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Home » पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ₹1.5 विंडफॉल टैक्स, डीजल पर ₹25 प्रति लीटर शुल्क, जानें क्या होगा असर

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पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ₹1.5 विंडफॉल टैक्स, डीजल पर ₹25 प्रति लीटर शुल्क, जानें क्या होगा असर

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Last updated: September 2, 2026 11:49 am
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पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ₹1.5 विंडफॉल टैक्स
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केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी एसएईडी (SAED) में बदलाव किया है। नए आदेश के तहत पेट्रोल के निर्यात पर अब ₹1.5 प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स लगाया जाएगा। इससे पहले पेट्रोल के निर्यात पर यह शुल्क शून्य था। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को ₹24 से बढ़ाकर ₹25 प्रति लीटर कर दिया गया है। दूसरी ओर, एटीएफ यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर शुल्क में 50 पैसे प्रति लीटर की कमी की गई है। अब एटीएफ पर ₹19 प्रति लीटर शुल्क लागू होगा, जो पहले ₹19.50 प्रति लीटर था।

Contents
  • News Highlights
  • पेट्रोल के निर्यात पर ₹1.5 प्रति लीटर शुल्क
  • डीजल के निर्यात पर ₹25 प्रति लीटर शुल्क
  • एटीएफ के निर्यात पर मिली राहत
  • हर 15 दिन में क्यों बदलता है पेट्रोलियम शुल्क?
  • आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
  • क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
  • तेल कंपनियों पर क्या असर होगा?
  • आगे भी बदल सकती हैं दरें
  • इन बढ़ती कीमतों के बीच कलियुग में सतयुग की शुरुआत की ओर बढ़ते कदम
  • FAQs

महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार के इस फैसले का सीधा संबंध निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों से है। घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क में इस फैसले के तहत कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए इस निर्णय से देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर पड़ने की बात नहीं है।

News Highlights

  • केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बदलाव किया।
  • पेट्रोल के निर्यात पर ₹1.5 प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया।
  • पेट्रोल पर पहले निर्यात शुल्क शून्य था।
  • डीजल के निर्यात पर शुल्क ₹24 से बढ़ाकर ₹25 प्रति लीटर किया गया।
  • एटीएफ के निर्यात पर शुल्क ₹19.50 से घटाकर ₹19 प्रति लीटर किया गया।
  • नए शुल्क का संबंध पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से है।
  • घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
  • सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के आधार पर लगभग हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा करती है।
  • 15 अगस्त की पिछली समीक्षा में पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य किया गया था।
  • विंडफॉल टैक्स असाधारण अतिरिक्त मुनाफे पर लगाया जाने वाला विशेष कर है।

पेट्रोल के निर्यात पर ₹1.5 प्रति लीटर शुल्क

केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार अब तेल कंपनियों को विदेशों में पेट्रोल निर्यात करने पर ₹1.5 प्रति लीटर शुल्क देना होगा। इससे पहले पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क शून्य था।

यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा के बाद किया गया है। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की समय-समय पर समीक्षा करती है।

पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क में यह बदलाव तेल कंपनियों के उस कारोबार को प्रभावित करेगा, जिसमें पेट्रोल को विदेशी बाजारों में भेजा जाता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि देश में पेट्रोल खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल की कीमत तत्काल बढ़ गई है।

डीजल के निर्यात पर ₹25 प्रति लीटर शुल्क

सरकार ने डीजल के निर्यात पर भी शुल्क में बदलाव किया है। पहले डीजल के निर्यात पर ₹24 प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लिया जा रहा था। अब इसे बढ़ाकर ₹25 प्रति लीटर कर दिया गया है।

इस तरह डीजल के निर्यात पर शुल्क में ₹1 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। यह शुल्क उन डीजल उत्पादों पर लागू होगा जिन्हें घरेलू बाजार के बजाय विदेशों में निर्यात किया जाता है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और उनसे होने वाले अतिरिक्त लाभ के अनुरूप कर व्यवस्था को समायोजित करना है।

एटीएफ के निर्यात पर मिली राहत

जहां पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है, वहीं विमान ईंधन यानी एटीएफ के मामले में शुल्क घटाया गया है। पहले एटीएफ के निर्यात पर ₹19.50 प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जा रहा था। अब इसे घटाकर ₹19 प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी एटीएफ के निर्यात शुल्क में 50 पैसे प्रति लीटर की कमी हुई है। इस बदलाव से एटीएफ का निर्यात करने वाली कंपनियों को पहले की तुलना में प्रति लीटर 50 पैसे की शुल्क राहत मिलेगी।

हर 15 दिन में क्यों बदलता है पेट्रोलियम शुल्क?

पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की दरें स्थायी नहीं होतीं। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को देखते हुए इनकी समीक्षा करती रहती है। सरकार लगभग हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा करती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और परिस्थितियों के आधार पर शुल्क बढ़ाया या घटाया जा सकता है।

इससे पहले 15 अगस्त को हुई समीक्षा में पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को घटाकर शून्य कर दिया गया था। अब नई समीक्षा के बाद पेट्रोल पर दोबारा ₹1.5 प्रति लीटर शुल्क लागू किया गया है। इससे पता चलता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों के अनुसार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क को लगातार समायोजित कर रही है।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतें बढ़ जाएंगी? उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस फैसले का घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण यह है कि सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बदलाव किया है। देश में पेट्रोल पंपों पर बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क में इस आदेश के तहत कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इसलिए सिर्फ इस फैसले के आधार पर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की बात नहीं कही जा सकती।

हालांकि, पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें कई दूसरे कारकों से प्रभावित होती हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, केंद्र व राज्य सरकारों के कर तथा अन्य लागत शामिल हैं।

क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स एक विशेष प्रकार का कर है। जब किसी कंपनी या उद्योग को सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अचानक बहुत अधिक या असाधारण मुनाफा होता है, तो सरकार उस अतिरिक्त लाभ पर विशेष कर लगा सकती है।

पेट्रोलियम क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के कारण तेल कंपनियों के मुनाफे में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में सरकार अतिरिक्त लाभ पर कर लगाकर राजस्व प्राप्त कर सकती है।

विंडफॉल टैक्स की दर बाजार की परिस्थितियों के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकती है। यही वजह है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू शुल्क की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

तेल कंपनियों पर क्या असर होगा?

पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर शुल्क बढ़ने से इन उत्पादों को विदेशी बाजारों में बेचने वाली कंपनियों की लागत बढ़ेगी। पेट्रोल निर्यात करने पर अब प्रत्येक लीटर पर ₹1.5 और डीजल निर्यात करने पर ₹25 प्रति लीटर शुल्क देना होगा।

वहीं, एटीएफ के मामले में कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी, क्योंकि इसका शुल्क ₹19.50 से घटकर ₹19 प्रति लीटर हो गया है।

इस प्रकार सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग-अलग शुल्क दरें निर्धारित की हैं।

घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों से अलग है यह शुल्क

इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह समझना है कि निर्यात शुल्क और घरेलू बिक्री पर लगने वाला कर एक ही चीज नहीं हैं।

निर्यात शुल्क विदेश भेजे जाने वाले उत्पादों पर लागू होता है, जबकि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अलग-अलग कर और अन्य लागत शामिल होती हैं। इसलिए पेट्रोल के निर्यात पर ₹1.5 प्रति लीटर शुल्क लगने का मतलब यह नहीं है कि देश में पेट्रोल भी ₹1.5 महंगा हो गया है। इसी तरह डीजल के निर्यात शुल्क में ₹1 की बढ़ोतरी का अर्थ घरेलू डीजल की कीमत में ₹1 की बढ़ोतरी नहीं है।

आगे भी बदल सकती हैं दरें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव जारी रहता है। ऐसे में सरकार आगामी समीक्षा के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू निर्यात शुल्क में फिर से बदलाव कर सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं तो सरकार शुल्क को बढ़ाने, घटाने या किसी उत्पाद पर शुल्क को शून्य करने का फैसला भी कर सकती है। फिलहाल नए आदेश के अनुसार पेट्रोल पर ₹1.5, डीजल पर ₹25 और एटीएफ पर ₹19 प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू है।

इन बढ़ती कीमतों के बीच कलियुग में सतयुग की शुरुआत की ओर बढ़ते कदम

जहां एक ओर पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतें आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत का माध्यम बन रही है। इस मुहिम के तहत गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क राशन एवं रोजमर्रा की आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि आर्थिक परेशानी के कारण किसी परिवार को भूखे रहने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता के साथ-साथ समाज में मानवता, सेवा और परोपकार की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। संत जी केवल सतभक्ति का मार्ग नहीं बता रहे, बल्कि समाज को नशा, चोरी, दहेज, हिंसा और अन्य बुराइयों से मुक्त कर स्वच्छ, सभ्य और सदाचारपूर्ण समाज की दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। इस प्रकार भक्ति के साथ सेवा और सदाचार को बढ़ावा देने वाले इन प्रयासों से कलियुग में सतयुग की शुरुआत हो चुकी है।

FAQs

प्रश्न 1: पेट्रोल के निर्यात पर कितना टैक्स लगाया गया है?

उत्तर: पेट्रोल के निर्यात पर अब ₹1.5 प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया है।

प्रश्न 2: पेट्रोल पर पहले कितना निर्यात शुल्क था?

उत्तर: पिछली समीक्षा के बाद पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क शून्य था। अब इसे ₹1.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।

प्रश्न 3: डीजल के निर्यात पर कितना शुल्क लगेगा?

उत्तर: डीजल के निर्यात पर शुल्क ₹24 से बढ़ाकर ₹25 प्रति लीटर कर दिया गया है।

प्रश्न 4: एटीएफ पर नया शुल्क कितना है?

उत्तर: एटीएफ के निर्यात पर अब ₹19 प्रति लीटर शुल्क लगेगा। पहले यह ₹19.50 प्रति लीटर था।

प्रश्न 5: क्या पेट्रोल-डीजल घरेलू बाजार में महंगा होगा?

उत्तर: इस फैसले से घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि बदलाव निर्यात शुल्क में किया गया है।

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