SA NewsSA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
SA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Politics
  • Educational
  • Tech
  • History
  • Events
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Follow US
© 2024 SA News. All Rights Reserved.

Home » गॉल ब्लैडर की पथरी: लक्षण, कारण, जांच, इलाज और बचाव के उपाय

Health

गॉल ब्लैडर की पथरी: लक्षण, कारण, जांच, इलाज और बचाव के उपाय

SA News
Last updated: August 16, 2026 11:27 am
SA News
Share
गॉल ब्लैडर की पथरी लक्षण, कारण, जांच, इलाज और बचाव के उपाय
SHARE

कई बार पेट में अचानक उठने वाले दर्द को लोग सामान्य अपच, एसिडिटी या गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दर्द कम करने वाली दवा लेने के बाद भी यदि तकलीफ बनी रहे या बार-बार लौटकर आए, तो इसके पीछे पित्ताशय में बनी पथरी भी जिम्मेदार हो सकती है। शुरुआत में यह समस्या बिना किसी स्पष्ट संकेत के रह सकती है, लेकिन पथरी के कारण पित्त के प्रवाह में रुकावट आने पर तेज दर्द से लेकर संक्रमण, पीलिया और अग्न्याशय में सूजन जैसी गंभीर परेशानियां पैदा हो सकती हैं।

Contents
  • गॉल ब्लैडर की पथरी से संबंधित मुख्य बिंदु : 
  • पित्ताशय शरीर में क्या काम करता है?
  • आखिर पित्ताशय में पथरी बनती कैसे है?
  • गॉल ब्लैडर स्टोन के अलग-अलग रूप कौन से हैं?
  • किन लोगों में संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है?
  • वज़न से लेकर खान-पान तक, ये कारक बढ़ा सकते हैं जोखिम
  • कई मरीज़ों को पता ही नहीं चलता कि पथरी मौजूद है
  • इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
  • बीमारी की पुष्टि के लिए कौन-कौन सी जांच होती है?
  • हर मरीज़ को ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं होती
  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे होती है? 
  • किन परिस्थितियों में तत्काल ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है?
  • क्या दवाओं से पथरी समाप्त की जा सकती है?
  • पित्ताशय निकलने के बाद सामान्य जीवन संभव है?
  • इलाज में देरी से कौन-कौन सी जटिलताएं हो सकती हैं?
  • खान-पान और दिनचर्या में बदलाव से जोखिम घटाया जा सकता है
  • घरेलू नुस्खों को लेकर सावधानी ज़रूरी 
  • तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
  • गॉल ब्लैडर की पथरी से संबंधित मुख्य FAQs

समय रहते जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेने से अधिकांश मामलों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता है। इसलिए दाईं तरफ ऊपरी पेट में होने वाले लगातार या तेज दर्द को केवल गैस मानकर स्वयं उपचार करना उचित नहीं है।

गॉल ब्लैडर की पथरी से संबंधित मुख्य बिंदु : 

  • पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में तेज दर्द गॉल ब्लैडर स्टोन का प्रमुख संकेत हो सकता है।
  • कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन और पित्त के असंतुलन से पथरी बनने की संभावना बढ़ती है।
  • महिलाओं, अधिक वजन, मधुमेह और 40 वर्ष से अधिक उम्र में इसका जोखिम ज्यादा देखा जाता है।
  • अल्ट्रासाउंड गॉल ब्लैडर की पथरी की पहचान के लिए प्रमुख जांच है।
  • लक्षण न होने पर हर मरीज को सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती, जबकि बार-बार दर्द या जटिलताओं में ऑपरेशन किया जा सकता है।
  • स्वस्थ वज़न, नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन अपनाकर पथरी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

पित्ताशय शरीर में क्या काम करता है?

