सरकार ने स्पष्ट किया है कि Unified Payments Interface (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले यूज़र्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और सभी Person-to-Person (P2P) लेनदेन मुफ्त रहेंगे। भविष्य में Merchant Discount Rate (MDR) लागू किया जाता है तो यह केवल तय सीमा से ऊपर होने वाले सीमित व्यापारी लेनदेन पर मामूली दर से लागू होगा।
- UPI लेनदेन और MDR पर मुख्य बातें
- UPI शुल्क की चर्चा क्यों शुरू हुई?
- सरकार ने बताया, MDR किस तरह लागू हो सकता है
- 2026 के विधेयक में क्या बदलाव है?
- सरकार MDR पर विचार क्यों कर रही है?
- जुलाई 2026 में UPI लेनदेन का रिकॉर्ड स्तर
- UPI की लागत पर RBI गवर्नर Sanjay Malhotra की टिप्पणी
- सरकार ने बाहरी दबाव के दावों को खारिज किया
- UPI यूज़र्स को अभी क्या जानना चाहिए?
- नवीनतम UPI स्पष्टीकरण का क्या मतलब है?
- डिजिटल सुविधाओं में परमात्मा की कृपा
- FAQs on UPI Transactions
UPI लेनदेन और MDR पर मुख्य बातें
- UPI के जरिए भुगतान करने वाले यूज़र्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
- सभी Person-to-Person (P2P) UPI लेनदेन मुफ्त रहेंगे।
- छोटे व्यापारियों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
- भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो यह तय सीमा पर आधारित होगा और सभी UPI लेनदेन पर एक समान शुल्क नहीं लगेगा।
- संभावित MDR केवल सीमित श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा।
- रिपोर्टों में ₹2,000 से अधिक के कारोबार से जुड़े UPI भुगतानों पर 0.25% से 0.4% MDR लगाए जाने की संभावना बताई गई है, लेकिन अंतिम दर अभी तय नहीं हुई है।
- संसद द्वारा संबंधित विधेयक पारित किए जाने के बाद NPCI की अध्यक्षता वाली UPI and Services Steering Committee यह तय करेगी कि MDR लगाया जाए या नहीं।
- जुलाई 2026 में UPI ने 2,366 करोड़ लेनदेन किए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रही।
UPI शुल्क की चर्चा क्यों शुरू हुई?
UPI लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर चिंता Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के लोकसभा में पारित होने के बाद सामने आई। इस विधेयक में अन्य बदलावों के साथ Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव है।
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या आम लोगों को सामान्य UPI भुगतान करने के लिए भी शुल्क देना पड़ेगा। सरकार ने अब स्पष्ट किया है कि इस संशोधन को आम यूजर्स पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार के अनुसार, यह संशोधन एक ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य UPI की दीर्घकालिक स्थिरता को बनाए रखना तथा उभरते जोखिमों के खिलाफ उसकी तकनीकी क्षमता और मजबूती को बढ़ाना है।
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सरकार ने यह भी कहा है कि UPI पर होने वाले व्यापारिक लेनदेन का भारी बहुमत मुफ्त रहेगा। यदि MDR लागू किया जाता है, तो इसे सभी लेनदेन पर एक साथ लागू करने के बजाय तय सीमा के आधार पर लगाया जाएगा।
सरकार ने बताया, MDR किस तरह लागू हो सकता है
सरकार ने कहा है कि UPI का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे व्यापारियों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि MDR लागू किया जाता है, तो यह केवल तय सीमा से ऊपर होने वाले सीमित व्यापारी लेनदेन पर मामूली दर से लागू होगा। यह दर डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लागू MDR की तुलना में काफी कम होगी।
| पहलू | सरकार का स्पष्टीकरण |
| UPI यूजर्स | कोई शुल्क नहीं |
| P2P लेनदेन | मुफ्त |
| छोटे व्यापारी | डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर कोई शुल्क नहीं |
| MDR | सीमित व्यापारी लेनदेन पर लागू हो सकता है |
| सीमा | तय की जानी है |
| MDR की प्रकृति | मामूली और तय सीमा पर आधारित |
| अंतिम निर्णय | NPCI की अध्यक्षता वाली UPI and Services Steering Committee |
₹2,000 से अधिक के कारोबार से जुड़े UPI भुगतानों पर 0.25% से 0.4% MDR लागू होने की रिपोर्ट की गई संभावना को अंतिम अधिसूचित दर नहीं माना जाना चाहिए। रिपोर्टों में इस तरह की सीमा आधारित व्यवस्था की चर्चा हुई है, जबकि अंतिम व्यवस्था अभी तय की जानी है। हाल की रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि RBI गवर्नर की टिप्पणियों के समय MDR की व्यवस्था पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ था।
2026 के विधेयक में क्या बदलाव है?
