बीते कुछ दिनों की खबरों पर नजर डालें तो रूह कांप उठती है। उत्तर प्रदेश के कासगंज में एक ही परिवार के सदस्यों की मौत हो, गाज़ियाबाद में तीन नाबालिग बहनों का दुनिया छोड़ जाना हो, या रायपुर में नीट (NEET) की तैयारी कर रहे छात्र द्वारा जीआई वायर के सहारे छत से कूदकर जान देना—इन सबने समाज को झकझोर दिया है। ये महज खबरें नहीं, बल्कि समाज की नाकामयाबी के सबूत हैं। आखिर वो क्या वजह है जो इंसान को अपनी सबसे कीमती चीज यानी ‘सांसों’ को खुद ही खत्म करने पर मजबूर कर देती है?
आत्महत्या के प्रमुख कारण: एक कड़वा विश्लेषण
पारिवारिक कलह और मानसिक प्रताड़ना:
जालंधर की घटना इसका बड़ा उदाहरण है, जहाँ शादी के 10 साल बाद एक महिला ने घरेलू विवाद से तंग आकर फंदा लगा लिया। रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट और आपसी समझ की कमी आज जानलेवा साबित हो रही है।
करियर और पढ़ाई का अंतहीन बोझ:
रायपुर के छात्र और कोटा जैसे शहरों के उदाहरण बताते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को निगल रहा है। नीट और जेईई जैसे एग्जाम्स अब ‘ज्ञान’ की नहीं, बल्कि ‘जान’ की परीक्षा बन गए हैं।
गेम की लत, मौत की वजह
जानकारी के मुताबिक, गाज़ियाबाद में तीन बहनों ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उन्हें मोबाइल में गेम खेलने की लत थी। आर्थिक तंगी की वज़ह से मोबाइल बेचने के बाद तीनों बेटियों ने आत्महत्या कर ली जो समाज को दहला देने वाली घटना है।
आर्थिक तंगी और कर्ज़ से परेशानियां:
कासगंज की घटना ने पुलिस और समाज को उलझा दिया है। अक्सर आर्थिक तंगी या किसी गहरे सदमे के कारण पूरा परिवार सामूहिक रूप से मौत का रास्ता चुन लेता है।
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कॉर्पोरेट की चक्की में पिसता ‘जॉब प्रेशर’
पढ़ाई और घर के अलावा, आज ‘जॉब प्रेशर’ आत्महत्या का एक साइलेंट किलर बनकर उभरा है। डेडलाइन का डर, बॉस की फटकार और नौकरी खोने की चिंता आज के प्रोफेशनल को डिप्रेशन की ओर धकेल रही है। इंसान मशीन बनकर रह गया है, जहाँ उसके इमोशन्स की कोई जगह नहीं है।
समाज की चुप्पी और बढ़ता मानसिक अकेलापन
जब कोई व्यक्ति सुसाइड करता है, तो वो एक दिन में यह फैसला नहीं लेता। वो लंबे समय तक अपने अंदर एक युद्ध लड़ता है। गाज़ियाबाद की उन तीन बहनों या रायपुर की उस छात्रा के मन में क्या चल रहा होगा, यह कोई नहीं समझ पाया। हमारे समाज में ‘मानसिक स्वास्थ्य’ पर बात करना आज भी वर्जित है, जो सबसे घातक है।
तत्वज्ञान: अंधेरे से उजाले की ओर एकमात्र रास्ता
इन तमाम समस्याओं का अंत केवल ‘हॉस्पिटल’ या ‘पुलिस’ के पास नहीं है, बल्कि ‘सही दृष्टिकोण’ में है। जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज अपने तत्वज्ञान के जरिए समाज को यही समझा रहे हैं कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल रुपया कमाना या डिग्री हासिल करना नहीं है।
संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि जीवन में आने वाले सुख-दुख हमारे संचित कर्मों का फल हैं, जिन्हें केवल ‘सत्य भक्ति’ से ही बदला या सहा जा सकता है। उनके शरण में आए लाखों लोगों ने यह स्वीकार किया है कि जब उन्हें यह पता चला कि “परमात्मा कबीर साहेब” हर दुख को काटने में समर्थ हैं, तो उनके मन से आत्महत्या के विचार हमेशा के लिए खत्म हो गए। जब मनुष्य को यह ज्ञान होता है कि यह जीवन मोक्ष प्राप्ति का एक सुनहरा अवसर है, तो वो किसी भी सांसारिक विफलता के कारण इसे व्यर्थ नहीं गंवाता। अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन अवश्य सुनें और Saint Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें।

