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Home » पश्चिम बंगाल SIR के तहत BLOs का आंदोलन: बढ़ते डिजिटल दायित्व, असहनीय कार्यभार और समाधान की राह

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पश्चिम बंगाल SIR के तहत BLOs का आंदोलन: बढ़ते डिजिटल दायित्व, असहनीय कार्यभार और समाधान की राह

SA News
Last updated: November 17, 2025 11:54 am
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पश्चिम बंगाल SIR के तहत BLOs का आंदोलन बढ़ते डिजिटल दायित्व
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इस समय पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision, SIR) की प्रक्रिया राष्ट्रव्यापी चर्चा में है, लेकिन इसके केंद्र में हैं – बूथ लेवल अधिकारी (BLOs)। 15 नवंबर 2025 को, जैसे ही SIR गणना चरण की 11वीं दिन पूरी हुई, सिलीगुड़ी और हावड़ा सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों के BLOs ने असहनीय डिजिटल वर्कलोड और प्रशासनिक दबाव के विरोध में आवाज बुलंद की। डिजिटल तकनीक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आधुनिक तो बना रही है, लेकिन इसका वास्तविक बोझ सबसे ज्यादा जमीनी कर्मचारियों पर पड़ रहा है।

Contents
  • डिजिटल SIR में BLOs के लिए तीन गुना ज़िम्मेदारियाँ
  • कार्यभार और दबाव की असल तस्वीर
  • BLOs की माँगे: समाधान और राहत के स्वर
  • SIR के आंकड़ों में भी दिख रही है परेशानी
  • प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित समाधान
  • निष्कर्ष – BLO की मेहनत और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कसौटी

डिजिटल SIR में BLOs के लिए तीन गुना ज़िम्मेदारियाँ

BLOs के अनुभव बताते हैं कि SIR के इस चरण ने उनका काम कई तरीकों से बढ़ा दिया है:

  • सबसे पहले, उन्हें हर मतदाता तक पहुँचकर विशेष गणना फॉर्म बांटना होता है।
  • उसके बाद, भरे हुए प्रपत्रों को एकत्र करना पड़ता है।
  • आखिर में, उन सभी फॉर्म का डेटा BLO App अथवा पोर्टल पर डिजिटल रूप से अपलोड करना पड़ता है।

ये कार्य अकेले निर्वाचनी नहीं, बल्कि समय और तकनीकी दक्षता के हिसाब से खासे चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। ऐसे कई BLO हैं जिन्हें डिजिटल एंट्री में अभी प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जिससे काम की गति अत्यंत धीमी हो जाती है।

कार्यभार और दबाव की असल तस्वीर

वास्तविकता यह है कि BLOs को अपनी सामान्य शासकीय, शैक्षिक या अन्य विभागीय ड्यूटी के साथ-साथ SIR के सारे कार्य भी निभाने पड़ रहे हैं। एक BLO की माने तो, “हफ्तेभर से रोज रात को 12-14 घंटे काम कर रहा हूँ, जिसमें घर-घर फॉर्म बाँटना, उन्हें इकट्ठा करना और फिर रात में BLO ऐप पर डेटा डालना पड़ता है।”

तकनीकी दिक्कतें, जैसे ऐप का स्लो होना, बार-बार नेटवर्क जाना, या हैंग जैसी परेशानियाँ लगातार सामने आ रही हैं। कई BLOs ग्रामीण इलाकों में कार्यरत हैं जहाँ इंटरनेट की उपलब्धता कम है, जिससे फॉर्म के डेटा की समय पर एंट्री और अपलोडिंग लगभग असंभव हो जाता है। इस वजह से उन्हें दूर-दराज के किसी साइबर कैफे तक जाना पड़ता है या परिजन व तकनीकी जानने वालों की मदद लेनी पड़ती है।