यह स्पष्टीकरण Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के लोकसभा में पारित होने के बाद आया है।
इस विधेयक को वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने पेश किया था और इसे बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित किया गया। विधेयक में Payment and Settlement Systems Act, 2007, Income-tax Act, 2025 और Finance Act, 2026 में संशोधन का प्रावधान है।
Payment and Settlement Systems Act में प्रस्तावित संशोधन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने के लिए आवश्यक कानूनी आधार उपलब्ध कराता है। हालांकि, सरकार ने जोर देकर कहा है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक UPI लेनदेन पर शुल्क लग जाएगा।
संसद द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद NPCI की अध्यक्षता वाली UPI and Services Steering Committee यह तय करेगी कि MDR लगाया जाना चाहिए या नहीं।
सरकार MDR पर विचार क्यों कर रही है?
सरकार ने UPI के तेज़ी से विस्तार को स्थायी राजस्व व्यवस्था पर विचार करने का एक प्रमुख कारण बताया है।
लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ने के साथ निम्न क्षेत्रों में लगातार निवेश की आवश्यकता बताई गई है:
- साइबर सुरक्षा
- धोखाधड़ी की रोकथाम
- भुगतान ढांचा
- तकनीकी क्षमताएं
- उभरते जोखिमों के खिलाफ मजबूती
सरकार ने यह भी कहा है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अधिक कंपनियों को UPI व्यवस्था में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल जरूरी है।
सरकार के अनुसार, केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना UPI की अगली विकास अवस्था को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए UPI को मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार रखने के लिए एक संतुलित व्यवस्था आवश्यक है।
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सरकार ने आगे कहा है कि भारत डिजिटल भुगतान की वृद्धि के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में UPI के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और किफायती बने रहना महत्वपूर्ण है, खासकर जब इसका विस्तार ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किया जा रहा है।
जुलाई 2026 में UPI लेनदेन का रिकॉर्ड स्तर
UPI की आर्थिक स्थिरता को लेकर चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब इसके लेनदेन की संख्या लगातार ऊंची बनी हुई है।
जुलाई 2026 में UPI ने 2,366 करोड़ लेनदेन किए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रही। ये आंकड़े भारत में डिजिटल भुगतान के लिए UPI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को दर्शाते हैं।
NPCI के आधिकारिक UPI आंकड़े मंच पर हर महीने के लेनदेन की संख्या और उनकी कुल राशि का विवरण उपलब्ध कराते हैं।
सरकार ने UPI को दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय वाली परस्पर-संचालित भुगतान व्यवस्था बताया है। सरकार के अनुसार, UPI अब 11 देशों में संचालित है और कई अन्य देशों ने भी इसे अपनाने में रुचि दिखाई है।
UPI की लागत पर RBI गवर्नर Sanjay Malhotra की टिप्पणी
इस सप्ताह की शुरुआत में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी UPI की लागत और संभावित व्यापारी शुल्क के मुद्दे पर बात की।
मल्होत्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी और तत्काल प्राथमिकता भुगतान ढांचे को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि UPI एक सार्वजनिक उपयोग की व्यवस्था है और इसे बनाए रखने तथा मजबूत करने से जुड़ी लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी।
उनकी टिप्पणियां UPI लेनदेन पर व्यापारी शुल्क लगाए जाने की संभावित व्यवस्था को लेकर चल रही चर्चा के बीच आई थीं। हाल की रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि MDR की व्यवस्था पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ था।
हालांकि, सरकार के नवीनतम स्पष्टीकरण में उपभोक्ताओं को लेकर उसका रुख स्पष्ट है कि UPI यूजर्स से शुल्क नहीं लिया जाएगा और P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे।
सरकार ने बाहरी दबाव के दावों को खारिज किया
MDR लागू किए जाने की संभावित व्यवस्था ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है।
कांग्रेस ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को लेकर सरकार की आलोचना की। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या प्रस्तावित बदलाव UPI व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं और अमेरिकी कंपनियों को भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में अधिक पहुंच दे सकते हैं।
कांग्रेस के महासचिव Jairam Ramesh ने आरोप लगाया कि विधेयक ने UPI लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने वाली कानूनी सुरक्षा को हटा दिया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कदम बाहरी दबाव से प्रभावित था।
Ministry of Finance ने इन दावों को खारिज करते हुए बाहरी दबाव से जुड़ी रिपोर्टों को निराधार, झूठा और भ्रामक बताया।
सरकार ने कहा कि यदि बाहरी प्रभाव की कोई भूमिका होती, तो भारत ने न तो 2016 में UPI शुरू किया होता और न ही जनवरी 2020 से व्यापारियों और नागरिकों के लिए इसे मुफ्त रखा होता। सरकार ने कहा कि इस दौरान UPI को दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय वाली परस्पर-संचालित भुगतान व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया।
UPI यूज़र्स को अभी क्या जानना चाहिए?
