देशभर में चर्चा का विषय बने त्विषा शर्मा मौत मामले में शुक्रवार, 22 मई 2026, को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मामले के मुख्य आरोपी और मृतका के पति समर्थ सिंह ने मध्य प्रदेश के जबलपुर जिला कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट परिसर पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और आगे की कार्रवाई के लिए भोपाल पुलिस को सौंप दिया गया।
समर्थ सिंह पिछले कई दिनों से फरार चल रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। पुलिस ने उन पर ₹30,000 का इनाम भी घोषित किया था। सरेंडर के बाद अब इस चर्चित मामले की जांच एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
12 मई को हुई थी त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत
मामले की शुरुआत 12 मई 2026 को हुई थी, जब 33 वर्षीय त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी मौत भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में हुई थी। शुरुआती जानकारी सामने आने के बाद यह मामला दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा माना जाने लगा।
त्विषा शर्मा मॉडलिंग जगत से जुड़ी हुई थीं और पूर्व ब्यूटी क्वीन भी रह चुकी थीं। उनकी अचानक हुई मौत ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और कानूनी गलियारों तक व्यापक बहस छेड़ दी। परिवार ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
अग्रिम जमानत अर्जी वापस लेकर पहुंचे कोर्ट
सूत्रों के अनुसार, समर्थ सिंह ने सरेंडर से पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर अपनी अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका वापस ले ली थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्हें भोपाल में सरेंडर करने की सलाह भी दी गई थी। इसके बाद वे जबलपुर जिला कोर्ट पहुंचे, जहां उन्होंने आत्मसमर्पण किया।
कोर्ट में सरेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में भोपाल पुलिस की टीम उन्हें अपने साथ लेकर रवाना हुई। माना जा रहा है कि अब पुलिस उनसे मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर पूछताछ करेगी।
रिटायर्ड जज सास भी आरोपों के घेरे में
इस मामले में समर्थ सिंह की मां गिरिबाला सिंह का नाम भी आरोपी के तौर पर सामने आया है। गिरिबाला सिंह रिटायर्ड जज हैं और परिवार पर आरोप है कि उन्होंने भी कथित रूप से त्विषा शर्मा को मानसिक प्रताड़ना देने में भूमिका निभाई।
त्विषा के परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही दहेज को लेकर दबाव बनाया जाता था। साथ ही उनकी निजी जिंदगी और पुराने रिश्तों को लेकर भी लगातार ताने दिए जाते थे। परिवार ने दावा किया कि डेटिंग ऐप्स और निजी जीवन से जुड़ी पुरानी बातों को आधार बनाकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता था।
ऑडियो रिकॉर्डिंग ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
मामले में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिसने विवाद को और गंभीर बना दिया है। इस रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर गाली-गलौज और अपमानजनक बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से रिकॉर्डिंग की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच एजेंसियां इसकी सत्यता की पड़ताल कर रही हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिकॉर्डिंग प्रमाणिक पाई जाती है, तो यह मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है। यही वजह है कि पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी गहन जांच कर रही है।
SIT जांच और AIIMS की मेडिकल टीम की एंट्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई साजिश थी।
इसी बीच, मामले में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने का निर्णय भी लिया गया है। इसके लिए AIIMS Delhi की विशेषज्ञ मेडिकल टीम को शामिल किया गया है। मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है ताकि मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके।
CBI जांच की उठ रही मांग
त्विषा शर्मा मौत मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने मामले को Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंपने की मांग उठाई है।
परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली और हाई-प्रोफाइल पृष्ठभूमि होने के कारण मामले को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। यही कारण है कि वे स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
दहेज और घरेलू हिंसा पर फिर छिड़ी राष्ट्रीय बहस
त्विषा शर्मा की मौत ने एक बार फिर दहेज उत्पीड़न, इन-लॉज टॉर्चर और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। विशेष रूप से शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवारों में महिलाओं के साथ होने वाली मानसिक प्रताड़ना को लेकर समाज में चिंता बढ़ी है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि उस मानसिकता का प्रतीक है जहां शादी के बाद महिलाओं पर सामाजिक, मानसिक और आर्थिक दबाव डाला जाता है।
अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं और अदालत में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है। समर्थ सिंह के सरेंडर के बाद यह स्पष्ट माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

