SA NewsSA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
SA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Politics
  • Educational
  • Tech
  • History
  • Events
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Follow US
© 2024 SA News. All Rights Reserved.

Home » ​PCOS का नाम बदला, अब ‘PMOS’ कहलाएगी महिलाओं की यह बीमारी

Health

​PCOS का नाम बदला, अब ‘PMOS’ कहलाएगी महिलाओं की यह बीमारी

SA News
Last updated: May 20, 2026 11:41 am
SA News
Share
pcos-naam-badalkar-hua-pmos
SHARE

​ग्लोबल हेल्थ एक्सपर्ट्स और चिकित्सा संगठनों ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए महिलाओं में होने वाली आम और गंभीर समस्या PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) का नाम बदलकर PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) कर दिया है। दुनियाभर की लगभग 17 करोड़ महिलाओं को प्रभावित करने वाली इस बीमारी का पुराना नाम बेहद भ्रामक था, क्योंकि यह केवल ओवरी (अंडाशय) की सिस्ट पर ध्यान केंद्रित करता था। नया नाम इस बीमारी के असलीबीमार यानी हार्मोनल असंतुलन (Polyendocrine) और चयापचय गड़बड़ी (Metabolic) को सटीक रूप से दर्शाता है, जिससे अब इसके सटीक निदान और उपचार का रास्ता साफ होगा।

Contents
  • ​News Highlights
  • ​1. 14 साल की रिसर्च का परिणाम (14 Years of Global Effort)
  • ​2. नाम बदलने के पीछे की असली ‘साइंस’ (Scientific Reason)
  • ​3. ‘PMOS’ शब्द के हर हिस्से का गहरा मतलब
  • ​4. भारतीय महिलाओं के लिए यह क्यों बहुत जरूरी है? (Indian Context)
  • ​5. 3 साल का ट्रांजिशन पीरियड (3-Year Transition)
  • ​FAQs 

​News Highlights

  • ​नया नामकरण: ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ (PCOS) का नाम बदलकर अब ‘पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम’ (PMOS) रखा गया है।
  • ​वैश्विक प्रभाव: यह बीमारी दुनिया भर में हर 8 में से 1 महिला (लगभग 17 करोड़) को प्रभावित करती है।
  • ​भ्रम होगा दूर: पुरानी धारणा के विपरीत, PMOS से पीड़ित कई महिलाओं के ओवरी में सिस्ट नहीं होते। नया नाम इस भ्रम को खत्म करेगा।
  • ​मुख्य कारण: यह मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, तनाव और बिगड़ी हुई जीवनशैली के कारण होता है।
  • ​गंभीर खतरे: सही समय पर इलाज न होने से भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

​क्यों पड़ी नाम बदलने की जरूरत? 

चिकित्सा विशेषज्ञों (जैसे एंडोक्राइन सोसाइटी और लैंसेट की रिपोर्ट) के अनुसार, पुराना नाम “PCOS” इस बीमारी की पूरी हकीकत बयां नहीं करता था। ‘पॉलीसिस्टिक’ शब्द से ऐसा लगता था कि यह सिर्फ ओवरी की गांठों की बीमारी है। हकीकत यह है कि यह एक मल्टी-सिस्टम एंडोक्राइन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। इसमें शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं। नया नाम ‘PMOS’ इसके बहु-आयामी (Multisystem) स्वरूप को उजागर करता है।61d20bec 0b52 4140 a340 069d736a7f0d

​PMOS के मुख्य लक्षण और कारण यह बीमारी शरीर में पुरुष हार्मोन (Androgens) के बढ़ने और इंसुलिन के सही इस्तेमाल न होने (Insulin Resistance) के कारण होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • ​पीरियड्स का अनियमित होना या न आना।
  • ​तेजी से वजन बढ़ना और उसे घटाने में मुश्किल होना।
  • ​चेहरे और शरीर पर अत्यधिक बालों का आना (Hirsutism)।
  • ​जिद्दी मुंहासे और तैलीय (Oily) त्वचा।
  • ​बालों का तेजी से झड़ना या गंजापन।
  • ​गर्भधारण करने में परेशानी (Infertility)।
  • ​अत्यधिक थकान, मूड स्विंग्स और मानसिक तनाव।

