नहीं, जरूरी नहीं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल उसके बुनियादी ढांचे पर दोबारा हमला करते हैं, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है। इससे खाड़ी देशों में इंटरनेट की गति, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और क्लाउड सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। लेकिन पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाना इसकी तय परिणति नहीं है।
- ईरान इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की बात क्यों कर रहा है?
- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबलें कैसे काम करती हैं?
- होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
- इंटरनेट केबल कटने पर किन सेवाओं पर असर पड़ सकता है?
- क्या भारत के इंटरनेट पर भी असर पड़ सकता है?
- समुद्री केबलों की मरम्मत में देरी क्यों हो सकती है?
- निष्कर्ष: सबसे बड़ा खतरा खाड़ी क्षेत्र की डिजिटल कनेक्टिविटी को
समुद्र के नीचे बिछी ये केबलें देशों को इंटरनेट से जोड़ने का काम करती हैं। इनके जरिए वेबसाइटों का डेटा, वीडियो कॉल और कंपनियों की डिजिटल जानकारी एक देश से दूसरे देश तक पहुंचती है।
23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि संभावित संघर्ष की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र की समुद्री संचार केबलों को निशाना बनाने की योजना तैयार की गई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े अधिकारी यदोल्लाह जवानी ने भी होर्मुज के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों का उल्लेख किया था।
फिलहाल यह एक संभावित कार्रवाई से जुड़ी चेतावनी है, सभी केबलों के कट जाने की पुष्टि नहीं।
ईरान इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की बात क्यों कर रहा है?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने पर दोनों पक्षों के लिए सैन्य ठिकानों के साथ-साथ जरूरी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी अहम हो जाती है।
ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर उसके बुनियादी ढांचे पर हमला होता है, तो जवाबी कार्रवाई में समुद्र के नीचे की इंटरनेट केबलें भी निशाने पर आ सकती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की चिंता केवल केबलों को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है। मरम्मत के काम में रुकावट डालने की संभावना भी जताई गई है।
ऐसा होने पर समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। केबल टूटने के बाद उसे ठीक करने के लिए खास जहाज, प्रशिक्षित कर्मचारी और समुद्र में काम करने वाले उपकरण चाहिए होते हैं। यदि क्षेत्र में युद्ध या सुरक्षा संबंधी पाबंदियां हों, तो मरम्मत में देरी हो सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अधिकारियों की चेतावनी और वास्तव में हमला होने के बीच अंतर है। आगे क्या होगा, यह क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगा।
समुद्र के नीचे इंटरनेट केबलें कैसे काम करती हैं?
इंटरनेट को हम अक्सर मोबाइल फोन, वाई-फाई या टावरों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन देशों के बीच डेटा पहुंचाने का बड़ा काम समुद्र के नीचे बिछी केबलें करती हैं।
इन केबलों के अंदर बहुत पतले कांच जैसे फाइबर होते हैं। इनके जरिए प्रकाश संकेतों के रूप में डेटा एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता है। जब आप किसी विदेशी वेबसाइट को खोलते हैं या दूसरे देश में बैठे व्यक्ति से वीडियो कॉल करते हैं, तो आपका डेटा कई नेटवर्कों से होकर गुजर सकता है। इनमें समुद्री केबलें भी शामिल हो सकती हैं।
इनका इस्तेमाल कई जरूरी कामों में होता है:
- वेबसाइटों और ऐप्स को चलाने में
- ऑनलाइन बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय भुगतान में
- वीडियो कॉल और डिजिटल संचार में
- क्लाउड सेवाओं और डेटा केंद्रों को जोड़ने में
- कंपनियों के बीच बड़ी मात्रा में डेटा भेजने में
अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के अनुसार, समुद्र के नीचे की केबलें दुनिया के लगभग 99% अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक को संभालती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एक समुद्री क्षेत्र में केबलें कटने से दुनिया का 99% इंटरनेट बंद हो जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
लेकिन इसकी अहमियत सिर्फ ऊर्जा व्यापार तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र से गुजरने वाली समुद्री इंटरनेट केबलें खाड़ी देशों को अंतरराष्ट्रीय डिजिटल नेटवर्क से जोड़ती हैं।
संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में इन केबलों की भूमिका है। कुछ केबल सिस्टम भारत और एशिया के अन्य हिस्सों को भी खाड़ी तथा यूरोप से जोड़ते हैं।
अंतरराष्ट्रीय केबल सुरक्षा समिति (ICPC) के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली क्षमता दुनिया की कुल अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ के 1% से कम है। इसलिए इस क्षेत्र में केबलों को नुकसान पहुंचने का सबसे सीधा असर खाड़ी देशों और उनसे जुड़े नेटवर्कों पर पड़ने की आशंका है।
इंटरनेट केबल कटने पर किन सेवाओं पर असर पड़ सकता है?
अगर एक या दो केबल क्षतिग्रस्त होती हैं, तो नेटवर्क कंपनियां कई बार डेटा को दूसरे रास्तों से भेज सकती हैं। लेकिन अगर कई प्रमुख केबलें एक साथ प्रभावित होती हैं, तो वैकल्पिक रास्तों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसका असर अलग-अलग सेवाओं पर अलग तरीके से दिखाई दे सकता है।
इंटरनेट की गति: कुछ देशों या शहरों में वेबसाइटें धीरे खुल सकती हैं। वीडियो चलाने और बड़ी फाइलें डाउनलोड करने में भी परेशानी हो सकती है।
ऑनलाइन बैंकिंग: कुछ अंतरराष्ट्रीय लेनदेन और डिजिटल सेवाओं में देरी हो सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि सभी बैंक या सभी भुगतान सेवाएं बंद हो जाएंगी।
क्लाउड और कारोबारी सेवाएं: जिन कंपनियों का डेटा दूसरे देशों में मौजूद सर्वरों पर निर्भर करता है, उन्हें डेटा तक पहुंचने में दिक्कत हो सकती है।
वीडियो कॉल और ऑनलाइन काम: अंतरराष्ट्रीय बैठकों, दूर से काम करने और ऑनलाइन संचार में रुकावट या देरी हो सकती है।
इनमें से कौन-सी सेवा कितनी प्रभावित होगी, इसका पहले से निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी केबलें खराब होती हैं और दूसरे नेटवर्क कितना अतिरिक्त डेटा संभाल सकते हैं।
क्या भारत के इंटरनेट पर भी असर पड़ सकता है?
