त्योहारी सीजन में दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग बढ़ने के बीच मिलावटी पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई तेज हुई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आधिकारिक दस्तावेज में पनीर में स्टार्च की मौजूदगी जाँचने के लिए आयोडीन टेस्ट का तरीका बताया गया है। वहीं, गैर-डेयरी उत्पादों को पनीर के नाम से बेचने और उनकी सही लेबलिंग का मुद्दा भी चर्चा में है।
- पनीर में मिलावट की जाँच के लिए क्या कहता है FSSAI?
- घर पर असली और नकली पनीर पहचानने के छह बताए गए तरीके
- आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की जाँच
- हाथ से मसलने का परीक्षण
- गर्म पानी में रखकर जाँच
- स्वाद और गंध पर ध्यान दें
- तवे पर गर्म करने का तरीका
- अरहर दाल पाउडर वाला परीक्षण
- त्योहारी सीजन में पनीर और खोया पर कार्रवाई तेज
- गैर-डेयरी पनीर की लेबलिंग पर FSSAI का प्रस्ताव
- पनीर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- पनीर की शुद्धता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी
- ईमानदारी और सदाचार का संदेश
- FAQs on असली और नकली पनीर की पहचान
पनीर में मिलावट की जाँच के लिए क्या कहता है FSSAI?
FSSAI के Guidance Note on Milk Products में पनीर, छेना, खोया और घी जैसे खाद्य उत्पादों में स्टार्च की जाँच के लिए एक आसान परीक्षण दिया गया है। इसके अनुसार, नमूने की थोड़ी मात्रा को पानी के साथ उबालकर ठंडा किया जाता है और फिर आयोडीन घोल की कुछ बूँदें डाली जाती हैं। नीला रंग बनने पर नमूने में स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिलता है।
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यहाँ एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की मौजूदगी का पता चलता है, लेकिन केवल इस परिणाम के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि पनीर में कौन-सा रसायन है या उत्पाद पूरी तरह नकली और असुरक्षित है। इसी तरह, रंग न बदलने से पनीर की पूर्ण शुद्धता की गारंटी नहीं मिलती।
घर पर असली और नकली पनीर पहचानने के छह बताए गए तरीके
पनीर की पहचान से संबंधित प्रकाशित रिपोर्ट में छह घरेलू तरीके बताए गए हैं। इनमें आयोडीन टेस्ट के अलावा हाथ से मसलना, गर्म पानी में रखना, स्वाद और गंध जाँचना, तवे पर गर्म करना तथा अरहर दाल के पाउडर का इस्तेमाल शामिल है। हालाँकि, इन सभी तरीकों को FSSAI द्वारा आधिकारिक रूप से प्रमाणित परीक्षण बताने की पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों से नहीं होती।
आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की जाँच
तरीका: पनीर के छोटे नमूने को थोड़े पानी के साथ उबालें। ठंडा होने के बाद आयोडीन घोल की दो से तीन बूँदें डालें।
क्या संकेत मिलता है? यदि नमूने का रंग नीला हो जाता है, तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत है। FSSAI के दस्तावेज में यही परीक्षण पनीर सहित कुछ अन्य दूध उत्पादों के लिए दिया गया है।
हाथ से मसलने का परीक्षण
तरीका: पनीर का एक छोटा टुकड़ा लेकर उसे उँगलियों के बीच मसलें।
प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि असली पनीर नरम और दानेदार होता है तथा मसलने पर टूट सकता है। इसके विपरीत, कथित नकली पनीर को रबर जैसा, अधिक सख्त या चिपचिपा बताया गया है। हालाँकि, केवल बनावट देखकर पनीर की प्रामाणिकता की निर्णायक पुष्टि नहीं की जा सकती।
गर्म पानी में रखकर जाँच
तरीका: पनीर के टुकड़े को गर्म पानी में पाँच से सात मिनट तक रखें।