​संभावित खतरे और विशेषज्ञों की सलाह अगर समय रहते PMOS की पहचान न की जाए, तो यह महिलाओं के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इससे मेटाबॉलिक सिंड्रोम, डायबिटीज, हाई बीपी और दिल की बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

12 मई 2026 को ‘द लांसेट’ (The Lancet) मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक वैश्विक समझौते के तहत यह फैसला लिया गया है। इस विषय को और गहराई से समझने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण और नए बिंदुओं (Deep Insights) को नीचे दिया गया है, जिन्हें आप अपनी मुख्य खबर या सोशल मीडिया पोस्ट्स में शामिल कर सकती हैं:

​1. 14 साल की रिसर्च का परिणाम (14 Years of Global Effort)

​यह नाम बदलना कोई जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है। मोनाश यूनिवर्सिटी (Monash University) के नेतृत्व में दुनिया भर के 56 प्रमुख चिकित्सा संगठनों और मरीज सहायता समूहों ने 14 सालों तक इस पर गहन शोध और चर्चा की, जिसके बाद ‘PCOS’ को ‘PMOS’ नाम देने पर सहमति बनी।

​2. नाम बदलने के पीछे की असली ‘साइंस’ (Scientific Reason)

  • ​वे सिस्ट (गांठ) हैं ही नहीं: जब 20वीं सदी के मध्य में अल्ट्रासाउंड के जरिए इस बीमारी को पहली बार देखा गया, तो ओवरी में मोतियों की माला जैसी आकृतियां दिखीं, जिन्हें डॉक्टरों ने ‘सिस्ट’ (Cysts) समझ लिया।
  • ​असल हकीकत: आज की आधुनिक बायोकेमिकल रिसर्च से पता चला है कि वे कोई बीमारी पैदा करने वाली गांठें नहीं हैं, बल्कि अविकसित अंडे के फॉलिकल्स (Underdeveloped Egg Follicles) हैं, जो हार्मोनल असंतुलन के कारण पूरी तरह विकसित होकर बाहर नहीं निकल पाते। पुराना नाम वैज्ञानिक रूप से गलत था।

​3. ‘PMOS’ शब्द के हर हिस्से का गहरा मतलब

  • ​Polyendocrine (पॉलीएंडोक्राइन): इसका मतलब है कि यह सिर्फ एक ग्रंथि (Gland) की समस्या नहीं है। इसमें शरीर के कई हार्मोनल सिस्टम एक साथ शामिल होते हैं—जैसे इंसुलिन (Insulin), एण्ड्रोजन (Androgens), और मस्तिष्क व ओवरी के बीच होने वाले सिग्नल।
  • ​Metabolic (मेटाबॉलिक): यह दर्शाता है कि यह बीमारी सीधे तौर पर वजन, चयापचय, इंसुलिन रेजिस्टेंस, और भविष्य में होने वाले टाइप-2 डायबिटीज व हार्ट अटैक के खतरों से जुड़ी है।
  • ​Ovarian (ओवेरियन): यह दिखाता है कि इन सब का असर महिला के प्रजनन तंत्र (पीरियड्स और कंसीव करने की क्षमता) पर पड़ता है।

​4. भारतीय महिलाओं के लिए यह क्यों बहुत जरूरी है? (Indian Context)

​भारत को पहले से ही ‘डायबिटीज की राजधानी’ कहा जाता है। रिसर्च के अनुसार, साउथ एशियन (विशेषकर भारतीय) महिलाओं में PMOS के कारण मेटाबॉलिक सिंड्रोम और टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा अन्य देशों की महिलाओं की तुलना में बहुत अधिक होता है। पहले इसे सिर्फ ‘गाइनेकोलॉजिकल’ (महिलाओं की गुप्त बीमारी) मानकर छुपाया जाता था, लेकिन अब ‘मेटाबॉलिक’ नाम जुड़ने से लोग इसे शुगर और बीपी की तरह एक गंभीर क्रॉनिक बीमारी मानेंगे और समय पर जांच करवाएंगे।

​5. 3 साल का ट्रांजिशन पीरियड (3-Year Transition)

​विशेषज्ञों (जैसे रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट) का कहना है कि अचानक नाम बदलने से मरीजों में भ्रम फैल सकता है। इसलिए चिकित्सा जगत अगले 3 वर्षों (2026 से 2029) में इसे धीरे-धीरे लागू करेगा। डॉक्टर अब पर्चे पर ‘PCOS (अब PMOS)’ लिखना शुरू करेंगे ताकि आम जनता इस नए नाम से परिचित हो सके।

