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Finance

बजट 2025: क्या सस्ता, क्या महंगा, आम जनता को कितनी राहत?

SA News
Last updated: February 10, 2025 3:31 pm
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बजट 2025 क्या सस्ता क्या महंगा आम जनता को कितनी राहत
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शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट 2025 पेश किया। इस बजट में मध्य वर्ग को बड़ी राहत दी गई है, साथ ही किसान, महिलाएं, युवा और वरिष्ठ नागरिकों को भी राहत देने की कोशिश की गई है। आइए जानते हैं इस बजट में क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और किसे सबसे अधिक लाभ मिला।

Contents
  • क्या-क्या हुआ सस्ता?
      • क्या-क्या हुआ महंगा?
  • बजट 2025 में किसे मिला सर्वाधिक लाभ?
      • स्वास्थ्य सेवाएं
      • शिक्षा क्षेत्र
  • निष्कर्ष

क्या-क्या हुआ सस्ता?

1. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: एलसीडी और एलईडी डिस्प्ले पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है, जिससे फोन, लैपटॉप और टैबलेट सस्ते होंगे। लीथियम बैटरी पर भी छुट दी गई है, जिससे इलेक्ट्रिक कार, बाइक और मोबाइल फोन की कीमत कम होगी।

2. पीसीबीए पार्ट्स और अन्य उपकरण: बजट में पीसीबीए पार्ट्स, कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर, वायर्ड हेडसेट के रॉ मैटेरियल, माइक्रोफोन और रिसीवर, यूएसबी केबल, फिंगरप्रिंट रीडर और मोबाइल फोन सेंसर की कस्टम ड्यूटी को खत्म कर दिया गया है।

3. बीमा क्षेत्र: बीमा क्षेत्र में 100% निवेश की छुट दी गई है, जिससे बीमा प्रीमियम सस्ता हो सकता है।

4. कपड़ा और चमड़ा उत्पाद: बजट 2025 के आधार पर कपड़ा और चमड़ा उत्पाद की कीमतों में गिरावट आएगी।

क्या-क्या हुआ महंगा?

1. इंटरैक्टिव डिस्प्ले पैनल: इंटरैक्टिव डिस्प्ले पैनल (कम्पलीट बिल्ड) पर इम्पोर्ट ड्यूटी 10% से बढ़ाकर 20% कर दी गई है, जिससे प्रीमियम स्मार्ट डिस्प्ले महंगे होंगे।

बजट 2025 में किसे मिला सर्वाधिक लाभ?

1. किसान:

  • किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे 7.7 करोड़ किसानों को फायदा होगा।
  • खाद उत्पादन बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर में नया कारखाना खोला जाएगा।
  • दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई योजना बनाई गई है, जिससे तुअर, उड़द और मसूर दाल का उत्पादन बढ़ेगा।
  • बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित किया जाएगा और 1.7 करोड़ किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के तहत 100 जिलों को शामिल किया जाएगा।
  • फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।

2. महिलाएं और बच्चे:

  • सक्षम आंगनवाड़ी पोषण 2.0 योजना लॉन्च की गई है, जिससे 8 करोड़ बच्चों को लाभ मिलेगा। 1 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को मदद मिलेगी और लड़कियों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

■ Also Read: Indian Union Budget 2025-26: A Roadmap to ‘Viksit Bharat’

3. वरिष्ठ नागरिक:

  • ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है।

4. गिग वर्कर्स:

  • गिग वर्कर्स को श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराने पर पहचान पत्र मिलेगा और PM जन आरोग्य बीमा योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा।
  • उड़ान योजना और पर्यटन विकास योजना के जरिए रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

5. युवा और स्टार्टअप्स:

  • युवाओं को पोस्ट मित्र की सहायता से रोजगार से जोड़ा जाएगा। स्टार्टअप के लिए लोन सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दी गई है।

स्वास्थ्य सेवाएं

इस बजट ने स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए कई प्रावधान किए हैं। हर जिला अस्पताल में कैंसर डे-केयर सेंटर बनाया जाएगा। साथ ही 36 कैंसर और जीवनरक्षक दवाएं मुफ्त की गई हैं। 6 जरूरी दवाओं पर ड्यूटी घटाकर 5% कर दी गई है।

