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Home » Delhi Voter List Update: चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की बढ़ाई अंतिम तारीख, जानें कब जारी होगी दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट

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Delhi Voter List Update: चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की बढ़ाई अंतिम तारीख, जानें कब जारी होगी दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट

SA News
Last updated: September 28, 2026 3:25 pm
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Delhi Voter List 2026
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दिल्ली (Delhi NCR) के उन नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है, जिन्हें आगामी चुनावों को लेकर जारी की गई मतदाता सूची में अपने नाम से संबंधित दावे या आपत्तियां दर्ज करवानी हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में जारी वोटर लिस्ट के स्पेशल आइटिनेररी रिवीजन के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि को एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है।

Contents
  • Delhi Voter List Update मुख्य बिंदु:
  • नई समय-सीमा और फाइनल लिस्ट की तारीख
  • नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं: अधिकारियों की अपील
  • FAQs about Delhi Voter List Update:

पहले यह समय-सीमा 30 सितंबर को समाप्त हो रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है। इसके अलावा, फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने की तारीख में भी बदलाव किया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि चुनाव आयोग ने यह बदलाव क्यों किया है और दिल्लीवासियों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

Delhi Voter List Update मुख्य बिंदु:

  • निर्वाचन आयोग ने दिल्ली वोटर लिस्ट के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि एक महीने बढ़ा दी है।
  • अब नागरिक 30 सितंबर के बजाय 30 अक्टूबर 2026 तक SIR के तहत अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
  • दावों और आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा भी एक महीने बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई।
  • इस बदलाव के बाद, अब दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट 4 दिसंबर 2026 को जारी की जाएगी।

चुनाव आयोग ने क्यों बढ़ाई अंतिम तारीख?

दिल्ली में इन दिनों मतदाता सूचियों को अपडेट करने और उन्हें त्रुटिहीन बनाने के लिए स्पेशल आइटिनेररी रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया 31 अगस्त को शुरू हुई थी और प्रारंभिक कार्यक्रम के अनुसार, दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई थी। हालांकि, नागरिकों को पर्याप्त समय देने और प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के उद्देश्य से, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 23 सितंबर को चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा था।

इस पत्र में उन्होंने दिल्ली के लिए SIR शेड्यूल में बदलाव की मांग की थी। स्थिति की समीक्षा करने के बाद, चुनाव आयोग ने शनिवार को इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा को एक महीने बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा कर दी।

नई समय-सीमा और फाइनल लिस्ट की तारीख

चुनाव आयोग द्वारा किए गए बदलावों के बाद, दिल्ली वोटर लिस्ट अपडेट का नया शेड्यूल इस प्रकार है:

  1. दावे और आपत्तियां दर्ज करने की नई अंतिम तिथि: 30 अक्टूबर 2026 (पहले 30 सितंबर थी)।
  2. दावों और आपत्तियों के निपटारे की नई अंतिम तिथि: 30 नवंबर 2026 (पहले 30 अक्टूबर थी)।
  3. फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने की तिथि: 4 दिसंबर 2026।

नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं: अधिकारियों की अपील

वोटर लिस्ट के रिवीजन के दौरान, चुनाव आयोग कई मतदाताओं को उनके पते या अन्य विवरणों के सत्यापन के लिए नोटिस भेज रहा है। इससे कई मतदाताओं में यह भ्रम और डर पैदा हो गया था कि उनका नाम मतदाता सूची  से काटा जा रहा है। यह केवल एक सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है। 

नागरिकों के लिए क्या है संदेश?

दिल्ली के सभी मतदाताओं से अपील की जाती है कि वे इस अतिरिक्त समय का लाभ उठाएं। यदि आपकी वोटर आईडी में कोई सुधार होना है, या आपका नाम लिस्ट में नहीं है, तो तुरंत चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट Voter Helpline App या NVSP पोर्टल के माध्यम से या अपने नजदीकी चुनाव कार्यालय में जाकर 30 अक्टूबर 2026 से पहले अपने दावे या आपत्तियां दर्ज कराएं, ताकि 4 दिसंबर को जारी होने वाली फाइनल लिस्ट में आपका नाम सही तरीके से दर्ज हो सके।

