सड़क पर किसी वाहन चालक का ई-चालान कट जाता है और उसे लगता है कि चालान गलत तरीके से जारी किया गया है, तो वह उसे चुनौती दे सकता है। हालांकि, अब इसके लिए सीधे कोर्ट जाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
नए नियम के तहत वाहन चालक को सबसे पहले संबंधित अधिकारियों के सामने चालान के खिलाफ अपील करनी होगी। इसके बाद अधिकारी मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध सबूतों की जांच करेंगे। इसमें कैमरा फुटेज या डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की गई अन्य जानकारी को भी देखा जा सकता है। जांच के दौरान अगर संबंधित अथॉरिटी को लगता है कि चालान गलत तरीके से जारी किया गया है, तो उसे उसी स्तर पर रद्द किया जा सकेगा।
वहीं, अगर अथॉरिटी चालान रद्द नहीं करती और वाहन चालक उसके फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह अगली प्रक्रिया के तहत कोर्ट का रुख कर सकता है। हालांकि, इसके बाद भी कोर्ट जाने की प्रक्रिया पहले जैसी सीधी नहीं होगी। यानी चालान को चुनौती देने के लिए अब वाहन चालक को तय की गई प्रक्रिया के अगले चरणों का पालन करना होगा।
सुनवाई के लिए जमा करना होगा चालान का 50 प्रतिशत
अगर कोई वाहन चालक चालान को कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, तो उसे सुनवाई से पहले चालान की कुल रकम का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। इसके बाद ही कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होगी। इसे एक उदाहरण से समझें। मान लीजिए आपके वाहन का चालान 3,000 रुपये का है, तो कोर्ट में चुनौती देने से पहले आपको 1,500 रुपये जमा कराने होंगे। रकम जमा होने के बाद ही कोर्ट चालान से जुड़े मामले पर सुनवाई करेगा।
सीधे कोर्ट जाने की जरूरत नहीं
दरअसल, अब ट्रैफिक चालान सिर्फ ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के जरिए ही नहीं, बल्कि सड़कों पर लगे कैमरों और अन्य तकनीकी ऑटोमेटेड डिवाइस के माध्यम से भी जारी किए जाते हैं। ऐसे में अगर किसी वाहन चालक को लगता है कि उसके खिलाफ गलत चालान जारी हुआ है या उसने किसी यातायात नियम का उल्लंघन नहीं किया है, तो वह उसे चुनौती दे सकता है। नई व्यवस्था के तहत अब हर चालान को लेकर वाहन चालक को सीधे कोर्ट जाने की जरूरत नहीं होगी। पहले संबंधित अथॉरिटी के स्तर पर चालान का रिव्यू कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में उपलब्ध तथ्यों और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
चालान गलत या सही पाए जाने पर क्या होगा?
जांच के दौरान अगर संबंधित अथॉरिटी को पता चलता है कि चालान गलत तरीके से जारी किया गया है, तो उसे उसी स्तर पर रद्द कर दिया जाएगा। चालान रद्द होने की जानकारी वाहन चालक को संबंधित पोर्टल के माध्यम से दी जाएगी।
वहीं, अगर अथॉरिटी चालान को रद्द नहीं करती और वाहन चालक उसके फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह आगे इसे कोर्ट में चुनौती दे सकता है। हालांकि, कोर्ट जाने से पहले वाहन चालक को चालान की कुल रकम का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। यह राशि जमा करने के बाद ही कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा।

