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Home » जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs होंगे उच्च शिक्षा का हिस्सा: यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को जारी किए नए निर्देश

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जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs होंगे उच्च शिक्षा का हिस्सा: यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को जारी किए नए निर्देश

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Last updated: July 12, 2026 11:42 am
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SWAYAM MOOCs
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उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग को नई दिशा देने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि जुलाई 2026 सेमेस्टर से भारत सरकार के राष्ट्रीय ऑनलाइन शिक्षा मंच SWAYAM (Study Webs of Active Learning for Young Aspiring Minds) पर उपलब्ध MOOCs (Massive Open Online Courses) को नियमित शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों को लागू करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

Contents
  • जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs होंगे उच्च शिक्षा का हिस्सा मुख्य बिंदु 
  • यूजीसी का नया निर्देश क्या है? 
  • SWAYAM क्या है?
  • MOOCs क्या हैं?
  • 40 प्रतिशत तक ऑनलाइन क्रेडिट अर्जित करने की सुविधा
  • ABC में जुड़ेंगे ऑनलाइन कोर्स के क्रेडिट
  • विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की ज़िम्मेदारियां 
    • कैंपस में परीक्षा आयोजित करने की सुविधा
  • विद्यार्थियों को क्या होंगे लाभ?
  • क्या प्लेसमेंट में मिलेगा फायदा?
  • एनईपी 2020 के लक्ष्यों को मिलेगा ज़ोर 
    • कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियां
  • डिजिटल उच्च शिक्षा की ओर एक बड़ा कदम
  • जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs होंगे उच्च शिक्षा का हिस्सा से संबंधित भीमुख्य FAQs

यूजीसी का मानना है कि ऑनलाइन शिक्षा को मुख्यधारा की पढ़ाई से जोड़ने से विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों और विशेषज्ञ शिक्षकों से सीखने का अवसर मिलेगा। साथ ही, इससे शिक्षा अधिक लचीली, सुलभ, किफायती और कौशल-आधारित बनेगी।

यूजीसी ने जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs होंगे उच्च शिक्षा का हिस्सा मुख्य बिंदु 

  • यूजीसी ने जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
  • छात्र यूजीसी क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत 40% तक अकादमिक क्रेडिट ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से अर्जित कर सकेंगे।
  • अर्जित क्रेडिट Academic Bank of Credits (ABC) में जमा होंगे और डिग्री में शामिल किए जाएंगे।
  • संस्थानों को छात्रों का समय पर पंजीकरण, कोर्स चयन, काउंसलिंग और क्रेडिट ट्रांसफर सुनिश्चित करना होगा।
  • कई संस्थानों को SWAYAM की एंड-टर्म परीक्षा अपने ही कैंपस में आयोजित करने की सुविधा मिलेगी।
  • यह पहल NEP 2020 के तहत डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, बहुविषयक शिक्षा और रोजगार क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यूजीसी का नया निर्देश क्या है? 

यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (Higher Education Institutions) को निर्देश दिया है कि वे जुलाई 2026 सेमेस्टर के लिए SWAYAM पर उपलब्ध उपयुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की पहचान करें और उन्हें अपने डिग्री एवं डिप्लोमा कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम में शामिल करें। इसके लिए संस्थानों को अपने बोर्ड ऑफ स्टडीज़ (BoS) की बैठक आयोजित कर पाठ्यक्रमों को मंजूरी देनी होगी तथा उन्हें आधिकारिक सिलेबस का हिस्सा बनाना होगा।

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आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की ज़िम्मेदारी होगी कि वे पात्र छात्रों का निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित SWAYAM पाठ्यक्रमों में पंजीकरण सुनिश्चित करें। संस्थानों को छात्रों को सही पाठ्यक्रम चुनने में मार्गदर्शन देना होगा और आवश्यक शैक्षणिक सहायता भी उपलब्ध करानी होगी।

SWAYAM क्या है?