शास्त्रार्थ का शंखनाद

जिस प्रकार चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से वोटर लिस्ट की त्रुटियों को सुधारने का अवसर देता है, उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज जी ने भी समाज में फैले धार्मिक पाखंडों और गलत धारणाओं को सुधारने के लिए “शास्त्रार्थ का शंखनाद” किया है। 3 और 4 अक्टूबर 2026 को साधना टीवी पर होने वाली इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक डिबेट में उन्होंने विश्व के सभी धर्मगुरुओं को पवित्र शास्त्रों वेद, गीता, पुराण, कुरान आदि के आधार पर चर्चा करने की खुली चुनौती दी है। 

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संत रामपाल जी महाराज जी का स्पष्ट कहना है कि इस शास्त्रार्थ का उद्देश्य किसी की हार-जीत नहीं, बल्कि भक्त समाज को शास्त्रानुकूल सही दिशा दिखाना है। उन्होंने घोषणा की है कि जो कोई भी उनके आध्यात्मिक ज्ञान को शास्त्रों के प्रमाण से गलत सिद्ध कर देगा, उसे 50 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस डिबेट का निर्णय ‘जनता रूपी जज’ करेगी। यह सत्य ज्ञान ही समाज को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर मोक्ष के मार्ग पर ले जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए www.jagatgururampalji.org पर विज़िट करें।

FAQs about Delhi Voter List Update:

Q1. दिल्ली वोटर लिस्ट के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की नई अंतिम तिथि क्या है?

चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दिया है।

Q2. दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट कब जारी की जाएगी?

दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद, दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट 4 दिसंबर 2026 को जारी की जाएगी।

Q3. SIR प्रक्रिया क्या है?

SIR मतलब Special Itinerary Revision मतदाता सूची को अपडेट करने, नए नाम जोड़ने और त्रुटियों जैसे गलत नाम, पता को सुधारने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है।

Q4. अगर मुझे चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट के संबंध में कोई नोटिस मिला है, तो क्या मेरा नाम कट गया है?l

नहीं, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस का मतलब नाम कटना नहीं है। यह सिर्फ एक सत्यापन प्रक्रिया है। उचित जांच के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाता है।

Q5. यह अंतिम तिथि क्यों बढ़ाई गई?

नागरिकों को अपने रिकॉर्ड सुधारने के लिए अधिक समय देने के उद्देश्य से, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर चुनाव आयोग ने यह समय-सीमा बढ़ाई है।