पित्ताशय यानी गॉल ब्लैडर यकृत के ठीक नीचे मौजूद एक छोटी थैली जैसा अंग है। इसकी सामान्य लंबाई लगभग 7 से 10 सेंटीमीटर मानी जाती है। इसका प्रमुख कार्य यकृत से बनने वाले पित्त रस को कुछ समय के लिए जमा करके रखना है।

यह भी पढ़ें : मानव अस्तित्व और सतत विकास के लिए जैव विविधता का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

पित्त रस भोजन के पाचन में विशेष रूप से वसा को पचाने में सहायता करता है। जब भोजन छोटी आंत में पहुंचता है, तब पित्ताशय संचित पित्त को आगे भेजता है। इसी व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर पथरी बनने या उससे संबंधित समस्या पैदा होने की संभावना रहती है।

आखिर पित्ताशय में पथरी बनती कैसे है?

पित्त के भीतर अलग-अलग रासायनिक घटक मौजूद होते हैं। इनमें कोलेस्ट्रॉल, पित्त लवण और बिलीरुबिन प्रमुख हैं। सामान्य परिस्थितियों में इनका संतुलन बना रहता है, लेकिन जब किसी कारण से यह संतुलन बिगड़ता है, तब छोटे कण या क्रिस्टल बनने लगते हैं।

समय के साथ ये कण एक-दूसरे पर जमा होकर कठोर संरचना का रूप ले सकते हैं। यही संरचनाएं आगे चलकर गॉल ब्लैडर स्टोन कहलाती हैं।

पथरी बनने की प्रमुख परिस्थितियों में पित्त में अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल का जमा होना, पित्ताशय का पर्याप्त रूप से खाली न होना, बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ना तथा स्थानीय सूजन या संक्रमण जैसी स्थितियां शामिल हैं।

गॉल ब्लैडर स्टोन के अलग-अलग रूप कौन से हैं?

पित्ताशय में बनने वाली सभी पथरियां एक जैसी नहीं होतीं। उनकी संरचना और बनने की प्रक्रिया के आधार पर उन्हें अलग-अलग वर्गों में समझा जाता है।

कोलेस्ट्रॉल स्टोन

यह सबसे सामान्य प्रकार माना जाता है। इसमें पित्त के भीतर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने पर धीरे-धीरे ठोस कण बनने लगते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत मामलों में इस प्रकार की पथरी देखी जाती है।

पिगमेंट स्टोन

इसका संबंध मुख्य रूप से बिलीरुबिन से होता है। शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने वाली कुछ परिस्थितियों, विशेषकर कुछ यकृत या रक्त संबंधी बीमारियों में इस प्रकार के पत्थर बनने की संभावना बढ़ सकती है।

मिश्रित संरचना वाली पथरी

कुछ मामलों में पथरी एक ही पदार्थ से नहीं बनती, बल्कि कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम तथा बिलीरुबिन जैसे घटक मिलकर कठोर जमाव तैयार करते हैं। इसे मिश्रित पथरी कहा जाता है।

किन लोगों में संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है?

चिकित्सा जगत में गॉल ब्लैडर स्टोन के जोखिम को समझाने के लिए पारंपरिक रूप से ‘5F’ शब्दावली का उल्लेख किया जाता है। इसमें महिला होना, 40 वर्ष या उससे अधिक आयु, अधिक शरीर का वजन, प्रजनन संबंधी अवस्थाएं और कुछ आबादीगत कारक शामिल किए जाते हैं।

हालांकि केवल इन विशेषताओं के आधार पर किसी व्यक्ति में पथरी होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। वास्तविक जोखिम कई अन्य परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।

वज़न से लेकर खान-पान तक, ये कारक बढ़ा सकते हैं जोखिम

मोटापा और शरीर में अत्यधिक वसा इस समस्या से जुड़े प्रमुख कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा मधुमेह, रक्त में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, गर्भावस्था, एस्ट्रोजन युक्त कुछ दवाएं तथा परिवार में पहले से इस बीमारी का इतिहास भी संभावना बढ़ा सकता है।