शिक्षा क्षेत्र

  • 50,000 अटल टिंकर लैब स्थापित की जाएगी।
  • 23 IITs में भी सीट बढ़ाई जाएगी और 5 IITs को विशेष फंडिंग दी जाएगी।
  • AI की शिक्षा के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • मेडिकल की पढ़ाई के लिए 10,000 सीटें बढ़ाई जाएंगी, जिसे पांच साल में 75,000 तक किया जाएगा।

निष्कर्ष

बजट 2025 ने कई क्षेत्रों में राहत और सुधार लाने की कोशिश की है। इस बजट में मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बीमा क्षेत्र, कपड़ा और चमड़ा उत्पाद को सस्ता किया गया है, जबकि इंटरैक्टिव डिस्प्ले पैनल महंगे हो गए हैं। किसानों, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, गिग वर्कर्स, युवा और स्टार्टअप्स को विशेष लाभ देने की कोशिश की गई है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार और निवेश का प्रावधान किया गया है।

इस बजट ने आम जनता को राहत देने और विभिन्न क्षेत्रों में सुधार करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह बजट किस प्रकार से आम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है और देश के आर्थिक विकास में कितना योगदान करता है।

संत रामपाल जी महाराज के अनुसार, धन का सही उपयोग और उसकी सीमाओं को समझना महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि धन की अधिकता से मोक्ष नहीं प्राप्त होता और न ही आध्यात्मिक शांति मिलती है। वे कहते हैं कि हमें अपने जीवन में धन का उपयोग अच्छे कार्यों में करना चाहिए, जैसे कि गरीबों की सहायता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश, और धर्म के मार्ग पर चलना।

संत रामपाल जी के अनुसार, हमें धन की लालसा और भौतिक सुखों से ऊपर उठकर सत्य मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिससे हमें वास्तविक शांति और मोक्ष की प्राप्ति हो सके। उनका यह भी कहना है कि सत्य नाम का जप और सतगुरु की शिक्षाओं का पालन करके ही हम अपने जीवन को सच्ची दिशा दे सकते हैं।

