प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 15 मई 2026 से अपनी महत्वपूर्ण पांच दिवसीय विदेश यात्रा आरंभ करने जा रहे हैं। इस दौरान वे यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे, जिसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
यूएई और नीदरलैंड: पहले पड़ाव की बड़ी बातें
प्रधानमंत्री सबसे पहले अबू धाबी पहुंचेंगे जहाँ वे राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ ऊर्जा और निवेश पर चर्चा करेंगे। इसके तुरंत बाद नीदरलैंड में सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन पर द्विपक्षीय वार्ता होगी।
- एनर्जी सिक्योरिटी: यूएई के साथ रणनीतिक तेल भंडार को लेकर बड़े समझौते होने की उम्मीद है।
- प्रवासी भारतीय: पीएम मोदी वहां रह रहे लाखों भारतीयों को संबोधित कर सकते हैं।
- नवाचार: नीदरलैंड के साथ ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
ट्रंप-चीन समिट: बीजिंग में ‘पावर’ गेम
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय चीन के दौरे पर हैं, जहाँ वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर रहे हैं। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी व्यापार युद्ध (Trade War) को कम करना और टैरिफ (Tariffs) पर कोई बीच का रास्ता निकालना है।
बीजिंग में हो रही इस बैठक में ट्रंप प्रशासन चीन से सोयाबीन, प्राकृतिक गैस (LNG) और बोइंग विमानों की बड़ी खरीद की मांग कर रहा है। हालांकि, ताइवान और तकनीकी प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बरकरार है।
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भारत-रूस तेल सौदा और 16 मई की समयसीमा
भारत के लिए 16 मई 2026 की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस से तेल आयात के लिए अमेरिका द्वारा दिया गया विशेष ‘प्रतिबंध वेवर’ (Sanctions Waiver) इसी दिन समाप्त हो रहा है।
भारत ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका से इस वेवर को आगे बढ़ाने (Extension) की मांग की है। ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंचने की वजह से भारत के लिए रूस का सस्ता तेल अनिवार्य हो गया है।

अमेरिकी वेवर की स्थिति और भारत की चुनौती
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के संकेतों के अनुसार, भारत को यह छूट मिल सकती है क्योंकि अमेरिका खुद वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखना चाहता है। यदि यह वेवर नहीं बढ़ता है, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस से तेल खरीदना मुश्किल हो सकता है, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत वर्तमान में रूस से रिकॉर्ड 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का आयात कर रहा है। विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार वाशिंगटन के संपर्क में हैं ताकि 16 मई के बाद भी यह आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
ऊर्जा सुरक्षा और पीएम मोदी की विदेश यात्रा का अंतर्संबंध
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में यूएई (UAE) का चरण अंतिम समय में जोड़ा गया है, जिसे इसी तेल संकट के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। चूँकि रूस से तेल लाने वाले टैंकरों पर 16 मई के बाद प्रतिबंधों का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए पीएम मोदी यूएई के साथ रणनीतिक भंडार और सुरक्षित आपूर्ति मार्गों पर चर्चा करेंगे। यह दौरा न केवल कूटनीतिक है, बल्कि भारत के 28 बिलियन डॉलर के नॉर्वेजियन निवेश और यूरोपीय व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने का एक सुविचारित प्रयास भी है।
संत रामपाल जी महाराज के सतज्ञान से मिटेंगे वैश्विक संकट
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि मनुष्य के जीवन में मची उथल पुथल हो, विश्व में बढ़ता तनाव हो या फिर युद्ध जैसी स्थितियां हो, केवल पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की भक्ति से ही शांत हो सकती हैं। आज जब बड़े-बड़े देश व्यापार और तेल के लिए संघर्ष कर रहे हैं, संत रामपाल जी महाराज उस सतज्ञान का मार्ग दिखा रहे हैं जिससे करोड़ों लोग प्रभावित होकर सुखी जीवन जी रहे हैं ।
उनके अनुसार, जब मनुष्य शास्त्रानुकूल साधना करता है, तो उसे न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि उसके सांसारिक कष्ट भी दूर होते हैं। उनकी शब्द शक्ति समाज को नशा मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में स्वतः ही काम कर रही है।
बस उनकी इसी शब्द शक्ति से, दुनिया में फैली अशान्ति वातावरण में मौजूद कार्बनडाईआक्साइड की तरह ऊपर चली जाएगी और सुख शांति समृद्धि साफ आक्सिजन की तरह नीचे आ जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक “जीने की राह” पुस्तक पढ़ें।
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. पीएम मोदी की यात्रा में कौन से 5 देश शामिल हैं?
यूएई (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली।
2. रूस से तेल आयात पर अमेरिकी वेवर कब खत्म हो रहा है?
यह वेवर 16 मई 2026 को समाप्त होने वाला है, जिसके विस्तार के लिए भारत ने अनुरोध किया है।
3. ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात कहाँ हो रही है?
यह उच्च-स्तरीय समिट चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित की जा रही है।