विशेषज्ञों ने इससे बचाव के लिए निम्नलिखित गाइडलाइंस दी हैं: 

1. नियमित जांच: यदि पीरियड्स अनियमित हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और हार्मोन प्रोफाइल टेस्ट करवाएं।

2. आहार में बदलाव: अपने भोजन में हरी सब्जियां, प्रोटीन शामिल करें। जंक फूड, रिफाइंड कार्ब्स और मीठे पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाएं।

3. वजन और तनाव प्रबंधन: रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम या वॉक करें। तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान का सहारा लें।

​FAQs 

​Q1. क्या PCOS और PMOS दो अलग-अलग बीमारियां हैं?

 उत्तर: नहीं, बीमारी एक ही है। चिकित्सा जगत में सटीकता लाने और भ्रम दूर करने के लिए ‘PCOS’ का नाम बदलकर अब आधिकारिक रूप से ‘PMOS’ कर दिया गया है।

​Q2. क्या PMOS होने पर ओवरी में सिस्ट होना अनिवार्य है? 

उत्तर: नहीं। यही इस नाम को बदलने का सबसे बड़ा कारण है। कई महिलाओं को यह बीमारी होती है लेकिन उनकी ओवरी में कोई सिस्ट (गांठ) नहीं होती। यह असल में एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या है।

​Q3. PMOS का मुख्य कारण क्या है? 

उत्तर: इसके मुख्य कारणों में आनुवंशिकी (Genetics), इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, खराब जीवनशैली (शारीरिक निष्क्रियता) और अत्यधिक मानसिक तनाव शामिल हैं।

​Q4. क्या PMOS को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है? 

उत्तर: इसे पूरी तरह ‘जड़ से खत्म’ करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही सात्विक व संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और डॉक्टर की सलाह से इसके लक्षणों को पूरी तरह रिवर्स (नियंत्रित) किया जा सकता है और एक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

Share This Article
Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
BySA News
Follow:
Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.
Previous Article ​Transforming Rural India Government Launches 7 Mega Healthcare Initiatives for Villages ​Revolutionizing Grassroots Medical Care: India Launches 7 Path-Breaking Rural Healthcare Initiatives
Next Article आपकी ‘पैकेटबंद’ थाली में खतरा: पोषण की जगह रसायन आपकी ‘पैकेटबंद’ थाली में खतरा: पोषण की जगह रसायन
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Popular Posts

Google’s 2026 Play Store Revolution: Battery-Guzzling Apps Will Finally Wear a Scarlet Letter

Ever stared at your phone at 7 a.m., only to see 40% of the battery…

By SA News

The Unmatched Help of Sant Rampal Ji Maharaj Gave New Life to Flooded Village Nehla Fatehabad Haryana

Natural disasters are one of the hardest challenges of human life. Whenever continuous rain happens,…

By SA News

राष्ट्रीय लोक अदालत: जानें कैसे माफ़ होंगे आपके ट्रैफ़िक ई-चालान

देशभर में 13 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) आयोजित की गई।…

By SA News

You Might Also Like

संक्रमण और रोगों से बचने के उपाय: स्वच्छता की भूमिका
Health

संक्रमण और रोगों से बचने के उपाय: स्वच्छता की भूमिका

By SA News
10 Sleep Sweetly Tips Your Ultimate Guide to Better Sleep
Health

Sleep Sweetly: Your Guide to Restful Nights

By SA News
10 Simple Morning Habits for a Healthier Day
Health

How Your First Waking Hour Quietly Shapes Your Health and Longevity 

By SA News
Effective Tips for Radiant Skin: Natural and Spiritual Approaches
Health

Effective Tips for Radiant Skin: Natural and Spiritual Approaches

By SA News
SA NEWS LOGO SA NEWS LOGO
748KLike
340KFollow
13KPin
216KFollow
1.8MSubscribe
3KFollow

About US


Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.

Top Categories
  • Politics
  • Health
  • Tech
  • Business
  • World
Useful Links
  • About Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Copyright Notice
  • Contact Us
  • Official Website (Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj)

© SA News 2025 | All rights reserved.