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GST पूरे UPI भुगतान की राशि पर नहीं लगेगा, बल्कि जहां MDR लागू होगा, वहां केवल MDR शुल्क पर 18% GST लगेगा। 5. GST-पंजीकृत पात्र व्यापारी MDR पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं, जिससे उनकी GST देनदारी में इसका समायोजन किया जा सकता है। 6. Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर MDR लागू नहीं होगा, इसलिए ऐसे व्यक्तिगत UPI ट्रांसफर पहले की तरह शुल्क मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के UPI भुगतान में नहीं लगेगा MDR नए नियम के अनुसार ₹2,000 तक के P2M UPI भुगतान पर MDR शून्य रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि इस सीमा तक होने वाले मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा और इसलिए MDR से जुड़ा GST भी नहीं बनेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार UPI के मर्चेंट लेनदेन की मात्रा में 96 प्रतिशत से अधिक भुगतान ₹2,000 तक के हैं। इसलिए बड़ी संख्या में रोज़मर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे। ₹1 लाख तक UPI प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी भी दायरे से बाहर NPCI ने छोटे व्यापारियों के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था भी बताई है। UPI QR के जरिए अपने बैंक खाते में हर महीने ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों पर MDR नहीं लगेगा। खास बात यह है कि ऐसे व्यापारी किसी एक लेनदेन में ₹2,000 से अधिक प्राप्त करें, तब भी निर्धारित शर्तों के अंतर्गत उन्हें MDR से छूट मिलेगी। इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडर्स को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाना है। GST पूरे UPI भुगतान पर नहीं, सिर्फ MDR पर लगेगा MDR को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान की पूरी रकम पर 18 प्रतिशत GST लगेगा। NPCI के स्पष्टीकरण के अनुसार ऐसा नहीं है। GST UPI से भेजी गई पूरी रकम पर नहीं, बल्कि लागू होने वाले MDR यानी भुगतान सेवा शुल्क पर लगेगा। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 के पात्र मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR के हिसाब से शुल्क ₹40 होगा। 18 प्रतिशत GST इसी ₹40 के सेवा शुल्क पर लगेगा, न कि पूरे ₹10,000 पर। ₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR 15 अक्टूबर से निर्धारित पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। इसका मतलब है कि बड़े भुगतान में भी MDR अनिश्चित रूप से नहीं बढ़ेगा। कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग रियायती व्यवस्था रखी गई है, जिसमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। GST-पंजीकृत व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ NPCI की सफाई में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। जो व्यापारी GST के तहत पंजीकृत हैं और पात्रता पूरी करते हैं, वे MDR पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। इसे उनकी बिक्री पर बनने वाली आउटपुट GST देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है। हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट का वास्तविक लाभ व्यापारी की GST स्थिति और उसके कारोबार की प्रकृति पर निर्भर करेगा। इसलिए हर व्यापारी के लिए इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा। आम ग्राहक से MDR वसूलने की अनुमति नहीं MDR का ढांचा व्यापारी भुगतान के पीछे काम करने वाले पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है। सरकार के अनुसार यह ग्राहक से UPI भुगतान करने के लिए अलग से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहक पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रदाताओं को भी छिपे हुए प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से रोकने की व्यवस्था बताई गई है। Person-to-Person UPI पहले की तरह मुफ्त रहेगा नए MDR ढांचे का असर Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांसफर पर नहीं पड़ेगा। दो व्यक्तियों के बीच पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले UPI लेनदेन किसी भी राशि के हों, वे MDR के दायरे में नहीं आएंगे। यानी किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर इस नए मर्चेंट शुल्क की व्यवस्था लागू नहीं होगी। NPCI ने छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव की आशंका को बताया गलत MDR पर GST को लेकर सामने आई चिंताओं पर NPCI ने कहा है कि छोटे व्यापारियों पर व्यापक अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका सही नहीं है। इसका आधार यह है कि ₹2,000 तक के अधिकांश मर्चेंट भुगतान MDR से बाहर हैं और ₹1 लाख तक की मासिक UPI प्राप्ति वाले पात्र छोटे व्यापारी भी MDR छूट में आते हैं। इसके अलावा पात्र GST-पंजीकृत व्यापारी MDR पर दिए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। नए नियम का मकसद UPI व्यवस्था को लंबे समय तक चलाने की तैयारी सरकार ने नए MDR ढांचे को UPI के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ा है। सरकार के अनुसार MDR से प्राप्त राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होगी। साथ ही MDR संग्रह का 5 प्रतिशत हिस्सा छोटे व्यापारियों और UPI के विस्तार से जुड़े फंड में देने का प्रावधान भी बताया गया है। कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला बदलाव हर UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की व्यवस्था नहीं है। ₹2,000 तक के P2M भुगतान, पात्र छोटे व्यापारियों के भुगतान और सभी P2P लेनदेन MDR से बाहर रहेंगे। ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू होगा, लेकिन GST पूरे UPI भुगतान पर नहीं बल्कि MDR सेवा शुल्क पर लगेगा। इसी आधार पर NPCI ने छोटे व्यापारियों पर व्यापक अतिरिक्त GST बोझ की आशंका को गलत बताया है। UPI MDR पर GST को लेकर NPCI की सफाई से संबंधित मुख्य FAQs 1. क्या UPI से पेमेंट करने पर अब 18% GST लगेगा? नहीं। 18% GST पूरे UPI भुगतान की राशि पर नहीं लगेगा। जहां MDR लागू होगा, वहां GST केवल MDR शुल्क पर लगेगा। 2. क्या ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर MDR लगेगा? अधिकतर पात्र ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान MDR से बाहर रहेंगे। इसलिए इन लेनदेन पर MDR से जुड़ा GST भी नहीं लगेगा। 3. छोटे दुकानदारों के लिए UPI MDR का नया नियम क्या है? ₹1 लाख तक मासिक UPI प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से छूट दी जाएगी। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का बोझ कम रखना है। 4. ₹2,000 से ज़्यादा UPI पेमेंट करने पर कितना MDR लगेगा? निर्धारित पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। 5. क्या UPI से पैसे भेजने वाले ग्राहक को MDR देना होगा? MDR व्यापारी भुगतान से जुड़ा शुल्क है। इसे ग्राहक से अलग से वसूलने की अनुमति नहीं है। 6. क्या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI भेजने पर MDR लगेगा? नहीं। Person-to-Person यानी P2P UPI लेनदेन नए MDR ढांचे के दायरे में नहीं आते। UPI MDR पर GST को लेकर NPCI की सफाई, छोटे दुकानदारों को राहत; जानिए 15 अक्टूबर से क्या बदलेगा
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