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GST पूरे UPI भुगतान की राशि पर नहीं लगेगा, बल्कि जहां MDR लागू होगा, वहां केवल MDR शुल्क पर 18% GST लगेगा। 5. GST-पंजीकृत पात्र व्यापारी MDR पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं, जिससे उनकी GST देनदारी में इसका समायोजन किया जा सकता है। 6. Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर MDR लागू नहीं होगा, इसलिए ऐसे व्यक्तिगत UPI ट्रांसफर पहले की तरह शुल्क मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के UPI भुगतान में नहीं लगेगा MDR नए नियम के अनुसार ₹2,000 तक के P2M UPI भुगतान पर MDR शून्य रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि इस सीमा तक होने वाले मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा और इसलिए MDR से जुड़ा GST भी नहीं बनेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार UPI के मर्चेंट लेनदेन की मात्रा में 96 प्रतिशत से अधिक भुगतान ₹2,000 तक के हैं। इसलिए बड़ी संख्या में रोज़मर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे। ₹1 लाख तक UPI प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी भी दायरे से बाहर NPCI ने छोटे व्यापारियों के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था भी बताई है। UPI QR के जरिए अपने बैंक खाते में हर महीने ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों पर MDR नहीं लगेगा। खास बात यह है कि ऐसे व्यापारी किसी एक लेनदेन में ₹2,000 से अधिक प्राप्त करें, तब भी निर्धारित शर्तों के अंतर्गत उन्हें MDR से छूट मिलेगी। इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडर्स को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाना है। GST पूरे UPI भुगतान पर नहीं, सिर्फ MDR पर लगेगा MDR को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान की पूरी रकम पर 18 प्रतिशत GST लगेगा। NPCI के स्पष्टीकरण के अनुसार ऐसा नहीं है। GST UPI से भेजी गई पूरी रकम पर नहीं, बल्कि लागू होने वाले MDR यानी भुगतान सेवा शुल्क पर लगेगा। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 के पात्र मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR के हिसाब से शुल्क ₹40 होगा। 18 प्रतिशत GST इसी ₹40 के सेवा शुल्क पर लगेगा, न कि पूरे ₹10,000 पर। ₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR 15 अक्टूबर से निर्धारित पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। इसका मतलब है कि बड़े भुगतान में भी MDR अनिश्चित रूप से नहीं बढ़ेगा। कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग रियायती व्यवस्था रखी गई है, जिसमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। GST-पंजीकृत व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ NPCI की सफाई में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। जो व्यापारी GST के तहत पंजीकृत हैं और पात्रता पूरी करते हैं, वे MDR पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। इसे उनकी बिक्री पर बनने वाली आउटपुट GST देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है। हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट का वास्तविक लाभ व्यापारी की GST स्थिति और उसके कारोबार की प्रकृति पर निर्भर करेगा। इसलिए हर व्यापारी के लिए इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा। आम ग्राहक से MDR वसूलने की अनुमति नहीं MDR का ढांचा व्यापारी भुगतान के पीछे काम करने वाले पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है। सरकार के अनुसार यह ग्राहक से UPI भुगतान करने के लिए अलग से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहक पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रदाताओं को भी छिपे हुए प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से रोकने की व्यवस्था बताई गई है। Person-to-Person UPI पहले की तरह मुफ्त रहेगा नए MDR ढांचे का असर Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांसफर पर नहीं पड़ेगा। दो व्यक्तियों के बीच पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले UPI लेनदेन किसी भी राशि के हों, वे MDR के दायरे में नहीं आएंगे। यानी किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर इस नए मर्चेंट शुल्क की व्यवस्था लागू नहीं होगी। NPCI ने छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव की आशंका को बताया गलत MDR पर GST को लेकर सामने आई चिंताओं पर NPCI ने कहा है कि छोटे व्यापारियों पर व्यापक अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका सही नहीं है। इसका आधार यह है कि ₹2,000 तक के अधिकांश मर्चेंट भुगतान MDR से बाहर हैं और ₹1 लाख तक की मासिक UPI प्राप्ति वाले पात्र छोटे व्यापारी भी MDR छूट में आते हैं। इसके अलावा पात्र GST-पंजीकृत व्यापारी MDR पर दिए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। नए नियम का मकसद UPI व्यवस्था को लंबे समय तक चलाने की तैयारी सरकार ने नए MDR ढांचे को UPI के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ा है। सरकार के अनुसार MDR से प्राप्त राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होगी। साथ ही MDR संग्रह का 5 प्रतिशत हिस्सा छोटे व्यापारियों और UPI के विस्तार से जुड़े फंड में देने का प्रावधान भी बताया गया है। कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला बदलाव हर UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की व्यवस्था नहीं है। ₹2,000 तक के P2M भुगतान, पात्र छोटे व्यापारियों के भुगतान और सभी P2P लेनदेन MDR से बाहर रहेंगे। ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू होगा, लेकिन GST पूरे UPI भुगतान पर नहीं बल्कि MDR सेवा शुल्क पर लगेगा। इसी आधार पर NPCI ने छोटे व्यापारियों पर व्यापक अतिरिक्त GST बोझ की आशंका को गलत बताया है। UPI MDR पर GST को लेकर NPCI की सफाई से संबंधित मुख्य FAQs 1. क्या UPI से पेमेंट करने पर अब 18% GST लगेगा? नहीं। 18% GST पूरे UPI भुगतान की राशि पर नहीं लगेगा। जहां MDR लागू होगा, वहां GST केवल MDR शुल्क पर लगेगा। 2. क्या ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर MDR लगेगा? अधिकतर पात्र ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान MDR से बाहर रहेंगे। इसलिए इन लेनदेन पर MDR से जुड़ा GST भी नहीं लगेगा। 3. छोटे दुकानदारों के लिए UPI MDR का नया नियम क्या है? ₹1 लाख तक मासिक UPI प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से छूट दी जाएगी। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का बोझ कम रखना है। 4. ₹2,000 से ज़्यादा UPI पेमेंट करने पर कितना MDR लगेगा? निर्धारित पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। 5. क्या UPI से पैसे भेजने वाले ग्राहक को MDR देना होगा? MDR व्यापारी भुगतान से जुड़ा शुल्क है। इसे ग्राहक से अलग से वसूलने की अनुमति नहीं है। 6. क्या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI भेजने पर MDR लगेगा? नहीं। Person-to-Person यानी P2P UPI लेनदेन नए MDR ढांचे के दायरे में नहीं आते।
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