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Home » 4 सितंबर को ISRO का बड़ा मिशन: GSLV-F17 से लॉन्च होगा EOS-05, अंतरिक्ष से भारत पर रखेगा नजर

Science

4 सितंबर को ISRO का बड़ा मिशन: GSLV-F17 से लॉन्च होगा EOS-05, अंतरिक्ष से भारत पर रखेगा नजर

SA News
Last updated: September 2, 2026 11:35 am
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4 सितंबर को ISRO का बड़ा मिशन: GSLV-F17 से लॉन्च होगा EOS-05
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भारत एक बार फिर अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 4 सितंबर 2026 को GSLV-F17/EOS-05 मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है। ISRO की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार मिशन का निर्धारित लॉन्च समय सुबह 2:55 बजे IST है। लॉन्च श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा। इस मिशन में GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। EOS-05 को पहले GISAT-1A के नाम से जाना जाता था। यह पृथ्वी अवलोकन यानी Earth Observation के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मिशन है।

Contents
  • News Highlights
  • EOS-05 क्या है?
  • क्यों खास है GSLV-F17 मिशन?
  • मौसम और आपदा प्रबंधन में मिलेगी मदद
  • कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण
  • ISRO के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?
  • 2026 में ISRO का बड़ा Space Roadmap
  • विज्ञान के साथ अध्यत्मिकता की खोज क्यो है जरूरी? 
    • वेदों से ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों, ग्रहों और आकाशगंगाओं का निर्माण
    • जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं
  • FAQs

News Highlights

  • 4 सितंबर 2026 को होगा GSLV-F17 का लॉन्च
  • निर्धारित लॉन्च समय सुबह 2:55 बजे
  • मिशन में EOS-05 सैटेलाइट भेजा जाएगा
  • यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से Earth Observation करेगा
  • कृषि और मौसम निगरानी में उपयोगी
  • आपदा प्रबंधन में मददगार
  • बड़े क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें लेने की क्षमता
  • ISRO के लिए यह महत्वपूर्ण वापसी मिशन है

EOS-05 क्या है?

EOS-05 एक अत्याधुनिक Earth Observation Satellite है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत और आसपास के बड़े क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें ले सके।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट पृथ्वी के घूर्णन के साथ तालमेल बनाए रखता है। इसका फायदा यह है कि किसी विशेष क्षेत्र की लगातार या बार-बार निगरानी करना आसान हो जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार EOS-05 लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी की निगरानी करने के लिए तैयार किया गया है।

क्यों खास है GSLV-F17 मिशन?

GSLV भारत का भारी उपग्रहों को अपेक्षाकृत ऊंची कक्षाओं में पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण लॉन्च व्हीकल है। ISRO के अनुसार GSLV में क्रायोजेनिक स्टेज का इस्तेमाल किया जाता है और यह जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट जैसी कक्षाओं में भारी सैटेलाइट ले जाने के लिए विकसित किया गया है। GSLV-F17 इस मिशन में EOS-05 को Sub-Geosynchronous Transfer Orbit में स्थापित करेगा। इसके बाद सैटेलाइट को अपनी निर्धारित कक्षा तक पहुंचाया जाएगा। 

मौसम और आपदा प्रबंधन में मिलेगी मदद

EOS-05 का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग Earth Observation से जुड़ा है। अंतरिक्ष से मिलने वाली लगातार तस्वीरें और डेटा मौसम की निगरानी, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय बदलावों को समझने में उपयोगी हो सकते हैं। बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेजी से प्राप्त होने वाली उपग्रह जानकारी प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को स्थिति का आकलन करने में सहायता कर सकती है।

कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण

सैटेलाइट आधारित Earth Observation तकनीक का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में फसलों और भूमि की निगरानी के लिए किया जाता है। EOS-05 से मिलने वाली जानकारी कृषि आकलन और बड़े क्षेत्रों की निगरानी में उपयोगी हो सकती है। इससे फसल की स्थिति, भूमि उपयोग और पर्यावरण से जुड़े बदलावों को समझने में मदद मिल सकती है।

ISRO के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

यह मिशन ISRO के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वर्ष 2026 में लंबे अंतराल के बाद होने वाला प्रमुख लॉन्च है। ISRO का पिछला लॉन्च मिशन PSLV-C62/EOS-N1 12 जनवरी 2026 को हुआ था, जिसके बाद मिशन सफलतापूर्वक पूरा नहीं हो सका।

ऐसे में GSLV-F17/EOS-05 मिशन को ISRO की आगामी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2026 में ISRO का बड़ा Space Roadmap

ISRO आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण मिशनों पर काम कर रहा है। इनमें Earth Observation, Communication, Navigation और Human Spaceflight से जुड़े मिशन शामिल हैं।

ISRO के प्रमुख आगामी लक्ष्यों में Gaganyaan Programme भी शामिल है, जिसके तहत भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

EOS-05 जैसे मिशन भारत की Space-Based Applications को मजबूत करने के साथ भविष्य के बड़े अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भी तकनीकी क्षमता बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।

विज्ञान के साथ अध्यत्मिकता की खोज क्यो है जरूरी? 

