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Home » सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने नालसार मामले पर बीसीआई को दिया बड़ा बयान, कहा “दखल की जरूरत नहीं”

Law & Order

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने नालसार मामले पर बीसीआई को दिया बड़ा बयान, कहा “दखल की जरूरत नहीं”

SA News
Last updated: August 15, 2026 11:35 am
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सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने नालसार मामले पर बीसीआई को दिया बड़ा बयान
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यह मामला हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसार) से संबंधित है। जहां बीसीआई ने लाॅ यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट पर रोक लगाई, फिर उसे वापिस ले लिया। यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को नालसार विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने से सामने आया। जिसमें विद्यार्थियों ने इसका विरोध किया। जिसके परिणामस्वरूप बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने इन सभी विद्यार्थियों के नामांकन पर रोक लगा दी गई जो उस विरोध में शामिल थें। 

Contents
  • नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु :- 
  • क्या था नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी का पूरा मामला 
  • छात्रों के प्राॅटेस्ट पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने की कार्रवाई 
  • सीजेआई ने बीसीआई को दिया कड़ा जवाब 
  • लाॅ विद्यार्थींयों के एनरोलमेंट पर रोक का फैसला बदला

नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु :- 

  • नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों का नामांकन बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा लगाई गई रोक पर यह मामला सामने आया। 
  • बीसीआई द्वारा विद्यार्थीयों के नामांकन पर रोक लगाने से सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने की एक्स पर पोस्ट। 
  • सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को लताड़ा, साथ ही शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट को छात्रों का अधिकार बताया।
  • बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों के नामांकन पर लगे रोक को किया प्रतिबंधित। 

क्या था नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी का पूरा मामला 

नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी का यह मामला छात्रों के द्वारा विश्वविद्यालय के दिक्षांत समारोह के दौरान शुरू हुआ था। जिसमें भारत के सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने के फैसले से नाराज़ छात्रों ने हड़ताल की। इस प्रोटेस्ट के बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने, गुरुवार को राज्य बार काउंसिलों को नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स का नामांकन रद्द करने का आदेश दिया। साथ ही मनन कुमार मिश्रा ने इस विरोध में शामिल छात्रों की जानकारी और विश्वविद्यालय से रिपोर्ट की मांग की थीं। 

छात्रों के प्राॅटेस्ट पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने की कार्रवाई 

बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के फैसले के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक्स पर पोस्ट किया, “अगर सभी लीगल काॅकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?” साथ ही अभिजीत दिपके ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की भी मांग की। जिसे सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने भी शेयर किया। 

इस पोस्ट पर मनन मिश्रा ने जवाबी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को कमेंट किया और कहा, “बार काउन्सिल ऑफ इंडिया का उद्देश्य भारत के युवाओं के हितों की रक्षा करना है , मैं अभिजीत दिपके और सौरव दास को संदेश देना चाहता हूं कि हमारे हित भी उनके हितों के जैसे ही हैं, यानी छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना।” साथ ही कहा कि “जरुरत होगी तो मैं सीजेपी के लीडर्स से बात करूंगा, बात करने से मैं नहीं कतराता “

सीजेआई ने बीसीआई को दिया कड़ा जवाब 

नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के द्वारा प्रोटेस्ट किया गया। जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि आमंत्रित करने पर विरोध हुआ। जिस पर कार्रवाई करते हुए बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने विरोध करने वाले छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगा दी थी। 

जिस पर नाराजगी जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने बीसीआई के इस मामले में दखल देने पर सवाल उठाए। साथ ही मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि “मैं भी छात्र था तो सक्रिय था।”

उन्होंने कहा, “मान लीजिए कि वो ग़लत है, फिर भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है। उन्हें कौन रोक सकता हैं ? जब तक वे कानून के दायरे में रहकर और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं , उनकी बात सुनी जानी चाहिए । बार काउन्सिल या किसी अन्य संस्था को इसमें दखल क्यों देना चाहिए।” 

लाॅ विद्यार्थींयों के एनरोलमेंट पर रोक का फैसला बदला

पिछले सप्ताह विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत का विरोध किया था जिसमें कुछ विद्यार्थींयों ने प्रशासन को ई-मेल भी की थी जिससे सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को आमंत्रित करने के फैसले पर पुनर्विचार की बात कही गई थी। इसमें विरोध करने वाले छात्र सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत द्वारा की गई टिप्पणी का प्रोटेस्ट कर रहे थे जिसमें जस्टिस सूर्यकांत ने सभी बेरोजगार युवाओं को काॅकरोच कहा था। इस बात से नाराज़ होने के कारण विद्यार्थीयों ने उनके मुख्य अतिथि के रूप में न लाने की याचिका पेश की थीं।

नालसार लाॅ यूनिवर्सिटी में कुछ विद्यार्थींयों ने विश्वविद्यालय के दिक्षांत समारोह में आमंत्रित भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के मुख्य अतिथी का विरोध किया था। जिसके प्रतिफल में बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने राज्य की बार काउन्सिल को आदेश दिया था कि “2026 में नालसार से ग्रेजुएट्स का अगले आदेश तक अधिवक्ता के तौर पर एनरोलमेंट न करें।” जिससे बैच 2026 के स्टूडेंट्स के नामांकन पर रोक लग गई। हालांकि बाद में इस रोक को मनन कुमार मिश्रा के द्वारा स्थगित कर दिया गया था।

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