शेयर मार्केट में लगातार सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़ोत्तरी के साथ शेयर बाजारों में काफ़ी उतार-चढ़ाव देखा गया। जहां सेंसेक्स में 1.08% और निफ्टी में 1.02% की बढ़त देखने को मिलीं। वहीं सेंसेक्स और निफ्टी इंडेक्स में बदलाव की वजह से शेयरों में 2,756 की बढ़ोत्तरी और 1,316 गिरावट देखी गई। वहीं सेंसेक्स की 30 कम्पनियों में से आईटी, इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और देश की सबसे बड़ी टीसीएस ने मुनाफा कमाया और देश को शिखर तक पहुंचाया। कच्चे तेल और यूएस डॉलर में काफ़ी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं आरबीआई ने उठाए सख्त कदम।
शेयर मार्केट में सेंसेक्स और निफ्टी से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु:-
. शेयर मार्केट में सेंसेक्स में करीब 1.08% और निफ्टी में 1.02% की बढ़त देखी गई।
. इस बढ़ते हुए सेंसेक्स और निफ्टी के कारण एनएसई में 2,756 शेयरों में तेजी वहीं 1,316 शेयरों में कमी देखने को मिलीं।
. टाॅप गेनर्स में शामिल शेयरों में आईटी, इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और देश की सबसे बड़ी टीसीएस ने शेयर बाजारों को ऊंचाई तक पहुंचाया है।
. ट्रेडिंग शेयरों में कच्चे तेल का हाल बेहाल हो गया वहीं दूसरी ओर यूएस डॉलर के उतार-चढ़ाव देखने को मिले।
. आरबीआई ने इस ट्रेंड के चलते बैंको और रेगुलेटेड एंटिटीज के साथ वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की बिक्री से संबंधित नियमों को सख्त कर दिया है।
सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त कितनी हुईं
शेयर मार्केट में लगातार बढ़ रही सेंसेक्स और निफ्टी ने सबको चौंकाया हैं। आज़ फिर शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़ोत्तरी देखने को मिलीं हैं। जहां दोनों इंडेक्स सेंसेक्स (बेस सेंसेक्स) और निफ्टी (एनएससी निफ़्टी) में तेजी आईं हैं। निफ़्टी यानी एनएससी निफ़्टी 244.10 अंक अर्थात 1.02% की तेजी के साथ जहां 24,206.90 पर बंद हुआ। वहीं बीएफई सेंसेक्स में इससे ज्यादा उझाल देखने को मिलीं, सेंसेक्स 827.57 अंक या 1.08% बढ़त के साथ 77,569.39 पर बंद हुआ।
क्या ये बदल देगा रूझान बाजारों का
शेयर बाजारों में बढ़ते सेंसेक्स और निफ्टी ने सब को हिला कर रख दिया है। एनएसई में करीब 2,756 शेयरों में तेजी और 1,316 शेयरों में गिरावट देखी गई। यही हाल एशियाई बाजारों का हो रखा है। इन एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का काॅप्सी चार प्रतिशत से अधिक बढ़ा। जापान का निक्केई 225 मानक 1.20% से 1.55%, चीन कि एससी कंपोजिट 13% से 14 प्रतिशत और वहीं हांगकांग का हैंगसेंग 0.60% से 1.86 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ व्यवसाय कर रहे थे।
इस सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़ोत्तरी के साथ अमेरिकी मार्केट बंद हो गए। अन्तर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का सूचकांक 76.55 डाॅलर प्रति बरैल रहा था। शेयर बाजारों के आंकड़ों को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) गुरुवार को अधिक बिक्री कर रहा था और उनके द्वारा 532.86 करोड़ रूपए के शेयर बेच दिए हैं।
जानें टाॅप गेनर्स में शामिल शेयर
इस सेंसेक्स और निफ्टी की मदद से कुछ शेयरों का मानक बढ़ता हुआ दिखाई दिया। टाॅप गेनर्स में शामिल शेयरों में आईटी, इंफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बाजारों को शिखर तक पहुंचने में मदद की हैं।
वहीं सेंसेक्स में रही 30 कम्पनियों में से भी एचसीएल टेक , टेक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एशियन पेंट्स के शेयर अधिक मुनाफे में रहें। देश की सबसे बड़ी शेयर टीसीएस का शेयर दो प्रतिशत तक बढ़ गए। वहीं भारतीय एयरटेल और सन फार्मा के शेयरों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा।
ट्रैडिंग शेयरों से हुआ हाल बेहाल
सेंसेक्स और निफ्टी में इस तरह मानक बढ़ने से कच्चा तेल और यूएस डॉलर का सुचकांक और अधिक बढ़ते रहें। हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी में इह तरह के उझाल और गिरावट से यूएस डॉलर की मजबूरी और कमजोरी का मानक देखा जाएगा।
कच्चे तेल से संबंधित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड फ्यूचर्स 0.29% से गिरकर 76.08 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा है। वहीं अगस्त डिलिवरी वाले ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 75.50 से 76.00 डाॅलर के बीच ट्रेंड कर रहे हैं जिसमें पिछली क्लाॅजिंग के मुकाबले लगभग 0.44% से 2.2% तक गिरावट देखी गई। काॅमेक्स पर कच्चे तेल की कीमतों में 0.70% से 0.80% गिरावट के साथ 71.85 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहे हैं।
दूसरी इस उतार-चढ़ाव के साथ प्रमुख मुद्राओं के साथ यूएस डॉलर की मजबूती और कमजोरी में भारी बदलाव आया है। यूएस डॉलर इंडेक्स (डिएक्सवाई) जो डॉलर की वैल्यू छह विदेशी मुद्राओं के बास्केट के मुकाबले मापता है। वहीं 0.10% गिरकर 100.95 के स्तर पर ट्रेंड कर रहा है।
आरबीआई पर असर
वहीं दूसरी ओर इस ट्रेंड को चलते आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) ने बैंकों और रेगुलेटेड एंटिटीज के साथ वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की बिक्री से संबंधित जुड़े नियम भी सख्त कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य लेंडर्स द्वारा फाइनेंशियल प्रोडक्ट की सही बिक्री को बढ़ाना और गलत मार्केटिंग पर रोक लगाना, कस्टमर की स्वीकृति, प्रकटीकरण और प्रकट बिक्री के मानकों का सख्ती से कड़ा करना है।