आज हम एक ऐसी दुनिया में हैं, जहां लोग अपना नाम बनाने और प्रशंसा के पीछे भाग रहे हैं, जबकि मनुष्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है एक पूर्ण गुरु को खोजना। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हमारे सामने होने के बावजूद पूर्ण गुरु प्राप्त करने पर किसी का ज्यादा ध्यान नहीं है। इस दिशा में संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रस्तुत आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा यह स्पष्ट करती है कि जीवन में सही आध्यात्मिक गुरु को ढूंढना कितना महत्वपूर्ण है और वह पूर्ण गुरु कौन है।

वेदों से ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों, ग्रहों और आकाशगंगाओं का निर्माण

खगोल भौतिकी का क्षेत्र भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों को लागू करके ब्रह्मांड की उत्पत्ति का अध्ययन करता है, और अभी तक यह अपने प्रारंभिक चरण में है। वर्तमान में इसके सीमित ज्ञान के कारण, ब्रह्मांड की रचना कैसे हुई, इस सार्वभौमिक प्रश्न का उत्तर मिलना असंभव है। वास्तव में, इस प्रश्न का उत्तर भौतिक विज्ञान या उच्चतर भौतिकी के वर्तमान नियमों से देना असंभव है।

इसके लिए वास्तव में “तत्वमीमांसा” की आवश्यकता है। खगोल भौतिकी के मूलभूत प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए वैज्ञानिकों और खगोल भौतिकविदों को भौतिक विज्ञान/उच्चतर भौतिकी से परे देखना होगा। हिंदू धर्म में प्रचलित शास्त्रों में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और अस्तित्व की अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। विशेष रूप से अथर्ववेद और ऋग्वेद में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में यह ज्ञान निहित है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है। 

जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं

जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं, वह ब्रह्मांड का एक छोटा सा हिस्सा है, जो स्वयं कालब्रह्म के 21 ब्रह्मांडों का एक अत्यंत छोटा अंश है । ब्रह्मांड एक विशाल ब्रह्मांड है जो संपूर्ण जगत को समाहित करता है। कालब्रह्म के पास ऐसे 21 ब्रह्मांड हैं। उन्होंने इन्हें परमेश्वर से प्राप्त किया, जिन्होंने उन्हें सतलोक में की गई ध्यान साधना के फल के रूप में ये ब्रह्मांड प्रदान किए। अतः कालब्रह्म इन 21 ब्रह्मांडों में विराजमान ईश्वर हैं। यद्यपि वे फिर भी परमेश्वर नहीं हैं।

काल ब्रह्म के समान ही, परब्रह्म नामक एक अन्य ईश्वर हैं , जो 700 क्वाड्रिलियन ब्रह्मांडों के स्वामी हैं। उन्हें भी ये ब्रह्मांड परम ईश्वर द्वारा ही प्रदान किए गए हैं। हम मनुष्य जो इस पृथ्वी पर निवास करते हैं, परब्रह्म से केवल एक ही बात को छोड़कर कोई संबंध नहीं रखते कि सतलोक (शाश्वत परम स्थान) का मार्ग परब्रह्म के 700 क्वाड्रिलियन ब्रह्मांडों से होकर गुजरता है। 

परमेश्वर को पूर्ण ब्रह्म भी कहा जाता है । हालांकि, परमेश्वर का वास्तविक नाम कबीर देव या कबीर साहिब है। वे अनंत ब्रह्मांडों (सामूहिक रूप से सतलोक कहलाते हैं) के स्वामी हैं और वास्तव में परब्रह्म के 700 खरब ब्रह्मांडों और कालब्रह्म के 21 ब्रह्मांडों के भी स्वामी हैं।

FAQs

1. EOS-05 सैटेलाइट कब लॉन्च होगा?

EOS-05 को 4 सितंबर 2026 को लॉन्च किया जाना निर्धारित है।

2. EOS-05 को किस रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा?

EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा।

3. EOS-05 लॉन्च कहां से होगा?

लॉन्च श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा।

4. EOS-05 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी का अवलोकन और बड़े क्षेत्रों की बार-बार निगरानी करना है।

5. EOS-05 से किन क्षेत्रों को फायदा होगा?

मौसम निगरानी, कृषि, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में इसके डेटा का उपयोग किया जा सकता है। 

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