नई दिल्ली: अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे सैकड़ों भारतीय प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है। हाल ही में, अमेरिका ने 487 भारतीय नागरिकों के निष्कासन (डिपोर्टेशन) का अंतिम आदेश जारी किया है। इससे पहले, बुधवार को 104 भारतीयों को एक अमेरिकी सैन्य विमान के जरिए अमृतसर एयरपोर्ट पर भेजा गया था। इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अपडेट देते हुए बताया कि अमेरिका ने 298 और भारतीयों की सूची सौंपी है, जिनकी नागरिकता की पुष्टि की जा रही है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
विदेश सचिव विवेक मिस्री ने कहा कि सरकार इस मामले पर लगातार अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क में है और यह सुनिश्चित कर रही है कि किसी भी निर्वासित भारतीय के साथ अमानवीय व्यवहार न हो। उन्होंने कहा, “हमने अमेरिकी अधिकारियों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहे हैं। निर्वासित लोगों के साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार को सहन नहीं किया जाएगा।”
अवैध प्रवास की प्रक्रिया और इसके पीछे के कारण
विवेक मिस्री ने बताया कि अमेरिका से वापस आने वाले लोगों की कई श्रेणियां होती हैं। कुछ लोग कानूनी प्रक्रियाओं के कारण वापस आ जाते हैं, जबकि कुछ को वहां की सरकार निष्कासित कर देती है। यह अंतर न्यायिक प्रक्रिया और वहां के कानूनों के अनुसार होता है।
भारत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वापस आने वाले सभी लोग वास्तव में भारतीय नागरिक हैं। विवेक मिस्री ने कहा, “दुनिया का कोई भी देश अपने नागरिकों को वापस लेने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि वे वास्तव में उसके नागरिक हैं। इससे संबंधित सुरक्षा और वैधता के मुद्दे होते हैं, जिन पर हम अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार चर्चा कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरत रही है और अमेरिकी अधिकारियों से हर जानकारी मांग रही है। “हमें हाल ही में 298 और अवैध प्रवासियों की सूची मिली है, जिनकी पहचान की जा रही है। यह एक संवेदनशील मामला है और हम इसमें पूरी सतर्कता बरत रहे हैं।”
अवैध प्रवास को बढ़ावा देने वाले गिरोहों पर कार्रवाई की जरूरत
विदेश सचिव ने इस मुद्दे के मूल कारणों पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवास को बढ़ावा देने वाले मानव तस्करी गिरोह निर्दोष लोगों को धोखा देकर बड़ी रकम वसूलते हैं और उन्हें गलत रास्तों से विदेश भेजते हैं। हालांकि, वहां जाने के बाद उन्हें अवैध तरीके से रहने के कारण गिरफ्तार कर लिया जाता है और फिर उन्हें इसी तरह वापस लौटना पड़ता है।
उन्होंने कहा, “सरकार को इन मानव तस्करी गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। विदेश जाने के इच्छुक लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है ताकि वे ऐसे जाल में न फंसें।”
संसद में उठ रहा है निर्वासितों के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा
इस मामले को लेकर संसद में भी चर्चा हो रही है। विपक्षी दलों ने निर्वासितों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया है। कई सांसदों ने मांग की है कि सरकार इस पर अमेरिका से कड़ा विरोध दर्ज कराए।
विवेक मिस्री ने कहा कि यह सांसदों द्वारा उठाया गया एक उचित मुद्दा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत सरकार अमेरिकी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार बात कर रही है कि निर्वासितों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए। “अगर हमें किसी भी तरह के दुर्व्यवहार की जानकारी मिलती है, तो हम इसे तुरंत अमेरिकी अधिकारियों के सामने उठाते हैं।”
क्या आगे और उड़ानें आएंगी?
इस सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह इस पर निर्भर करता है कि अमेरिका द्वारा वापस भेजे जाने वाले कितने लोगों की भारतीय नागरिक के रूप में पुष्टि होती है। विवेक मिस्री ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं कि प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन न हो।”
सरकार की रणनीति और आगे की कार्रवाई
भारत सरकार इस पूरे मामले पर करीबी नजर रख रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि अवैध प्रवास के मामलों को रोका जाए। इसके लिए प्रवासियों को कानूनी रूप से विदेश जाने के सही तरीके बताए जा रहे हैं, ताकि वे धोखाधड़ी का शिकार न हों।
विवेक मिस्री ने कहा, “यह मुद्दा सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि कई देशों में ऐसे मामले सामने आते हैं। इसलिए सरकार इस पर व्यापक नीति तैयार कर रही है, ताकि अवैध प्रवास को रोका जा सके और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा 487 भारतीय प्रवासियों को निष्कासित करने का मामला संवेदनशील बना हुआ है। भारत सरकार इस पर पूरी निगरानी रख रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि निर्वासित नागरिकों के साथ कोई अन्याय न हो। इसके साथ ही, अवैध प्रवास को रोकने और मानव तस्करी गिरोहों पर कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है। विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार ने प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वह इस विषय पर पूरी सतर्कता बरतेगी।
सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसे मामलों में कमी आए और भारतीय नागरिक कानूनी रूप से सुरक्षित तरीके से विदेश जा सकें।
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