SA NewsSA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
SA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Politics
  • Educational
  • Tech
  • History
  • Events
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Follow US
© 2024 SA News. All Rights Reserved.

Home » APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अभिभावकों की सहमति होगी अनिवार्य, CBSE को पूरे देश में लागू करने होंगे नए दिशा-निर्देश

Politics

APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अभिभावकों की सहमति होगी अनिवार्य, CBSE को पूरे देश में लागू करने होंगे नए दिशा-निर्देश

SA News
Last updated: July 26, 2026 11:37 am
SA News
Share
APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
SHARE

देशभर के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों से जुड़े APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) आईडी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र सरकार APAAR ID को स्वैच्छिक (Voluntary) योजना बताती है, तो अभिभावकों को इसमें शामिल होने, सहमति देने से इनकार करने (Refuse Consent) और योजना से बाहर रहने (Opt-Out) का स्पष्ट एवं प्रभावी विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया है कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को ओडिशा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश देगी।

Contents
  • APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला से संबंधित मुख्य बिंदु 
  • क्या है APAAR ID और क्यों शुरू की गई यह योजना?
  • सुप्रीम कोर्ट में मामला क्यों पहुंचा?
  • अदालत में क्या-क्या दलीलें दी गईं?
  • ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्देश
  • डेटा सुरक्षा और निजता पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
  • योजना के लाभों पर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
  • छात्रों और अभिभावकों के लिए क्या होगा असर?
  • APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला से संबंधित मुख्य FQAS 

यह मामला केवल एक डिजिटल छात्र पहचान संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षा का अधिकार, अभिभावकों की स्वतंत्र सहमति, बच्चों की निजता, आधार से जुड़ाव और डिजिटल डेटा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला से संबंधित मुख्य बिंदु 

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: CBSE को ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देश पूरे देश में लागू करने का संकेत।
  • अभिभावकों को मिलेगा विकल्प: APAAR ID के लिए सहमति देना, मना करना (Refuse Consent) और Opt-Out का स्पष्ट अधिकार।
  • APAAR ID रहेगी स्वैच्छिक: केवल APAAR ID न होने पर छात्र को प्रवेश, परीक्षा या मार्कशीट से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
  • डेटा सुरक्षा पर जोर: छात्रों की निजता और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) Act, 2023 के पालन पर सुप्रीम कोर्ट का विशेष जोर।
  • APAAR ID का उद्देश्य: छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संग्रहीत करना और सत्यापन व रिकॉर्ड ट्रांसफर को आसान बनाना।
  • शिक्षा और निजता में संतुलन: अदालत ने कहा कि डिजिटल शिक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन छात्रों के मौलिक अधिकार और अभिभावकों की स्वतंत्र सहमति से समझौता नहीं किया जा सकता।

क्या है APAAR ID और क्यों शुरू की गई यह योजना?

APAAR यानी Automated Permanent Academic Account Registry राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय की “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” पहल का हिस्सा है। इसके तहत प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की एक स्थायी डिजिटल पहचान संख्या दी जाती है, जिसमें उसकी पूरी शैक्षणिक यात्रा का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है।

इस डिजिटल रिकॉर्ड में बोर्ड परीक्षाओं की मार्कशीट, प्रमाणपत्र, डिग्रियां, सह-पाठ्यक्रम उपलब्धियां, क्रेडिट रिकॉर्ड और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज शामिल किए जा सकते हैं। यह प्रणाली DigiLocker और Academic Bank of Credits (ABC) से भी जुड़ी है, जिससे दस्तावेजों का सत्यापन, संस्थान बदलने पर रिकॉर्ड ट्रांसफर और उच्च शिक्षा में क्रेडिट स्थानांतरण जैसी प्रक्रियाएं सरल बनती हैं। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, डिजिटल और सुव्यवस्थित बनेगी।

सुप्रीम कोर्ट में मामला क्यों पहुंचा?