BLOs की माँगे: समाधान और राहत के स्वर

  • गणना चरण के समय में विस्तार: जब कार्य का दायरा और तकनीकी पेचीदगियाँ बढ़ी हैं, तो BLO का कहना है कि डेडलाइन बढ़ाना निहायत जरूरी है, ताकि हड़बड़ी की जगह विश्वसनीयता और गुणवत्ता आ सके।
  • प्रशिक्षित डेटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति: BLOs का तर्क सही है कि अगर हर बूथ या एरिया में सर्पोटिंग स्टाफ मिल जाए तो न केवल डिजिटल डेटा त्वरित चढ़ेगा, बल्कि अन्य निजी और विभागीय ज़िम्मेदारी भी ठीक से निभाई जा सकेगी।
  • डाटा एडिटिंग की सुविधा: डेटा अपलोड करते समय कभी छोटी-छोटी गलतियाँ हो जाती हैं, जिन्हें तुरंत सुधारना BLO के अधिकार में नहीं है। वे इधर-उधर दौड़ते हैं, ऑफिस जाते हैं, बार-बार रीक्वेस्ट लगाते हैं, जबकि एडिटिंग टूल की सुविधा दी जाए तो काम बहुत आसान हो सकता है।

SIR के आंकड़ों में भी दिख रही है परेशानी

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR प्रारंभ होने के पहले ही हफ्ते में लगभग 6.56 करोड़ यानी 85% से ज्यादा गणना फॉर्म बांटे जा चुके हैं। कुल मतदाता करीब 7.6 करोड़ हैं। आयोग का स्पष्ट आदेश है – रविवार तक सभी मतदाताओं तक फॉर्म पहुँचना चाहिए और 4 दिसंबर तक डेटा पूरी तरह अपडेट हो जाना चाहिए। इसी वजह से BLOs की पीड़ा और तेज हो गई है – “हम पर लगातार सख्ती के साथ दबाव भी है, ऊपर से तकनीकी व व्यक्तिगत समस्याएँ हैं।”

प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित समाधान

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), मनोज कुमार अग्रवाल ने सभी जिलों के BLOs की शिकायतें सुनते हुए जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह जताया है कि प्रशासन कर्मचारियों की कठिनाइयों को हल्के में नहीं लेगा, और गठित समिति BLOs के हक की रक्षा करेगी।

हालांकि, चुनाव आयोग अब तक समयसीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। उनका तर्क है कि पूरी बंगाल SIR प्रक्रिया, आगामी चुनाव की तैयारी, और डेटा पारदर्शिता के लिए कदम पीछे नहीं हटाए जा सकते। कुल मिलाकर, प्रशासन का जोर यही है — नियमों का पालन कीजिए, और व्यक्तिगत स्तर पर यथासंभव समस्याएं खुद सुलझाएं।

वहीं कुछ अधिकारियों का मानना है कि यदि ERO, AERO, BLO पर्यवेक्षक भी कुछ हद तक डेटा प्रविष्टि में हाथ बंटाएं तो SIR कार्य में गति और गुणवत्ता दोनों आ जाएगी।

निष्कर्ष – BLO की मेहनत और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कसौटी

Bengal SIR राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था में निश्चित ही डिजिटल परिवर्तन की मिसाल है, लेकिन उसकी नींव BLOs की क्षमता और सशक्तिकरण पर टिकी है। अगर तकनीकी प्रशिक्षण, समय विस्तार और एडिटिंग जैसी सुविधाएँ समय रहते नहीं दी गईं, तो सबसे ज़्यादा नुकसान प्रशासनिक विश्वसनीयता और प्रक्रिया की पारदर्शिता को ही होगा। लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकता है जब जमीनी स्तर पर काम करने वाला हर कर्मचारी आत्मविश्वास के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सके—वरना आंदोलन, असंतोष और त्रुटियाँ SIR जैसी बड़ी प्रक्रिया में हर किसी के लिए चिंता का विषय रहेंगी।

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