लंबे समय तक भोजन न करना, बार-बार उपवास करना या बहुत तेजी से वजन घटाना भी पित्ताशय की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। अत्यधिक वसा वाला भोजन, फाइबर की कमी, कुछ यकृत संबंधी बीमारियां, हीमोलिटिक एनीमिया और बढ़ती उम्र भी जोखिम से जुड़े कारकों में गिने जाते हैं।

भारत में भी यह समस्या महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चिंता के रूप में सामने आती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 5 से 15 प्रतिशत लोगों में जीवन के किसी चरण में पित्ताशय की पथरी हो सकती है। महिलाओं में इसकी संभावना पुरुषों की तुलना में लगभग दो से तीन गुना अधिक बताई जाती है। बढ़ते वजन, कम शारीरिक गतिविधि और अत्यधिक प्रोसेस्ड या फास्ट फूड के सेवन के कारण कम उम्र के लोगों में भी यह समस्या देखने को मिल रही है।

कई मरीज़ों को पता ही नहीं चलता कि पथरी मौजूद है

गॉल ब्लैडर में स्टोन होने का मतलब हमेशा दर्द होना नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों में यह बिना किसी स्पष्ट शिकायत के मौजूद रह सकती है और किसी दूसरी समस्या के लिए कराए गए पेट के अल्ट्रासाउंड में अचानक इसका पता चलता है।

समस्या तब अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जब पथरी पित्त के रास्ते को प्रभावित करने लगे। ऐसी स्थिति में पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में तेज दर्द हो सकता है। कई बार यह पीड़ा पीठ या कंधे की तरफ भी महसूस हो सकती है।

विशेषकर तैलीय या भारी भोजन के बाद परेशानी बढ़ सकती है। इसके साथ मितली, उल्टी, पेट फूलना, अपच और पेट में असहजता जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।

इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

यदि पेट दर्द के साथ शरीर का तापमान बढ़ जाए, ठंड लगने लगे या त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ने लगे, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।

गहरे रंग का मूत्र, असामान्य रूप से हल्का मल, लगातार उल्टी या असहनीय पेट दर्द भी चिकित्सकीय जांच की ज़रूरत दर्शाते हैं। ऐसे लक्षणों में घर पर दर्द की दवा लेकर इंतज़ार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना अधिक सुरक्षित है।

बीमारी की पुष्टि के लिए कौन-कौन सी जांच होती है?

पेट का अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासोनोग्राफी सामान्यतः शुरुआती और उपयोगी जांचों में शामिल है। यह अपेक्षाकृत सरल, आसानी से उपलब्ध और कम खर्च वाली जांच है, जिससे गॉल ब्लैडर में मौजूद स्टोन का पता लगाया जा सकता है।

रक्त संबंधी परीक्षण

स्थिति का आकलन करने के लिए डॉक्टर सीबीसी, लिवर फंक्शन टेस्ट, बिलीरुबिन तथा विभिन्न लिवर एंजाइम की जांच करा सकते हैं। इससे संक्रमण, सूजन या पित्त प्रवाह में रुकावट जैसी स्थितियों का संकेत मिल सकता है।

CT स्कैन और MRCP

यदि चिकित्सक को मुख्य पित्त नली में स्टोन होने की आशंका हो या सामान्य अल्ट्रासाउंड से स्थिति स्पष्ट न हो, तो आगे की इमेजिंग जांच की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसी परिस्थिति में CT स्कैन अथवा MRCP उपयोगी हो सकते हैं।

ERCP

कुछ विशेष परिस्थितियों में ERCP का इस्तेमाल किया जाता है। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि चुनिंदा मामलों में इस प्रक्रिया के माध्यम से पित्त नली में फंसी पथरी को निकालने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