आम यूजर्स के लिए सरकार के स्पष्टीकरण का अर्थ है कि वर्तमान स्थिति में उपभोक्ताओं पर कोई नया UPI लेनदेन शुल्क नहीं लगाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित MDR की चर्चा सीमित व्यापारी लेनदेन से संबंधित है, जबकि P2P लेनदेन के मुफ्त रहने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है।
भविष्य में MDR की सटीक सीमा, दर और दायरा अंततः विधायी प्रक्रिया के बाद संबंधित समिति द्वारा तय की जाने वाली व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
नवीनतम UPI स्पष्टीकरण का क्या मतलब है?
सरकार का स्पष्टीकरण उन चिंताओं को दूर करता है कि आम लोगों के लिए UPI भुगतान अचानक शुल्क योग्य हो सकते हैं। UPI यूजर्स और P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे, जबकि भविष्य में कोई MDR लागू किया जाता है तो वह केवल निर्धारित व्यापारी लेनदेन तक सीमित होगा। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य सभी लेनदेन पर शुल्क लगाए बिना UPI की दीर्घकालिक स्थिरता, ढांचे, सुरक्षा और विस्तार को मजबूत करना है।
डिजिटल सुविधाओं में परमात्मा की कृपा
आज का युग डिजिटल सुविधाओं का युग है। पैसों का लेनदेन हो या बैंकिंग से जुड़ा कोई काम, तकनीक ने मनुष्य के लिए कई कार्यों को पहले की तुलना में बेहद आसान और सुविधाजनक बना दिया है। भारत भी डिजिटल व्यवस्था के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो ऐसी सुविधाओं को परमात्मा की कृपा से जोड़कर भी समझा जा सकता है। मनुष्य को बुद्धि और विचार करने की क्षमता प्राप्त हुई, जिसके माध्यम से उसने विज्ञान और तकनीक का विकास किया। इसी बुद्धि के प्रयोग से आज ऐसी व्यवस्थाएं संभव हुई हैं, जो समय और श्रम दोनों को बचाती हैं।
तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के आध्यात्मिक ज्ञान से हमें यह ज्ञात होता है कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुविधाओं में समय बिताना नहीं, बल्कि अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझना भी है और भक्ति की ओर बढ़ना भी है। जब तकनीक समय बचाती है, तो उस समय का सदुपयोग अच्छे कर्मों, आत्मचिंतन और भक्ति के लिए किया जा सकता है।
FAQs on UPI Transactions
1. क्या UPI से भुगतान करने पर यूजर्स से शुल्क लिया जाएगा?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI यूजर्स से UPI भुगतान करने के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा।
2. क्या Person-to-Person UPI लेनदेन मुफ्त रहेंगे?
हां। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सभी Person-to-Person UPI लेनदेन मुफ्त रहेंगे।
3. क्या व्यापारियों को हर UPI लेनदेन पर MDR देना होगा?
नहीं। भविष्य में MDR लागू होने पर यह केवल तय सीमा से ऊपर होने वाले सीमित व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा।
4. क्या प्रस्तावित 0.25%–0.4% MDR अंतिम है?
नहीं। यह रिपोर्ट की गई संभावित दर है। अंतिम MDR दर और व्यवस्था अभी तय नहीं हुई है।
5. सरकार UPI पर MDR पर विचार क्यों कर रही है?
सरकार ने बढ़ते लेनदेन, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम, भुगतान ढांचे और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को कारण बताया है।

