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Home » ​मानसून का आगमन: मौसम विभाग ने दी चेतावनी, अगले 72 घंटों में इन राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश

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​मानसून का आगमन: मौसम विभाग ने दी चेतावनी, अगले 72 घंटों में इन राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश

SA News
Last updated: June 3, 2026 11:41 am
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​मानसून का आगमन: मौसम विभाग ने दी चेतावनी, अगले 72 घंटों में इन राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश
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भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से परेशान देशवासियों के लिए मौसम के मोर्चे से एक साथ दो बड़ी खबरें आई हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून भारतीय तटों तक पहुँच गया है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इस राहत के साथ ही आफत की आशंका भी बढ़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सैटेलाइट डेटा और चक्रवाती हवाओं के दबाव को देखते हुए अगले 72 घंटों के भीतर देश के 7-8 राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और लोगों से एहतियात बरतने की अपील की है।

Contents
    • ​News Highlights
  • ​बादलों की घेराबंदी: अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा
  • ​इन राज्यों में जारी हुआ रेड और ऑरेंज अलर्ट
  • ​प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा गाइडलाइन
  • प्राकृतिक आपदाओं के बीच आध्यात्मिक चेतना की आवश्यकता
    • ​FAQs

​News Highlights

  • ​मानसून की एंट्री: केरल और पूर्वोत्तर भारत के रास्ते दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश में आधिकारिक दस्तक दे दी है।
  • ​72 घंटे का अलर्ट: मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक तटीय इलाकों और पूर्वोत्तर में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी है।
  • ​रेड और ऑरेंज अलर्ट: केरल, असम, मेघालय और कर्नाटक के तटीय जिलों के लिए प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी किया है।
  • ​यातायात और सुरक्षा: निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (landslides) की आशंका के चलते एनडीआरएफ को तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।

​बादलों की घेराबंदी: अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा

​भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि देश के दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों पर मानसून के बादलों ने पूरी तरह से डेरा डाल लिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अरब सागर के ऊपर बने एक मजबूत कम दबाव के क्षेत्र (low-pressure area) के कारण मानसूनी हवाएं बेहद तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर अगले 72 घंटों के दौरान देश के तटीय और पहाड़ी राज्यों में देखने को मिलेगा।

​मौसम विभाग द्वारा जारी की गई सैटेलाइट तस्वीर में बादलों की स्थिति को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है:

image

जैसा कि सैटेलाइट तस्वीर में दिखाई दे रहा है, बादलों का एक बड़ा हिस्सा (घना सफेद क्षेत्र) पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिणी प्रायद्वीप (Southern Peninsula) को कवर कर चुका है। इसी चक्रवाती परिसंचरण के कारण इन क्षेत्रों में भारी नमी आ रही है, जो मूसलाधार बारिश की मुख्य वजह बन रही है।

​इन राज्यों में जारी हुआ रेड और ऑरेंज अलर्ट

​मौसम विभाग ने बारिश की तीव्रता को देखते हुए राज्यों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:

  1. ​केरल और तटीय कर्नाटक: यहाँ अगले 48 से 72 घंटों में कुछ स्थानों पर 20 सेंटीमीटर (200mm) से अधिक बारिश होने का अनुमान है। इन राज्यों के कई जिलों में ‘रेड अलर्ट’ लागू कर दिया गया है। स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी और मछुआरों के लिए समंदर में जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
  2. ​असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश: उत्तर-पूर्वी राज्यों में मानसून की शुरुआत हमेशा आक्रामक होती है। यहाँ पहाड़ियों पर लगातार होने वाली बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। असम के निचले जिलों में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है।
  3. ​महाराष्ट्र (कोंकण और मुंबई) और गोवा: कोंकण क्षेत्र और गोवा में प्री-मानसूनी (Pre-Monsoon) और शुरुआती मानसूनी हवाओं के कारण भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ है। मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में भी गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की उम्मीद है।

​प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा गाइडलाइन

​भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रभावित राज्यों के आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ बैठक की है। पहाड़ी इलाकों जैसे वायनाड (केरल) और असम के पहाड़ी जिलों में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) और भूस्खलन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पर्यटकों को अगले 3 दिनों तक इन राज्यों के पहाड़ी तथा नदी तटीय क्षेत्रों की यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

​शहरी इलाकों में नगर निगमों को जलभराव और सीवेज सिस्टम को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ट्रैफिक व्यवस्था ठप न हो। मौसम विभाग का कहना है कि यह बारिश शुरुआती तौर पर तेज रहेगी, लेकिन इसके बाद मानसून सामान्य गति से मध्य और उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा।

प्राकृतिक आपदाओं के बीच आध्यात्मिक चेतना की आवश्यकता

​जहाँ एक ओर मौसम का यह बदला मिजाज और प्राकृतिक आपदाएं इंसानी तकनीक और प्रबंधन की सीमाओं को चुनौती देती हैं, वहीं दूसरी ओर संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि इस संसार में आने वाले संकट, प्राकृतिक प्रकोप और महामारी विधि का विधान है। लेकिन जब इंसान शास्त्रों के अनुकूल पूर्ण परमात्मा (कविर्देव) की सच्ची भक्ति करता है, तो उसे न केवल आत्मिक शांति मिलती है बल्कि हर प्रकार के प्राकृतिक और शारीरिक संकटों से भी सुरक्षा प्राप्त होती है। प्रकृति के इन उतार-चढ़ाव के बीच मनुष्य को सांसारिक विकारों से दूर रहकर कबीर परमेश्वर की भक्ति की ओर कदम बढ़ाना चाहिए, जिससे हर परिस्थिति में जीवन सुरक्षित रहता है।

​FAQs

​1.क्या पूरे भारत में मानसून आ गया है?

उत्तर – नहीं, अभी मानसून ने केवल केरल, कर्नाटक के तटीय हिस्सों और पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय आदि) में दस्तक दी है। मानसून की प्रगति हर वर्ष मौसमीय परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। नवीनतम जानकारी के लिए IMD के आधिकारिक बुलेटिन देखें। 

2.​रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट का क्या मतलब होता है?

  • ​येलो अलर्ट (Yellow Alert): मौसम खराब हो सकता है, नजर रखें।
  • ​ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert): मौसम काफी खराब होने की संभावना है, सावधान और तैयार रहें।
  • ​रेड अलर्ट (Red Alert): बेहद खतरनाक स्थिति, भारी नुकसान की आशंका, तुरंत सुरक्षित कदम उठाएं।

​3.अगले 72 घंटों में आम जनता को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

यदि आप अलर्ट वाले राज्यों में हैं, तो जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचें, बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे गाड़ी न खड़ी करें, और पहाड़ी रास्तों पर यात्रा टाल दें। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर अपने पास रखें।

​4.क्या इस भारी बारिश से उड़ानों और ट्रेनों पर भी असर पड़ेगा?

हाँ, अत्यधिक भारी बारिश और कम दृश्यता (low visibility) के कारण केरल (कोच्चि, तिरुवनंतपुरम) और पूर्वोत्तर के कुछ हवाई अड्डों पर प्रतिकूल मौसम की स्थिति में उड़ानों और रेल सेवाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। रेलवे ने भी पटरियों पर पानी भरने की स्थिति पर नजर रखने के लिए पेट्रोलिंग टीम तैनात की है।

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