रिपोर्ट के मुताबिक, असली पनीर गर्म पानी में नरम हो सकता है, जबकि वनस्पति तेल से बने कुछ उत्पादों में टूटने या बिखरने जैसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं। लेकिन तापमान, नमी और उत्पाद की संरचना के कारण भी बनावट बदल सकती है। इसलिए इस तरीके को अकेले निर्णायक परीक्षण नहीं माना जाना चाहिए।
स्वाद और गंध पर ध्यान दें
रिपोर्ट में असली पनीर की हल्की दूध जैसी महक और मलाईदार स्वाद का उल्लेख किया गया है। वहीं, असामान्य रासायनिक या डिटर्जेंट जैसी गंध और रबर जैसी बनावट को संदिग्ध संकेत बताया गया है।
हालाँकि, संदिग्ध पनीर को केवल जाँचने के लिए कच्चा चखना उचित नहीं है। असामान्य गंध या स्वरूप मिलने पर उसका सेवन न करें और आवश्यकता पड़ने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से जाँच कराने की सलाह लें।
तवे पर गर्म करने का तरीका
रिपोर्ट में पनीर के टुकड़े को बिना तेल या पानी के तवे पर गर्म करने का तरीका भी बताया गया है। इसमें दावा किया गया है कि असली पनीर हल्का सुनहरा हो सकता है, जबकि कुछ अन्य उत्पाद अधिक चिपचिपे हो सकते हैं या उनका आकार बदल सकता है।
लेकिन केवल गर्म करने पर होने वाले बदलाव से यह साबित नहीं होता कि पनीर असली है या नकली। इस परीक्षण की FSSAI के उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि नहीं हुई है।
अरहर दाल पाउडर वाला परीक्षण
रिपोर्ट के अनुसार, पनीर को पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद उसमें अरहर दाल का पाउडर मिलाकर लगभग दस मिनट तक रखा जाता है। दावा है कि पानी का रंग हल्का लाल होने पर मिलावट का संदेह हो सकता है।
हालाँकि, उपलब्ध आधिकारिक FSSAI दस्तावेजों में इस तरीके को नकली पनीर की पहचान का प्रमाणित परीक्षण नहीं पाया गया है। इसलिए इसके परिणाम को निर्णायक मानना सही नहीं होगा।
त्योहारी सीजन में पनीर और खोया पर कार्रवाई तेज
3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI ने नवरात्रि और दीपावली के दौरान खाद्य सुरक्षा निरीक्षण और नमूने लेने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट में दिल्ली में पिछले महीने 4,100 किलोग्राम से अधिक संदिग्ध मिलावटी खोया और पनीर नष्ट किए जाने तथा मेवात में पिछले महीनों के दौरान 10,000 किलोग्राम से अधिक मिलावटी पनीर जब्त कर नष्ट किए जाने की जानकारी दी गई।
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इसके बाद भी अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई की खबरें सामने आईं।
- तारीख: 4 अक्टूबर 2026 स्थान: चंडीगढ़ कार्रवाई: राम दरबार मंडी क्षेत्र में 200 किलोग्राम संदिग्ध पनीर जब्त; नमूने प्रयोगशाला भेजे गए।
- तारीख: 10 अक्टूबर 2026 स्थान: पटियाला कार्रवाई: 125 किलोग्राम पनीर जब्त कर नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए लिए गए।
- तारीख: 13 अक्टूबर 2026 स्थान: गुरुग्राम कार्रवाई: 365 किलोग्राम पनीर और खोया जब्त कर नष्ट किए गए।
इन कार्रवाइयों में संदिग्ध उत्पादों की जब्ती और नष्ट किए जाने का उल्लेख है। जहाँ प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रिया बताई गई है, वहाँ अंतिम निष्कर्ष को रिपोर्ट आने के बाद ही निश्चित माना जाना चाहिए।
गैर-डेयरी पनीर की लेबलिंग पर FSSAI का प्रस्ताव
24 सितंबर 2026 को FSSAI की अधिसूचना सूची में Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 का मसौदा दर्ज किया गया। यह मसौदा दूध से प्राप्त न होने वाले घटकों से बने पनीर के नाम से बिक्री पर प्रतिबंध से संबंधित है। इसका उद्देश्य गैर-डेयरी उत्पादों को पारंपरिक दूध-आधारित पनीर के रूप में प्रस्तुत किए जाने से रोकना है।