चार छात्रों के अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि APAAR ID को व्यवहार में लगभग अनिवार्य बनाया जा रहा है। उनका आरोप था कि कई स्कूलों और संस्थानों में छात्रों पर APAAR ID बनवाने का दबाव डाला जा रहा है, जबकि सरकार इसे स्वैच्छिक योजना बताती है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और किसी भी छात्र को केवल APAAR ID या आधार न होने के कारण प्रवेश, परीक्षा, पंजीकरण या अन्य शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दलील दी कि इतनी बड़ी मात्रा में बच्चों का व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा और मजबूत डेटा सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।

अदालत में क्या-क्या दलीलें दी गईं?

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि APAAR योजना किसी विशेष संसदीय कानून के बजाय प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर लागू की जा रही है। उन्होंने 2019 के के.एस. पुट्टस्वामी (आधार) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी बच्चे को आधार बनवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि APAAR ID के लिए आधार व्यावहारिक रूप से अनिवार्य हो जाता है, तो यह संविधान के अनुरूप नहीं होगा।

उन्होंने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 के पालन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अभिभावकों की सूचित सहमति (Informed Consent) ली जानी चाहिए, उन्हें सहमति वापस लेने का अधिकार मिलना चाहिए और छात्रों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने छात्रों के लिए ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ (Right to be Forgotten) का मुद्दा भी उठाया, ताकि भविष्य में आवश्यकता होने पर पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड के उपयोग को सीमित किया जा सके।

ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार ने ओडिशा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले को चुनौती नहीं दी है। इसलिए CBSE को निर्देश दिया जाएगा कि वह उस निर्णय को पूरे देश में लागू करे।

ओडिशा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यदि APAAR योजना वास्तव में स्वैच्छिक है, तो मॉडल सहमति पत्र में अभिभावकों को सहमति देने, सहमति देने से इनकार करने और योजना से बाहर रहने (Opt-Out) का स्पष्ट विकल्प दिया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि केवल बाद में सहमति वापस लेने का अधिकार पर्याप्त नहीं है, बल्कि शुरुआत में ही योजना में शामिल न होने का अधिकार भी उपलब्ध होना चाहिए।

डेटा सुरक्षा और निजता पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBSE के किसी भी सर्कुलर को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 के अनुरूप होना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक आदेश कानून से ऊपर नहीं हो सकते और छात्रों की निजता के मौलिक अधिकार का सम्मान किया जाना आवश्यक है।

साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि CBSE को छात्रों के डेटा के संग्रहण, उपयोग, सुरक्षा और प्रसंस्करण से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करनी होगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की गोपनीयता संबंधी चिंता न रहे।

योजना के लाभों पर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर सरकारी पहल को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि APAAR ID शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक उपयोगी पहल हो सकती है। इससे छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, दस्तावेजों का सत्यापन आसान होगा, स्कूल बदलने की प्रक्रिया सरल बनेगी और शिक्षा विभाग शिक्षक-छात्र अनुपात सहित कई प्रशासनिक पहलुओं की बेहतर निगरानी कर सकेगा।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी सुविधा और प्रशासनिक लाभ तभी स्वीकार्य हैं, जब वे संविधान, निजता के अधिकार और डेटा संरक्षण संबंधी कानूनों के अनुरूप हों।

छात्रों और अभिभावकों के लिए क्या होगा असर?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू होने के बाद CBSE को अपने मॉडल सहमति फॉर्म और प्रक्रियाओं में संशोधन करना पड़ सकता है। अभिभावकों को स्पष्ट रूप से यह विकल्प मिलेगा कि वे अपने बच्चे के लिए APAAR ID बनवाना चाहते हैं या नहीं। साथ ही किसी भी छात्र को केवल APAAR ID न होने के आधार पर प्रवेश, बोर्ड परीक्षा पंजीकरण, मार्कशीट जारी करने या अन्य शैक्षणिक सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

यह फैसला डिजिटल शिक्षा प्रणाली और छात्रों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत आदेश और CBSE द्वारा जारी किए जाने वाले नए दिशा-निर्देशों पर टिकी है।

यह भी पढ़ें : आधार ऐप 2026: अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और गोपनीयता पर केंद्रित डिजिटल पहचान प्लेटफॉर्म

APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला से संबंधित मुख्य FQAS 

1. APAAR ID क्या है?

APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) छात्रों के लिए 12 अंकों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान संख्या है, जिसमें उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है।

2. सुप्रीम कोर्ट ने APAAR ID मामले में क्या कहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि CBSE को ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देश पूरे देश में लागू करने होंगे और अभिभावकों को स्पष्ट सहमति या इनकार का विकल्प देना होगा।

3. क्या APAAR ID बनवाना अनिवार्य है?