हर मरीज़ को ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं होती

यदि पित्ताशय में स्टोन मौजूद है लेकिन व्यक्ति को कोई लक्षण नहीं हैं, तो हर स्थिति में तुरंत सर्जरी करना ज़रूरी नहीं होता। कई ऐसे मरीजों को डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता है।

लेकिन जब बार-बार दर्द होने लगे, पथरी के कारण जटिलताएं पैदा हों या पित्ताशय की कार्यप्रणाली प्रभावित हो, तब चिकित्सक ऑपरेशन की सलाह दे सकते हैं। उपचार का निर्णय पथरी की स्थिति, लक्षणों और मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य अवस्था के आधार पर किया जाता है।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे होती है? 

लक्षण वाली गॉल ब्लैडर स्टोन बीमारी में लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी एक स्थापित उपचार पद्धति है। इसमें छोटे-छोटे चीरे लगाकर प्रभावित पित्ताशय को निकाल दिया जाता है।

पारंपरिक बड़े चीरे वाली प्रक्रिया की तुलना में लैप्रोस्कोपिक तकनीक में सामान्यतः घाव छोटा रहता है, दर्द और रक्तस्राव अपेक्षाकृत कम हो सकता है तथा रिकवरी जल्दी हो सकती है। उपयुक्त मरीजों को स्थिति के अनुसार कम समय में अस्पताल से छुट्टी भी दी जा सकती है।

किन परिस्थितियों में तत्काल ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है?

यदि पित्ताशय में गंभीर सूजन विकसित हो जाए, संक्रमण बढ़ जाए, अंग की दीवार को नुकसान पहुंचने लगे या उसके फटने का खतरा पैदा हो जाए, तो स्थिति आपातकालीन बन सकती है।

इसके अलावा पित्त नली में रुकावट, पित्त नली का संक्रमण या अग्न्याशय में सूजन जैसी जटिलताएं होने पर तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक हो सकता है।

क्या दवाओं से पथरी समाप्त की जा सकती है?

कुछ चुनिंदा मरीजों में विशेष दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह विकल्प हर प्रकार के स्टोन और हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। कुछ छोटी कोलेस्ट्रॉल पथरियों में दवा से लाभ मिलने की संभावना हो सकती है।

ऐसी चिकित्सा में लंबा समय लग सकता है और उपचार बंद होने के बाद दोबारा पथरी बनने की संभावना भी रहती है। इसलिए दवा का इस्तेमाल केवल विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

पित्ताशय निकलने के बाद सामान्य जीवन संभव है?

गॉल ब्लैडर निकाल दिए जाने को लेकर कई मरीजों में डर रहता है कि इसके बाद भोजन पचाने में हमेशा परेशानी होगी। वास्तव में यकृत पित्त का निर्माण करना बंद नहीं करता। ऑपरेशन के बाद यह पित्त सीधे छोटी आंत में पहुंचता रहता है।

इसी कारण बहुत से लोग पित्ताशय हटने के बाद भी सामान्य दैनिक जीवन व्यतीत करते हैं। हालांकि हर मरीज का अनुभव अलग हो सकता है और ऑपरेशन के बाद भोजन व दिनचर्या को लेकर डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।

इलाज में देरी से कौन-कौन सी जटिलताएं हो सकती हैं?

पथरी को लंबे समय तक अनदेखा करने पर पित्ताशय में गंभीर सूजन और संक्रमण विकसित हो सकता है। कुछ मामलों में मवाद जमा होने, ऊतक नष्ट होने या अंग की दीवार में छेद होने जैसी गंभीर स्थिति भी बन सकती है।

यदि स्टोन पित्त नली को रोक देता है तो पीलिया और संक्रमण हो सकता है। पित्त के मार्ग में रुकावट के कारण अग्न्याशय में सूजन भी विकसित हो सकती है। दुर्लभ परिस्थितियों में आंतों में रुकावट जैसी समस्या भी देखी जा सकती है। लंबे समय से मौजूद पित्ताशय की बीमारी के साथ कैंसर का जोखिम दुर्लभ रूप से जुड़ा हो सकता है।