SWAYAM भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का राष्ट्रीय ऑनलाइन शिक्षण मंच है, जहां विभिन्न विषयों में हज़ारों ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इन पाठ्यक्रमों का संचालन और विकास यूजीसी, एआईसीटीई, सीईसी, इग्नू, एनपीटीईएल (आईआईटी मद्रास), आईआईएम बेंगलुरु, एनआईटीटीटीआर तथा राष्ट्रीय महत्व के अन्य संस्थानों द्वारा किया जाता है।

इन पाठ्यक्रमों में वीडियो लेक्चर, डिजिटल अध्ययन सामग्री, क्विज, असाइनमेंट, चर्चा मंच (Discussion Forum) और ऑनलाइन मूल्यांकन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। कई पाठ्यक्रमों का अध्ययन नि:शुल्क किया जा सकता है, जबकि प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें : असम सरकार का बड़ा फैसला, एक से अधिक शादी करने वालों पर कल्याणकारी योजनाओं को लेकर सख्ती!

MOOCs क्या हैं?

MOOCs यानी Massive Open Online Courses ऐसे ऑनलाइन पाठ्यक्रम होते हैं जिनमें देशभर के विद्यार्थी कहीं से भी दाखिला लेकर अध्ययन कर सकते हैं। इनका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को भौगोलिक सीमाओं से मुक्त बनाना है ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्र भी श्रेष्ठ शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त कर सकें।

40 प्रतिशत तक ऑनलाइन क्रेडिट अर्जित करने की सुविधा

यूजीसी ने दोबारा स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन शिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए लागू क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत उच्च शिक्षा संस्थान अपने छात्रों को SWAYAM पर उपलब्ध स्वीकृत ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से एक सेमेस्टर में निर्धारित क्रेडिट का अधिकतम 40 प्रतिशत तक अर्जित करने की अनुमति दे सकते हैं।

उदाहरण के लिए यदि कोई छात्र चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में 160 कुल क्रेडिट पूरा करता है, तो वह निर्धारित नियमों के अनुसार 64 क्रेडिट तक SWAYAM के माध्यम से अर्जित कर सकता है। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और करियर के अनुसार अतिरिक्त विषयों का अध्ययन करने की स्वतंत्रता मिलेगी।

ABC में जुड़ेंगे ऑनलाइन कोर्स के क्रेडिट

यूजीसी ने निर्देश दिया है कि SWAYAM से प्राप्त क्रेडिट विद्यार्थियों के Academic Bank of Credits (ABC) में जमा किए जाएं। विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन क्रेडिट को छात्र की डिग्री में जोड़ा जाए तथा अंतिम ट्रांसक्रिप्ट में भी दर्शाया जाए। इससे विभिन्न संस्थानों के बीच क्रेडिट ट्रांसफर की प्रक्रिया अधिक आसान और पारदर्शी बनेगी।

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की ज़िम्मेदारियां 

यूजीसी ने कुलपतियों और कॉलेज प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे जुलाई 2026 से पहले अपने संस्थान की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर SWAYAM पाठ्यक्रमों की जानकारी प्रकाशित करें। विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम और काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं ताकि वे अपनी पढ़ाई और करियर के अनुरूप सही ऑनलाइन कोर्स का चयन कर सकें।

इसके अलावा संस्थानों को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने की भी सलाह दी गई है, जो पंजीकरण, परीक्षा, क्रेडिट ट्रांसफर और प्रशासनिक समन्वय जैसी प्रक्रियाओं का संचालन करेंगे।

कैंपस में परीक्षा आयोजित करने की सुविधा

यूजीसी ने कहा है कि जिन संस्थानों को अनुमति प्राप्त है, वे SWAYAM पाठ्यक्रमों की एंड-टर्म परीक्षाएं अपने ही परिसर में आयोजित करा सकते हैं। इससे छात्रों को दूर स्थित परीक्षा केंद्रों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी और परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनेगी। साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था भी सरल होगी और अधिक छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।

विद्यार्थियों को क्या होंगे लाभ?

इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT, IIM, NIT, IGNOU और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ शिक्षकों से सीखने का अवसर मिलेगा। छात्र अपनी नियमित पढ़ाई के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, डिजिटल मार्केटिंग, प्रोग्रामिंग, डेटा एनालिटिक्स, मैनेजमेंट, कम्युनिकेशन और अन्य आधुनिक कौशल आधारित विषयों का अध्ययन भी कर सकेंगे।

ऑनलाइन अध्ययन की सुविधा के कारण विद्यार्थी अपनी सुविधा और समय के अनुसार पढ़ाई कर पाएंगे। इससे सीखने में लचीलापन बढ़ेगा और रोज़गार के लिए आवश्यक अतिरिक्त कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। बहुविषयक (Interdisciplinary) पाठ्यक्रमों का चयन करके विद्यार्थी अपने ज्ञान का दायरा भी बढ़ा सकेंगे।

