Onion Price Hike: देश के प्रमुख खुदरा बाजारों में प्याज़ के दामों में दर्ज किए जाने वाले मौसमी उछाल को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने एक नया आपूर्ति मॉडल लागू किया है। इसके तहत भारतीय रेलवे के सहयोग से विशेष फ्रेट ट्रेनें, ‘कांदा एक्सप्रेस’ नासिक और लासलगांव जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से सीधे बड़े उपभोक्ता केंद्रों (दिल्ली, सिलीगुड़ी, डिब्रूगढ़ आदि) के लिए रवाना की जा रही हैं।
भारत में प्याज़ की आपूर्ति का संकट अक्सर उत्पादन की कमी से ज्यादा वितरण और लॉजिस्टिक्स की रुकावटों से पैदा होता है। जब ट्रकों के माध्यम से लंबी दूरी तक प्याज भेजा जाता है, तो रास्ते में अत्यधिक गर्मी, नमी और ट्रैफिक की वजह से लगभग 10 से 15 प्रतिशत फसल रास्ते में ही खराब हो जाती है। इसके अलावा डीजल के महंगे भाड़े का सीधा भार खुदरा उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है। ‘कांदा एक्सप्रेस’ इसी सप्लाई चेन की खामी को पाटने का एक तकनीकी और सुनियोजित प्रयास है।
मूल समस्या: “प्याज़ के बाजार में उतार-चढ़ाव केवल खेत की पैदावार पर निर्भर नहीं करता; बल्कि कटाई के बाद के नुकसान (Post-Harvest Losses), कोल्ड-चेन नेटवर्क की अनुपलब्धता और थोक मंडियों में पारदर्शी लॉजिस्टिक्स की कमी इस संकट को हर साल दोहराती है।”
कांदा एक्सप्रेस और सरकारी सप्लाई मॉडल से संबंधित मुख्य बिंदु:
- एक 42-वैगन वाली ‘कांदा एक्सप्रेस’ रेक एक बार में लगभग 800 से 1,600 मीट्रिक टन प्याज ढोने में सक्षम है, जो करीब 60 से 70 ट्रकों की क्षमता के बराबर है।
- सरकार ने 2 लाख मीट्रिक टन रबी प्याज़ की खरीद का लक्ष्य रखा था, जिसमें से 1.21 लाख मीट्रिक टन से अधिक प्याज बफर स्टॉक के रूप में सुरक्षित किया जा चुका है।
- लासलगांव और पिंपलगांव APMC में कांदा एक्सप्रेस की घोषणा के बाद थोक दरों में ₹150 से ₹250 प्रति क्विंटल की नरमी दर्ज की गई है।
- सड़क परिवहन (ट्रक) की तुलना में रेलवे से प्याज़ भेजने पर प्रति टन ढुलाई लागत में 30% तक की कमी आती है और ट्रांजिट समय 40 घंटे तक घट जाता है।
- रेल से प्रमुख उपभोग केंद्रों के बड़े हब तक प्याज पहुंचाया जा रहा है, जहाँ से स्थानीय वितरण के लिए 90 से अधिक मोबाइल वैन और छोटे वाहनों का उपयोग हो रहा है।
विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की राय: क्या यह कदम पर्याप्त है?
निधि खरे (सचिव, केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग):
कांदा एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों में बफर स्टॉक को तेजी से रिलीज किया जा रहा है। ₹35 प्रति किलो पर प्याज़ की बिक्री से उपभोक्ताओं को सीधा विकल्प मिलेगा और सट्टेबाजी व जमाखोरी पर प्रभावी रोक लगेगी।
डॉ. अशोक गुलाटी (प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री):
ट्रेन से बफर स्टॉक भेजना एक अच्छा आपातकालीन कदम है, लेकिन यह एक ‘फायर-फाइटिंग’ रणनीति है। जब तक देश में मॉडर्न वेंटिलेटेड साइलो और विकिरण आधारित (Gamma Irradiation) स्टोरेज तकनीक का विस्तार नहीं होगा, तब तक हर साल 25% प्याज नमी से गलता रहेगा।
प्रो. राकेश अर्रावतिया (डीन, इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद – IRMA):
त्योहारी सीजन और शादियों के समय प्याज की मांग में अचानक तेज़ी आती है। ऐसे समय में थोक मंडियों में स्टॉक उतारने से सट्टेबाजों की मुनाफाखोरी टूटती है और बाज़ार में लिक्विडिटी बनी रहती है।
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प्याज़ की मौसमी महंगाई के 5 जमीनी कारण
1. रबी और खरीफ के बीच का सप्लाई गैप (Transition Period)
देश में लगभग 65% प्याज़ उत्पादन रबी सीजन (मार्च-मई) में होता है। अगस्त से अक्टूबर के बीच रबी का पुराना स्टॉक घटने लगता है और खरीफ की नई फसल नवंबर से पहले बड़े पैमाने पर नहीं आती। इसी मौसमी अंतर के दौरान बाजार में कमी पैदा होती है।
2. कटाई के बाद होने वाला भारी नुकसान (Post-Harvest Loss)
वैज्ञानिक कोल्ड-चेन नेटवर्क के अभाव में किसान प्याज़ को पारंपरिक लकड़ी की ‘चाली’ में रखते हैं। उच्च तापमान और मानसूनी नमी के कारण लगभग 30% प्याज सड़ जाता है या उसका वजन घट जाता है।
3. सड़क मार्ग की ढुलाई में देरी और टूट-फूट
ट्रकों से नासिक से दिल्ली या गुवाहाटी तक प्याज़ पहुंचने में 4 से 6 दिन का समय लगता है। इस दौरान गर्मी और बारिश से माल खराब होता है और महंगा डीजल भाड़ा अंतिम खुदरा कीमत को और बढ़ा देता है।
4. मंडी स्तर पर कार्टेलाइजेशन और होर्डिंग
सीमित बड़े आढ़ती और थोक व्यापारी सीजन के दौरान सस्ते में प्याज़ खरीदकर निजी गोदामों में रोक लेते हैं। जैसे ही आवक गिरती है, कृत्रिम कमी बनाकर खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ा दी जाती हैं।
5. प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की कमी
भारत में कुल प्याज़ का 2% से भी कम हिस्सा डिहाइड्रेशन (पाउडर/फ्लेक्स) या प्रोसेसिंग के लिए उपयोग होता है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह दर काफी अधिक है। सरप्लस के समय प्रोसेसिंग न होने से बाद में कमी झेलनी पड़ती है।
महंगाई, जमाखोरी और लाचारी के बीच उम्मीद की नई किरण: जानिए कैसे मिटेगा आर्थिक व सामाजिक संकट?