द इंडियन एक्सप्रेस की 25 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन के मसौदे पर सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की गई थीं। मसौदे को अंतिम रूप से लागू नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
14 अक्टूबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली हाईकोर्ट में गैर-डेयरी उत्पादों को पनीर के नाम से बेचने के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई की रिपोर्ट प्रकाशित की। अदालत ने केंद्र, FSSAI और दिल्ली सरकार से जवाब माँगा। रिपोर्ट के अनुसार, याचिका का जोर गैर-डेयरी उत्पादों की सही लेबलिंग और उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाने पर था; अदालत ने उस समय अंतरिम राहत नहीं दी।
पनीर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
पनीर की शुद्धता को लेकर संदेह होने पर केवल घरेलू परीक्षणों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। आयोडीन टेस्ट स्टार्च की मौजूदगी का संकेत देता है, जबकि अन्य घरेलू तरीकों की सीमाएँ हैं। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शिकायत के लिए FSSAI के फूड सेफ्टी कनेक्ट माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पनीर की शुद्धता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी
त्योहारी सीजन में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई और गैर-डेयरी उत्पादों की लेबलिंग पर नियामकीय पहल इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बनाती हैं। आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की जाँच की जा सकती है, लेकिन पनीर की पूर्ण शुद्धता की पुष्टि के लिए जरूरत पड़ने पर प्रयोगशाला परीक्षण आवश्यक है। उपभोक्ताओं को घरेलू संकेतों और प्रमाणित जाँच के बीच अंतर समझना चाहिए।
ईमानदारी और सदाचार का संदेश
तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि चोरी, ठगी, भ्रष्टाचार और बेईमानी से धन कमाना गलत कर्म है। मनुष्य को मेहनत और ईमानदारी से आजीविका कमानी चाहिए तथा किसी के साथ धोखाधड़ी नहीं करनी चाहिए।
खाद्य पदार्थों में मिलावट करके उपभोक्ताओं को धोखा देना भी इसी नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। पनीर जैसे खाद्य उत्पादों की शुद्धता बनाए रखना और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना आवश्यक है।
अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर जाएँ:
वेबसाइट: www.jagatgururampalji.org
FAQs on असली और नकली पनीर की पहचान
1. असली और नकली पनीर की पहचान कैसे करें?
आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की मौजूदगी जाँची जा सकती है। अन्य घरेलू तरीकों से पनीर की प्रामाणिकता की निर्णायक पुष्टि नहीं होती।
2. FSSAI के आयोडीन टेस्ट में नीला रंग आने का क्या मतलब है?
पनीर के नमूने में आयोडीन डालने पर नीला रंग बनना स्टार्च की मौजूदगी का संकेत है।
3. क्या गर्म पानी से नकली पनीर की पहचान हो सकती है?
गर्म पानी में बनावट बदल सकती है, लेकिन इस तरीके से अकेले पनीर के नकली होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
4. FSSAI ने पनीर में मिलावट की जाँच के लिए कौन-सा आधिकारिक तरीका बताया है?
FSSAI के आधिकारिक दस्तावेज में पानी के साथ नमूना उबालकर ठंडा करने और आयोडीन डालने से स्टार्च जाँचने का तरीका दिया गया है।
5. क्या गैर-डेयरी उत्पादों को पनीर के नाम से बेचने पर प्रतिबंध का नियम लागू हो चुका है?
24 सितंबर 2026 को संबंधित संशोधन का मसौदा जारी होने की जानकारी दी गई थी। उपलब्ध स्रोतों के आधार पर इसे अंतिम रूप से लागू नियम नहीं कहा जा सकता।