क्या प्लेसमेंट में मिलेगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योगों को ऐसे उम्मीदवारों की आवश्यकता है जिनके पास अतिरिक्त कौशल भी हों। SWAYAM के माध्यम से किए गए कौशल-आधारित पाठ्यक्रम विद्यार्थियों की प्रोफाइल को मजबूत बना सकते हैं और उच्च शिक्षा तथा रोज़गार के अवसरों में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। हालांकि अंतिम चयन छात्र की समग्र योग्यता, प्रदर्शन, संस्थान की गुणवत्ता और नियोक्ता की आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।

एनईपी 2020 के लक्ष्यों को मिलेगा ज़ोर 

SWAYAM MOOCs को नियमित पाठ्यक्रम में शामिल करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाला कदम है। इससे बहुविषयक शिक्षा, शैक्षणिक लचीलापन, कौशल-आधारित शिक्षा, डिजिटल तकनीक का उपयोग, स्व-गति से सीखने की संस्कृति तथा शैक्षणिक गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।

यह भी पढ़ें : शेयर मार्केट में बनी हलचल, संसेक्स और नेफ्टी के अंकों में मिली भारी उछाल

यूजीसी का उद्देश्य ऑनलाइन शिक्षा को केवल पूरक विकल्प तक सीमित न रखकर उच्च शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियां

हालांकि यह पहल उच्च शिक्षा में बड़ा परिवर्तन ला सकती है, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कई चुनौतियों का समाधान आवश्यक होगा। विश्वविद्यालयों को ऐसे SWAYAM पाठ्यक्रम चुनने होंगे जो उनके मौजूदा सिलेबस के पूरक हों और दोहराव न करें। फैकल्टी को छात्रों का मार्गदर्शन करना होगा तथा उनकी शैक्षणिक प्रगति की निगरानी भी करनी होगी।

इसके साथ ही समय पर पंजीकरण, परीक्षा प्रबंधन, क्रेडिट मैपिंग, रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी डिजिटल चुनौतियों का समाधान भी इस पहल की सफलता के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

डिजिटल उच्च शिक्षा की ओर एक बड़ा कदम

पिछले कुछ वर्षों में भारत में ऑनलाइन शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। यूजीसी का यह निर्णय डिजिटल शिक्षा को केवल विकल्प के रूप में नहीं बल्कि मुख्यधारा की उच्च शिक्षा का स्थायी हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे विश्वविद्यालयों में मिश्रित शिक्षण (Blended Learning) मॉडल को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें पारंपरिक कक्षा शिक्षण और डिजिटल शिक्षा दोनों का समन्वय होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने, युवाओं को 21वीं सदी के कौशल से लैस करने और उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, लचीला तथा रोजगारोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जुलाई 2026 से SWAYAM MOOCs होंगे उच्च शिक्षा का हिस्सा से संबंधित भीमुख्य FAQs

Q1. SWAYAM क्या है?

उत्तर: SWAYAM भारत सरकार का राष्ट्रीय ऑनलाइन शिक्षण मंच है, जहां UGC, AICTE, NPTEL, IGNOU, IIM और अन्य संस्थानों द्वारा विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं।

Q2. MOOCs का क्या मतलब है?

उत्तर: MOOCs (Massive Open Online Courses) ऐसे ऑनलाइन पाठ्यक्रम हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र कहीं से भी दाखिला लेकर अध्ययन कर सकते हैं।

Q3. यूजीसी का नया निर्देश कब से लागू होगा?

उत्तर: यह व्यवस्था जुलाई 2026 सेमेस्टर से लागू करने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश जारी किए गए हैं।

Q4. छात्र कितने प्रतिशत तक ऑनलाइन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगे?

उत्तर: यूजीसी के क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुसार छात्र निर्धारित नियमों के तहत 40% तक क्रेडिट SWAYAM के ऑनलाइन कोर्स से अर्जित कर सकते हैं।

Q5. SWAYAM से प्राप्त क्रेडिट का क्या होगा?

उत्तर: ये क्रेडिट Academic Bank of Credits (ABC) में जमा किए जाएंगे और पात्र होने पर विश्वविद्यालय द्वारा डिग्री एवं ट्रांसक्रिप्ट में जोड़े जाएंगे।

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