खान-पान और दिनचर्या में बदलाव से जोखिम घटाया जा सकता है

हर व्यक्ति में गॉल ब्लैडर स्टोन को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतों से जोखिम कम करने में सहायता मिल सकती है।

शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यदि वजन घटाना हो तो बहुत तेजी से वजन कम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त फाइबर वाला भोजन, फल-सब्जियों और साबुत अनाज का संतुलित सेवन उपयोगी हो सकता है।

बहुत अधिक तली हुई चीजें, अत्यधिक वसायुक्त भोजन, ट्रांस फैट, ज्यादा चीनी और बार-बार फास्ट फूड खाने से बचना बेहतर है। पर्याप्त पानी पीना और मधुमेह होने पर रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना भी समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

घरेलू नुस्खों को लेकर सावधानी ज़रूरी 

गॉल ब्लैडर स्टोन को घरेलू नुस्खों या तथाकथित ‘स्टोन गलाने’ वाले उपायों से पूरी तरह खत्म करने के दावे के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। बिना चिकित्सकीय जांच के ऐसे प्रयोग करना नुकसानदायक हो सकता है, खासकर तब जब पथरी पित्त नली में फंस चुकी हो।

इसी तरह यह मानना भी सही नहीं है कि हर व्यक्ति को स्टोन मिलते ही ऑपरेशन कराना पड़ता है। बिना लक्षण वाले कई मरीजों में तत्काल सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। उपचार का फैसला चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद किया जाता है।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

दाईं ऊपरी तरफ पेट में लगातार या बहुत तेज पीड़ा हो, दर्द कई घंटों तक बना रहे, उल्टी रुक न रही हो या इसके साथ बुखार दिखाई दे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

त्वचा या आंखों का पीला पड़ना, पेशाब का असामान्य रूप से गहरा होना और तेज पेट दर्द जैसे संकेत विशेष रूप से गंभीर माने जाते हैं। ऐसे मामलों में देरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

पित्ताशय की पथरी कई लोगों में बिना किसी शिकायत के मौजूद रह सकती है, लेकिन जब इससे दर्द या अन्य लक्षण शुरू हों तो समस्या को केवल गैस या बदहजमी समझकर टालना सही नहीं है। समय पर अल्ट्रासाउंड और आवश्यक रक्त जांच से स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

लक्षण वाले मरीजों में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार किया जाता है और कई मामलों में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी प्रभावी विकल्प होती है। वहीं बिना लक्षण वाले स्टोन में डॉक्टर निगरानी की सलाह दे सकते हैं। संतुलित आहार, स्वस्थ वजन, नियमित गतिविधि और अचानक वजन घटाने से बचना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।

यह भी पढ़ें : रात को अच्छी और गहरी नींद पाने के 5 वैज्ञानिक और आसान उपाय

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। पेट में तेज़ दर्द, बुखार, उल्टी या पीलिया जैसे लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से तत्काल परामर्श लें।

गॉल ब्लैडर की पथरी से संबंधित मुख्य FAQs

Q1. गॉल ब्लैडर की पथरी का सबसे प्रमुख लक्षण क्या है?

उत्तर: पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में तेज या लगातार दर्द इसका प्रमुख लक्षण हो सकता है। दर्द कभी-कभी पीठ या कंधे तक भी पहुंच सकता है।

Q2. क्या गॉल ब्लैडर की पथरी गैस जैसी लग सकती है?

उत्तर: हां, कुछ मामलों में अपच, पेट फूलना और असहजता जैसी शिकायतें हो सकती हैं, इसलिए बार-बार होने वाले दर्द को केवल गैस मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Q3. गॉल ब्लैडर स्टोन की पुष्टि कैसे होती है?