सरकार के अनुसार APAAR ID स्वैच्छिक है। केवल APAAR ID न होने के आधार पर किसी छात्र को शिक्षा, परीक्षा या प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता।

4. अभिभावकों को कौन-कौन से विकल्प मिलेंगे?

अभिभावकों को सहमति देने (Consent), सहमति से इनकार करने (Refuse Consent) और योजना से बाहर रहने (Opt-Out) का विकल्प मिलेगा।

5. APAAR ID को लेकर मुख्य विवाद क्या है?

मुख्य विवाद छात्रों की निजता, डेटा सुरक्षा, आधार से जुड़ाव और अभिभावकों की स्वतंत्र सहमति को लेकर है।

6. APAAR ID का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना और दस्तावेजों के सत्यापन व रिकॉर्ड ट्रांसफर को आसान बनाना है।

Share This Article
Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
BySA News
Follow:
Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.
Previous Article UIDAI One-Tap Biometric Lock: आधार ऐप का नया फीचर, अब बायोमेट्रिक डेटा चोरी होगा असंभव UIDAI One-Tap Biometric Lock: फिंगरप्रिंट क्लोनिंग से बैंक खाते हो रहे खाली, आधार ऐप के इस वन-टैप फीचर से हैकर्स को दें मात
Next Article भारत की पहली बुलेट ट्रेन भारत की पहली बुलेट ट्रेन, 15 अगस्त 2027 से शुरू, हाई-स्पीड रेल सेवा, 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार 
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Popular Posts

RRB Technician Form 2025: रेलवे में बड़ी भर्ती 6180 टेक्नीशियन पदों के लिए निकली वैकेंसी, जल्द करें आवेदन

RRB Technician New Vacancy 2025: रेलवे में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए…

By SA News

Nationwide 3 Day Bank Strike: Know the Reasons, Potential Impact on Banking Services and What Customers should do

A nationwide 3 day bank strike in India has been announced by the United Forum…

By Dolly Singh

Flood Relief by Sant Rampal Ji Maharaj Brings Hope to Sabarwas Village, Hisar

For over two months, Sabarwas Village in Agroha Tehsil, Hisar (Haryana) faced a severe flood…

By SA News

You Might Also Like

Maharashtra Municipal Election 2026 Result
Politics

Maharashtra Municipal Election 2026 Result: BMC सहित 29 नगर निगमों में महायुति की बड़ी जीत, शहरी राजनीति में बदलाव

By SA News
ECI Form 6 Change What Does It Mean for New Voters
Politics

Major Change by Election Commission to Form 6: Key Change, SIR Declaration and Latest Update

By Dolly Singh
दिल्ली में स्थायी प्रोटेस्ट जोन की मांग, व्यापारियों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
Politics

दिल्ली में स्थायी प्रोटेस्ट जोन की मांग, व्यापारियों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

By SA News
Act East and Beyond: PM Modi Commences High-Stakes Tour of Indonesia, Australia, and New Zealand
Politics

Act East and Beyond: PM Modi Commences High-Stakes Tour of Indonesia, Australia, and New Zealand

By SA News
SA NEWS LOGO SA NEWS LOGO
748KLike
340KFollow
13KPin
216KFollow
1.8MSubscribe
3KFollow

About US


Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.

Top Categories
  • Politics
  • Health
  • Tech
  • Business
  • World
Useful Links
  • About Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Copyright Notice
  • Contact Us
  • Official Website (Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj)

© SA News 2027| All rights reserved.