आज एक तरफ आम जनता बढ़ती महंगाई, खाद्य संकट और रसोई के खर्चों से त्रस्त है, तो दूसरी तरफ अन्नदाता किसान कर्ज और नुकसान के बोझ तले दबा हुआ है। सरकार की तमाम योजनाएं और तात्कालिक राहत के प्रयास भी गरीबी, भुखमरी और कालाबाजारी को पूरी तरह रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। ऐसे संकट के दौर में हरियाणा की पावन भूमि से संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सानिध्य में एक अभूतपूर्व सामाजिक और आध्यात्मिक क्रांति चल रही है, जो समाज को आर्थिक, मानसिक और आत्मिक रूप से सुदृढ़ कर रही है।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में चल रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत बिना किसी भेदभाव के लाखों जरूरतमंदों तक भोजन और मूलभूत आवश्यकताएं पहुंचाई जा रही हैं, ताकि कोई भी परिवार भुखमरी का शिकार न हो। इसके साथ ही ‘किसान-मज़दूर बचाओ अभियान’ के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल व निःशुल्क सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग वचनों और ज्ञान से समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, जमाखोरी, नशा और मिलावटखोरी जैसी कुरीतियों का समूल नाश हो रहा है। जब समाज में ईमानदारी, दया और सेवा का भाव जागेगा, तभी सच्चे अर्थों में देश खुशहाल बनेगा और भारत पुनः ‘सोने की चिड़िया’ व ‘विश्वगुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित होगा। इस दिव्य व्यवस्था और सतयुगी समाज की नींव को गहराई से समझने के लिए देखें हमारी विशेष वीडियो “कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग-7” Factful Debates YouTube चैनल पर।
कांदा एक्सप्रेस और सरकारी सप्लाई मॉडल से संबंधित प्रश्न:
प्रश्न 1: ‘कांदा एक्सप्रेस’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से सरकारी बफर स्टॉक का प्याज तेज गति, कम लागत और न्यूनतम खराबी के साथ उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के उपभोक्ता राज्यों तक पहुंचाना है।
प्रश्न 2: ट्रकों की तुलना में ट्रेन से प्याज़ ढुलाई के क्या फायदे हैं?
उत्तर: ट्रेन से ढुलाई करने पर प्रति किलो ट्रांसपोर्ट लागत लगभग 30% तक कम होती है, यात्रा का समय घटता है, ट्रांजिट डैमेज कम होता है और एक साथ हजारों टन माल मंडियों तक पहुंचाया जा सकता है।
प्रश्न 3: प्याज़ का बफर स्टॉक क्या है और इसका प्रबंधन कौन करता है?
उत्तर: भारत सरकार के उपभोक्ता मामले मंत्रालय के तहत NAFED और NCCF द्वारा किसानों से पीक सीजन में लगभग 3 से 5 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदकर बफर स्टॉक में रखा जाता है, ताकि कमी के समय कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
प्रश्न 4: खुदरा कीमतों पर कांदा एक्सप्रेस का प्रभाव कब तक दिखता है?
उत्तर: ट्रेन के माध्यम से थोक मंडियों में प्याज़ की आवक बढ़ने के 48 से 72 घंटों के भीतर थोक दरों में नरमी आती है, जिसके बाद स्थानीय रिटेल बाजारों में कीमतें संतुलित होने लगती हैं।
प्रश्न 5: संत रामपाल जी महाराज जी के अभियानों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: संत रामपाल जी महाराज जी के ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ और ‘किसान-मज़दूर बचाओ अभियान’ का उद्देश्य समाज से जमाखोरी, कालाबाजारी, भुखमरी और लाचारी को समाप्त कर हर ज़रूरतमंद तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना और किसानों को सशक्त बनाकर एक आदर्श समाज का निर्माण करना है।

