वाले राहवीर को ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र। |
| कैशलेस इलाज (Treatment Cover) | दुर्घटना पीड़ित के लिए ₹1.50 लाख तक का मुफ्त इलाज (दुर्घटना की तारीख से पहले 7 दिनों के लिए)। |
| स्थिरीकरण उपचार (Stabilization) | सामान्य मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे तक अस्पताल में तुरंत बिना पैसों के इलाज शुरू किया जाएगा। |
| कानूनी सुरक्षा (Legal Protection) | मदद करने वाले ‘राहवीर’ को पुलिस या अस्पताल द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा, न ही निजी जानकारी देने के लिए बाध्य किया जाएगा। |
| डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम | पुलिस के eDAR (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) और आयुष्मान भारत के TMS 2.0 पोर्टल को आपस में जोड़ा गया है। |
रैपिडो (Rapido) की भूमिका: 4 लाख कप्तानों ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
इस योजना को देश के कोने-कोने तक पहुँचाने के लिए रैपिडो अपने विशाल नेटवर्क का उपयोग कर रहा है। रैपिडो के पास वर्तमान में देश के 400 से अधिक शहरों में 30 लाख से अधिक ड्राइवर (कैप्टन्स) हैं। चूंकि ये ड्राइवर्स हर समय सड़कों पर मौजूद रहते हैं, इसलिए दुर्घटना की स्थिति में ये सबसे पहले ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डेंट्स’ (मददगार) बन सकते हैं।
इस अभियान की शुरुआत में ही 4 लाख से अधिक रैपिडो कैप्टन्स ने एक साथ ‘राहवीर प्रतिज्ञा’ (Rahveer Pledge) ली, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
रैपिडो के सह-संस्थापक अरविंद सांका ने कहा:
“हमारे कप्तान रोज़ाना करोड़ों भारतीयों से जुड़ते हैं। मोबिलिटी से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण और सड़क सुरक्षा में योगदान देना हमारे लिए गर्व की बात है। हम अपने ऐप और ऑन-ग्राउंड ट्रेनिंग के ज़रिए ड्राइवरों को जागरूक कर रहे हैं ताकि वे बिना किसी डर के पीड़ितों की जान बचा सकें।”
डिजिटल ढांचा और 112 हेल्पलाइन का एकीकरण
इस योजना को पूरी तरह पेपरलेस और त्वरित बनाने के लिए सरकार ने आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) 112 हेल्पलाइन से इसे जोड़ा है। दुर्घटना होने पर कोई भी नागरिक या राहवीर 112 डायल करके सबसे नजदीकी नामांकित अस्पताल की जानकारी ले सकता है और एम्बुलेंस बुला सकता है। आयुष्मान भारत (AB PM-JAY) के तहत आने वाले 36,000 से अधिक अस्पतालों को इस योजना के लिए अधिकृत किया गया है।
“परमार्थ हमारा परम धर्म है”, महान संत ने कही ये बात
सड़क पर होने वाले हादसे और असमय होने वाली मौतें हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि यह मानव जीवन कितना क्षणभंगुर और अनमोल है। आज समाज में लोग पुलिसिया कार्रवाई या अदालती चक्करों के डर से सड़क पर तड़पते हुए घायल को छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। यह मानवीय संवेदनाओं की गिरावट को दर्शाता है।
आज के समय संत रामपाल जी महाराज जी गरीब बेसहारा परिवारों को अन्नपूर्णा मुहीम के तहत राशन सामग्री पहुचा रहे हैं जब तक कि परिवार मे कोई कमाने वाला नहीं हो जाता है अनाथ बच्चों के लिए रहने की व्यवस्था, खाने पीने की व्यवस्था, उनके पढाई का खर्चा सब निशुल्क रहता है l जिनके पास घर नहीं है संत जी की तरफ से पक्का मकान बनाकर दिया जाता है l
संत रामपाल जी महाराज जी के तत्वज्ञान से प्रेरित होकर उनके करोड़ों अनुयायी आज बिना किसी स्वार्थ या पुरस्कार की लालसा के, केवल परोपकार की भावना से संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। संत रामपाल जी महाराज साफ तौर पर कहते हैं, “परमार्थ हमारा परम धर्म है” । यदि पूरा समाज इस आध्यात्मिक ज्ञान को अपना ले, तो देश का कोई भी नागरिक सड़क पर बेसहारा नहीं मरेगा और हर व्यक्ति एक-दूसरे के लिए सच्चा ‘राहवीर’ बन जाएगा। सच्ची शांति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने के लिए संत रामपाल जी महाराज के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर आध्यात्मिक प्रवचन अवश्य देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. राहवीर योजना (Rahveer Scheme) क्या है?
Ans. यह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा शुरू की गई एक योजना है, जिसके तहत सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर अस्पताल पहुँचाने वाले नागरिकों को पुरस्कृत और सुरक्षित किया जाता है।
Q2. इस योजना के तहत मददगार व्यक्ति (Good Samaritan) को कितनी पुरस्कार राशि मिलती है?
Ans. दुर्घटना पीड़ित की जान बचाने वाले व्यक्ति (राहवीर) को ₹25,000 की नकद राशि और एक प्रशंसा पत्र दिया जाता है।
Q3. क्या घायल व्यक्ति का इलाज मुफ्त होता है?
Ans. हाँ, ‘पीएम-राहत’ (PM-RAHAT) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल में भर्ती होने के पहले 7 दिनों तक अधिकतम ₹1.50 लाख तक का मुफ्त (कैशलेस) इलाज प्रदान किया जाता है।
Q4. दुर्घटना की स्थिति में मदद के लिए किस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करना होगा?
Ans. आप आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करके नजदीकी अस्पताल की मैपिंग और एम्बुलेंस सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
Q5. क्या घायल की मदद करने पर पुलिस मुझे पूछताछ के लिए परेशान करेगी?
Ans. बिल्कुल नहीं। राहवीर योजना और गुड समैरिटन कानून के तहत मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी कानूनी उलझन, पुलिस पूछताछ या अस्पताल के खर्चों से पूरी तरह सुरक्षा दी गई है।

