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Home » अल-नीनो 2026: भारत पर सूखे का साया, खेती और अर्थव्यवस्था के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

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अल-नीनो 2026: भारत पर सूखे का साया, खेती और अर्थव्यवस्था के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

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Last updated: June 17, 2026 11:19 am
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अल-नीनो 2026: भारत में सूखे की आहट और अर्थव्यवस्था पर संकट
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भारत की कृषि, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन की जीवनरेखा कहे जाने वाले मॉनसून पर एक बार फिर ‘अल-नीनो’ का काला साया मंडराने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने जून 2026 में आधिकारिक तौर पर प्रशांत महासागर में अल-नीनो के आगमन की पुष्टि कर दी है। यह घोषणा भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि पिछले अनुभवों के आधार पर अल-नीनो का सीधा संबंध कमजोर मॉनसून और सूखे से रहा है।

Contents
  • क्या है अल-नीनो और यह क्यों खतरनाक है?
  • भारतीय मॉनसून पर सीधा प्रहार
  • खेती और किसानों पर संकट
  • महंगाई और अर्थव्यवस्था पर बोझ
  • सरकार की रणनीति और तैयारी
  • भविष्य की चुनौती और समाधान 

क्या है अल-नीनो और यह क्यों खतरनाक है?

अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर में हर दो से सात साल के अंतराल पर होती है। इसका अर्थ स्पैनिश में ‘छोटा बच्चा’ होता है। सामान्य परिस्थितियों में हवाएं गर्म पानी को एशिया की तरफ धकेलती हैं, लेकिन अल-नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। वर्तमान में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 0.7°C अधिक दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह 1950 के बाद से अब तक के सबसे शक्तिशाली अल-नीनो पैटर्न्स में से एक हो सकता है।

भारतीय मॉनसून पर सीधा प्रहार

IMD के अनुसार, अल-नीनो के कारण 2026 के मॉनसून के दौरान बारिश सामान्य से 10% कम रहने की आशंका है। हालांकि जून की शुरुआत सामान्य दिख रही है, लेकिन मुख्य मॉनसूनी महीनों—जुलाई और अगस्त—में इसका सबसे घातक असर दिखने की संभावना है। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों, जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में भारी बारिश की कमी देखी जा सकती है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 16 अल-नीनो वर्षों में से 12 वर्षों में भारत में बारिश सामान्य से कम रही है।

खेती और किसानों पर संकट

भारत के करीब 43% कार्यबल को रोजगार देने वाला कृषि क्षेत्र सीधे तौर पर मॉनसून पर निर्भर है। एक अध्ययन के अनुसार, अल-नीनो वर्षों में धान और मक्के जैसी खरीफ फसलों के उत्पादन में 10% से अधिक की गिरावट देखी गई है। विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में धान की पैदावार बुरी तरह प्रभावित होती है। वर्तमान में देश के कई जलाशयों में पानी का स्तर पहले से ही नीचे है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई और सिंचाई पर संकट के बादल छा गए हैं।

महंगाई और अर्थव्यवस्था पर बोझ

कमजोर मॉनसून का सीधा असर खाद्य महंगाई पर पड़ता है। आलू, प्याज और टमाटर जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इन चिंताओं को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए मुद्रास्फीति (Inflation) के अनुमान को बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। इसके अलावा, मॉनसून की अनिश्चितता के कारण भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर के अनुमान को भी 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।

सरकार की रणनीति और तैयारी

सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए करीब 200 जिलों में अलर्ट जारी किया है और किसानों को कम पानी वाली फसलें उगाने की सलाह दी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ‘जलवायु लचीला कृषि’ (NICRA) परियोजना के तहत 651 जिलों में आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) लागू कर रही है। इसके तहत सूखे को झेलने वाली फसलों की किस्मों, जैसे धान, गेहूं, मक्का और बाजरा के बीजों का प्रदर्शन और वितरण किया जा रहा है। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) और एकीकृत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसानों के जोखिम को कम किया जा सके।

भविष्य की चुनौती और समाधान 

अल-नीनो 2026 केवल एक मौसम संबंधी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और अल-नीनो की ‘कातिल जोड़ी’ मौसम को और अधिक अनियंत्रित बना रही है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह समय जल संरक्षण, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का है।

विश्व प्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं के अनुसार भारत देश से उठी एक विचारधारा प्राकृतिक संकटों को टाल सकती है। वह कोई और नहीं संत रामपाल जी महाराज हैं। यह इस बात से भी अधिक स्पष्ट हो जाता है क्योंकि 2025 में उत्तर भारत में आई बाढ़ के बाद किसान पूरी तरह से बर्बाद हो चुके थे लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने विज्ञान को अपन हथियार बनाकर हजारों एकड़ भूमि में भरे पानी को महीनों में खाल कर दिया, जबकि मोटर पाइप का उपयोग करके भी उस पानी को खाली करने में सालों का समय लगना था।

संत रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे संत हैं जो इस प्रकार की प्राकृतिक आपदा को टाल सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अवश्य विजि़ट करें www.jagatgururampalji.org 

FAQs

1. अल-नीनो क्या है? 

अल-नीनो प्रशांत महासागर की सतह के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की प्रक्रिया है। यह वैश्विक स्तर पर हवाओं के पैटर्न और बारिश के चक्र को प्रभावित करता है, जिससे अक्सर भारत में कमजोर मॉनसून की स्थिति बनती है।

2. 2026 में मॉनसून पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अल-नीनो के कारण 2026 में मॉनसून की बारिश सामान्य से 10% कम (लगभग 90% बारिश) रहने की आशंका है, जिससे सूखे का खतरा बढ़ गया है।

3. कौन सी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी? अल-नीनो का सबसे ज्यादा असर खरीफ फसलों जैसे धान (Paddy), मक्का (Maize), बाजरा और ज्वार पर पड़ता है। पिछले वर्षों में इन फसलों के उत्पादन में 10% तक की गिरावट देखी गई है।

4. किन राज्यों में सूखे का सबसे अधिक खतरा है? मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के राज्य जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और आंध्र प्रदेश सूखे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

5. क्या इससे महंगाई बढ़ेगी?

 हाँ, खराब मॉनसून के कारण कृषि उत्पादन कम हो सकता है, जिससे विशेष रूप से सब्जियों और अनाज की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। RBI ने पहले ही इसके कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की चेतावनी दी है।

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