उत्तर: पेट का अल्ट्रासाउंड इसकी पहचान के लिए सबसे उपयोगी शुरुआती जांचों में से एक है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच, CT या MRCP जैसी जांचें भी कराई जा सकती हैं।

Q4. क्या हर गॉल ब्लैडर स्टोन में ऑपरेशन जरूरी है?

उत्तर: नहीं। बिना लक्षण वाले कई मरीजों में तत्काल सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। बार-बार दर्द, संक्रमण या अन्य जटिलताओं की स्थिति में डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।

Q5. क्या दवा से पथरी पूरी तरह खत्म हो सकती है?

उत्तर: कुछ विशेष परिस्थितियों में छोटी कोलेस्ट्रॉल पथरी के लिए दवा उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसका असर सीमित हो सकता है और पथरी दोबारा बनने का खतरा रहता है।

Q6. गॉल ब्लैडर निकालने के बाद क्या सामान्य जीवन जी सकते हैं?

उत्तर: हां। गॉल ब्लैडर निकलने के बाद भी लिवर पित्त बनाता रहता है, जो सीधे छोटी आंत में पहुंचता है। बहुत से लोग सर्जरी के बाद सामान्य जीवन जीते हैं।

Q7. गॉल ब्लैडर स्टोन में कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

उत्तर: तेज या कई घंटों तक रहने वाला पेट दर्द, बुखार, लगातार उल्टी, आंखों या त्वचा का पीला होना और गहरे रंग का पेशाब जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहि

Share This Article
Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
BySA News
Follow:
Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.
Previous Article QS रैंकिंग 2027: IIT दिल्ली भारत में टॉप, 52 संस्थानों को जगह QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत की सबसे बड़ी छलांग
Next Article Backache and Shortness of Breath: पीठ दर्द और सांस फूलना हो सकता है जानलेवा Backache and Shortness of Breath: पीठ दर्द और सांस फूलना हो सकता है जानलेवा
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Popular Posts

Biomass Energy 2025: नवाचार, अवसर और चुनौतियाँ

Biomass Energy 2025: बायोमास ऊर्जा एक अक्षय ऊर्जा स्रोत है जो पौधों, जानवरों, कृषि अवशेषों…

By SA News

Smart Home Technology 2025: What Our Obsession for Smart Homes Says About Us

Smart Home Technology 2025: Smart homes promise comfort, control, and convenience. This article breaks down…

By SA News

7 Ways to Stay Safe from Monsoon Diseases: बरसाती मौसम में अपनाएं ये उपाय

पिछले कई सप्ताह से तड़के की धूप और भीषण गर्मी के बाद भारत में आखिर…

By SA News

You Might Also Like

COVID-19 के बाद नई बीमारियों पर रिसर्च: Long COVID, Disease X और भविष्य की महामारियों की तैयारी
Health

COVID-19 के बाद नई बीमारियों पर रिसर्च: Long COVID, Disease X और भविष्य की महामारियों की तैयारी

By SA News
The Vegan Revolution Path to Better Health, Planet and Ethical Living
Health

The Vegan Revolution: Path to Better Health, Planet and Ethical Living

By SA News
brain-rot
Health

‘ब्रेन रॉट’: डिजिटल दुनिया की एक नई बीमारी, कहीं आप भी तो फोन एडिक्शन के शिकार नहीं?

By SA News
विटामिन B12 की कमी: 57% कॉर्पोरेट पेशेवर प्रभावित, जानें बचाव के उपाय
Health

विटामिन B12 की कमी: 57% कॉर्पोरेट पेशेवर प्रभावित, जानें बचाव के उपाय

By SA News
SA NEWS LOGO SA NEWS LOGO
748KLike
340KFollow
13KPin
216KFollow
1.8MSubscribe
3KFollow

About US


Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.

Top Categories
  • Politics
  • Health
  • Tech
  • Business
  • World
Useful Links
  • About Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Copyright Notice
  • Contact Us
  • Official Website (Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj)

© SA News 2025 | All rights reserved.