भारत का अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क भी समुद्र के नीचे बिछी केबलों से जुड़ा है। कुछ केबल सिस्टम भारत को पश्चिम एशिया, यूरोप और दूसरे क्षेत्रों से जोड़ते हैं। इसलिए खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक संचार बाधित रहने पर भारत से जुड़े कुछ अंतरराष्ट्रीय डेटा मार्गों पर भी असर पड़ने की संभावना हो सकती है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत का इंटरनेट बंद हो जाएगा। भारत के पास कई अंतरराष्ट्रीय केबल कनेक्शन और दूसरे रास्ते हैं। नेटवर्क ऑपरेटर उपलब्ध विकल्पों के जरिए डेटा भेजने की कोशिश कर सकते हैं।
आम उपयोगकर्ता पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी केबल प्रभावित हुई है, संबंधित इंटरनेट कंपनी के पास कितने वैकल्पिक मार्ग हैं और व्यवधान कितनी देर तक रहता है।
फिलहाल भारत में इंटरनेट बंद होने या देशव्यापी डिजिटल सेवाओं के ठप पड़ने का कोई निश्चित निष्कर्ष इस चेतावनी से नहीं निकाला जा सकता।
समुद्री केबलों की मरम्मत में देरी क्यों हो सकती है?
समुद्र के नीचे टूटी केबल को ठीक करना मोबाइल टावर की मरम्मत जैसा आसान काम नहीं है। इसके लिए विशेष जहाजों और तकनीकी उपकरणों की जरूरत पड़ती है। पहले खराबी की जगह का पता लगाया जाता है, फिर मरम्मत दल समुद्र में उस हिस्से तक पहुंचता है।
युद्ध या तनाव के दौरान यह काम और मुश्किल हो सकता है। जहाजों को सुरक्षा संबंधी अनुमति न मिलना, समुद्री क्षेत्र में खतरा और बीमा लागत बढ़ना मरम्मत को धीमा कर सकते हैं।
यदि एक से अधिक केबलें टूटती हैं, तो मरम्मत के लिए उपलब्ध जहाजों और कर्मचारियों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से किसी बड़े व्यवधान का असर केबल ठीक होने तक जारी रह सकता है।
निष्कर्ष: सबसे बड़ा खतरा खाड़ी क्षेत्र की डिजिटल कनेक्टिविटी को
ईरान की चेतावनी दिखाती है कि आधुनिक संघर्षों में इंटरनेट और डिजिटल बुनियादी ढांचा भी रणनीतिक महत्व रखता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री केबलों को नुकसान पहुंचने से खाड़ी देशों में इंटरनेट, बैंकिंग, क्लाउड सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर असर पड़ सकता है।
फिर भी, इसे पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद होने की निश्चित चेतावनी मानना सही नहीं होगा। वैश्विक इंटरनेट कई समुद्री और स्थलीय नेटवर्कों से जुड़ा है, जो कुछ व्यवधानों के दौरान डेटा को दूसरे रास्तों से भेजने में मदद कर सकते हैं।
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या चेतावनी के बाद वास्तव में कोई हमला होता है, कितनी केबलें प्रभावित होती हैं और मरम्मत कितनी जल्दी हो पाती है। फिलहाल खतरा संभावित है, लेकिन क्षेत्रीय डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से इसे गंभीरता से देखा जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. ईरान ने इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की चेतावनी क्यों दी?
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि यदि अमेरिका और इजरायल ईरान के बुनियादी ढांचे पर दोबारा हमला करते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री इंटरनेट केबलें भी निशाने पर आ सकती हैं।
2. क्या होर्मुज की केबलें कटने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा?
नहीं, इसकी संभावना को निश्चित नहीं माना जा सकता। वैकल्पिक समुद्री और स्थलीय नेटवर्क कई क्षेत्रों में डेटा भेजने में मदद कर सकते हैं। सबसे सीधा खतरा खाड़ी क्षेत्र की कनेक्टिविटी को है।
3. समुद्र के नीचे की इंटरनेट केबलें किस काम आती हैं?
ये केबलें देशों के बीच डेटा पहुंचाती हैं और वेबसाइटों, वीडियो कॉल, ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड सेवाओं तथा अंतरराष्ट्रीय डिजिटल संचार को चलाने में मदद करती हैं।
4. क्या भारत में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं?
लंबे समय तक व्यवधान रहने पर भारत से जुड़े कुछ अंतरराष्ट्रीय डेटा मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन इससे पूरे भारत का इंटरनेट बंद हो जाएगा, ऐसा कहने का आधार नहीं है।
5. समुद्री इंटरनेट केबलों की मरम्मत में कितना समय लगता है?
इसका कोई एक तय समय नहीं है। खराबी की जगह, नुकसान की गंभीरता, मौसम, जहाजों की उपलब्धता और सुरक्षा स्थिति के आधार पर मरम्मत में लगने वाला समय बदल सकता है।

