चक्रवात मुरासु आंध्र प्रदेश की ओर तेजी से बढ़ रहा है, और 3 नवंबर को इसके लैंडफॉल की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 1 नवंबर 2026 के बुलेटिन के अनुसार, यह तूफान 2 नवंबर की सुबह तक गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है। इस दौरान, यह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच पार करने का अनुमान है। हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है, जबकि तेज झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।
- चक्रवात मुरासु से जुड़ी प्रमुख जानकारियां
- आंध्र प्रदेश में 3 नवंबर को पहुंच सकता है तूफान
- तमिलनाडु और तेलंगाना में भारी बारिश की संभावना
- ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बदलेगा मौसम
- महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में बारिश का अनुमान
- चक्रवात के दौरान किन सावधानियों का पालन करें?
- चक्रवात मुरासु की ताजा जानकारी कहां मिलेगी?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह मौसम प्रणाली केवल आंध्र प्रदेश पर ही प्रभाव डालने वाली नहीं है। इसके प्रभाव से तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश हो सकती है। ऐसे में तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग और यात्री मौसम विभाग की नवीनतम चेतावनियों पर नजर रखें।
चक्रवात मुरासु से जुड़ी प्रमुख जानकारियां
| मौसम संबंधी जानकारी | IMD का पूर्वानुमान |
| तूफान का नाम | मुरासु (Murasu) |
| वर्तमान क्षेत्र | दक्षिण-पश्चिम और उससे सटी पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी |
| संभावित तीव्रता | गंभीर चक्रवाती तूफान |
| संभावित लैंडफॉल | 2 नवंबर की रात से 3 नवंबर की सुबह |
| संभावित तटीय क्षेत्र | नेल्लोर और नरसापुर के बीच |
| अनुमानित हवा की गति | 100–110 किमी प्रति घंटा |
| तेज झोंकों की गति | 120 किमी प्रति घंटा तक |
| प्रमुख प्रभावित क्षेत्र | दक्षिण आंध्र प्रदेश और आसपास के तटीय इलाके |
यह जानकारी IMD के 1 नवंबर के समुद्री मौसम बुलेटिन पर आधारित है। पूर्वानुमान में बदलाव संभव है।
आंध्र प्रदेश में 3 नवंबर को पहुंच सकता है तूफान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय यह प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही है। 1 नवंबर को जारी बुलेटिन में इसका केंद्र चेन्नई से लगभग 480 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और नेल्लोर से करीब 550 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व स्थित बताया गया।
विश्लेषण के अनुसार, यह तूफान 2 नवंबर को और अधिक प्रबल होकर गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके बाद, यह नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट को पार करने की संभावना है।
तेज हवाएं और बारिश तटीय क्षेत्रों, बिजली आपूर्ति, सड़कों और कृषि गतिविधियों पर प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए प्रशासन को संवेदनशील इलाकों की निगरानी और राहत कार्यों की तैयारी करनी आवश्यक होगी।
तमिलनाडु और तेलंगाना में भारी बारिश की संभावना
चक्रवात के प्रभाव से, 1 और 2 नवंबर को तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की उम्मीद है। उत्तरी तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं और समुद्री परिस्थितियों में खराबी भी देखी जा सकती है।
वहीं, तेलंगाना में 2 नवंबर को अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है, जबकि 3 नवंबर को कुछ स्थानों पर और भी ज्यादा वर्षा हो सकती है। निरंतर बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव और यातायात व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होने की चिंताएं हैं। ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी की गई चेतावनियों का ध्यानपूर्वक पालन करना चाहिए।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बदलेगा मौसम
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में मौसम में बदलाव आने वाला है। 3 और 4 नवंबर को दक्षिणी ओडिशा में बारिश की गतिविधियाँ बढ़ने की संभावना है। वहीं, छत्तीसगढ़ में 2 नवंबर को भारी बारिश और 3 से 4 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश होने का अनुमान है।
इन क्षेत्रों के निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों को जलभराव और स्थानीय बाढ़ के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। किसानों को अपनी फसलों और कृषि उत्पादों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि एवं मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए।
महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में बारिश का अनुमान
मौसम प्रणाली से जुड़ी वर्षा गतिविधियों का असर मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है।
- मध्य प्रदेश: 1 से 5 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
- महाराष्ट्र: कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 5 नवंबर तक अलग-अलग स्थानों पर बारिश हो सकती है।
- गुजरात: 3 नवंबर तक कुछ इलाकों में वर्षा का अनुमान है।
- छत्तीसगढ़: 3 और 4 नवंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
मध्य प्रदेश में बारिश का प्रभाव सभी जिलों में समान नहीं होगा। इसलिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और अन्य शहरों के लिए अलग-अलग जिला पूर्वानुमान देखना बेहतर रहेगा।
चक्रवात के दौरान किन सावधानियों का पालन करें?
चक्रवाती तूफान के दौरान तेज हवाएं, समुद्र में ऊंची लहरें और भारी बारिश जोखिम बढ़ा सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए:
- मछुआरे समुद्र में जाने से बचें और पहले से समुद्र में मौजूद लोग सुरक्षित वापसी के निर्देशों का पालन करें।
- प्रशासन की ओर से निकासी का आदेश मिलने पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचें।
- पीने का पानी, जरूरी दवाइयां, टॉर्च और महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार रखें।
- तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों से दूर रहें।
- बिजली कड़कने पर खुले मैदान या समुद्र तट पर न रुकें।
- सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों पर भरोसा न करें।
चक्रवात मुरासु की ताजा जानकारी कहां मिलेगी?
तूफान की दिशा, हवा की गति और संभावित लैंडफॉल में बदलाव हो सकता है। इसलिए केवल पुराने समाचारों पर निर्भर रहने के बजाय भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की चेतावनियां देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. चक्रवात मुरासु भारत के किस राज्य के तट से टकरा सकता है?
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, यह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को नेल्लोर और नरसापुर के बीच पार कर सकता है।
2. चक्रवात मुरासु का लैंडफॉल कब हो सकता है?
संभावित लैंडफॉल 2 नवंबर 2026 की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच हो सकता है।
3. तूफान के दौरान हवा की गति कितनी रह सकती है?
IMD ने 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा की निरंतर हवा और 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक के झोंकों का अनुमान दिया है।
4. किन राज्यों में भारी बारिश का खतरा है?
आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना प्रमुख संभावित प्रभावित क्षेत्र हैं। ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है।
5. क्या मध्य प्रदेश में भी चक्रवात का असर होगा?
IMD के विस्तारित पूर्वानुमान में मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना है। हालांकि, इसका असर जिले के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

