भारत में कॉलेज या विश्वविद्यालय चुनते समय केवल यह देखना काफी नहीं होता कि वहां कौन-सा कोर्स उपलब्ध है। पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षक, रिसर्च, प्लेसमेंट, सुविधाएं और संस्थान की समग्र स्थिति भी निर्णय को प्रभावित करती है। इसी वजह से देश की उच्च शिक्षा संस्थाओं की रैंकिंग विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए उपयोगी संदर्भ बन गई है।
- NIRF Ranking क्या है?
- कितने संस्थानों ने हिस्सा लिया?
- रैंकिंग किन आधारों पर तैयार होती है?
- 1. Teaching, Learning and Resources – 30%
- 2. Research and Professional Practice – 30%
- 3. Graduation Outcome – 20%
- 4. Outreach and Inclusivity – 10%
- 5. Perception – 10%
- Faculty और research की तस्वीर क्या बताती है?
- 2025 की रैंकिंग में क्या बदला?
- विद्यार्थियों के लिए यह ranking कितनी उपयोगी है?
- निष्कर्ष
- FAQs: India Rankings 2025
शिक्षा मंत्रालय ने 4 सितंबर 2025 को India Rankings 2025 का दसवां संस्करण जारी किया। इस साल की रैंकिंग में भागीदारी के आंकड़ों के साथ-साथ कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिले। वर्ष 2016 में जहां 3,565 संस्थानों ने रैंकिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, वहीं 2025 में अलग-अलग कैटेगरी और विषयों के लिए कुल 14,163 आवेदन प्राप्त हुए।
यह बदलाव सिर्फ संख्या बढ़ने की कहानी नहीं है। इससे यह भी पता चलता है कि ज्यादा से ज्यादा उच्च शिक्षा संस्थान अब अपनी teaching, research, innovation और दूसरे क्षेत्रों में प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।
NIRF Ranking क्या है?
NIRF यानी National Institutional Ranking Framework की शुरुआत 29 सितंबर 2015 को हुई थी। इसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षा संस्थानों का तय मानकों के आधार पर मूल्यांकन करना है।
समय के साथ इस framework में कई बदलाव किए गए हैं। 2025 की रैंकिंग में कुल 17 कैटेगरी और विषय-क्षेत्र शामिल हैं। इनमें 9 प्रमुख कैटेगरी और 8 subject areas हैं।
9 प्रमुख कैटेगरी
- Overall
- Universities
- Colleges
- Research Institutions
- Innovation
- State Public Universities
- Open Universities
- Skill Universities
- Sustainable Development Goals (SDGs)
8 विषय-क्षेत्र
- Engineering
- Management
- Pharmacy
- Architecture and Planning
- Law
- Medical
- Dental
- Agriculture and Allied Sectors
इस साल की खास बात SDGs को एक नई कैटेगरी के रूप में शामिल किया जाना है। इसका मतलब है कि संस्थानों के प्रदर्शन को अब केवल classroom teaching या research तक सीमित नजरिए से नहीं देखा जा रहा। सतत विकास और सामाजिक प्रभाव से जुड़े कामों को भी रैंकिंग में जगह मिली है।
कितने संस्थानों ने हिस्सा लिया?
India Rankings 2025 में 7,692 unique institutions ने भाग लिया। अलग-अलग कैटेगरी और विषयों में कुल 14,163 applications प्राप्त हुए।
कैटेगरी और विषय के हिसाब से भागीदारी इस प्रकार रही:
| कैटेगरी/विषय | भाग लेने वाले संस्थान |
| Overall | 4,045 |
| Colleges | 4,030 |
| Engineering | 1,584 |
| Management | 1,026 |
| Innovation | 777 |
| SDGs | 791 |
| Pharmacy | 594 |
| Universities | 506 |
| Research Institutions | 273 |
| Law | 267 |
| Medical | 223 |
| Dental | 223 |
| Agriculture and Allied Sectors | 173 |
| Architecture and Planning | 131 |
| Open Universities | 15 |
| Skill Universities | 11 |
Overall और Colleges में सबसे ज्यादा applications आए। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि देश में इन श्रेणियों के संस्थानों की संख्या काफी बड़ी है।
रैंकिंग किन आधारों पर तैयार होती है?
किसी संस्थान की ranking केवल उसकी प्रसिद्धि के आधार पर तय नहीं होती। इसके लिए अलग-अलग तरह के academic और institutional data को देखा जाता है। रैंकिंग प्रक्रिया में संस्थानों से प्राप्त जानकारी के अलावा Scopus, Web of Science और Derwent Innovation जैसे third-party sources का भी इस्तेमाल किया जाता है।
इसके लिए पांच प्रमुख parameters रखे गए हैं।
1. Teaching, Learning and Resources – 30%
इस हिस्से में teaching resources और academic environment को देखा जाता है। Faculty strength, student-faculty ratio, PhD वाले teachers, financial resources और learning facilities जैसे factors इसमें शामिल होते हैं।
2. Research and Professional Practice – 30%
Research को भी 30 प्रतिशत weightage दिया गया है। इसमें research publications, citations, patents और research projects जैसे indicators देखे जाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार Overall Ranking में research और professional practice का मजबूत संबंध दिखाई देता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि किसी संस्थान की research capacity उसकी overall position में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
3. Graduation Outcome – 20%
यह parameter बताता है कि संस्थान से पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थियों का outcome कैसा रहा। इसमें graduation completion, placement, higher education, PhD students और average salary जैसे indicators शामिल हैं।
4. Outreach and Inclusivity – 10%
उच्च शिक्षा केवल campus तक सीमित नहीं है। इस parameter में regional diversity, महिला विद्यार्थियों की भागीदारी, आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को देखा जाता है।
5. Perception – 10%
किसी संस्थान की academic और professional image भी ranking का हिस्सा है। इसके लिए academics, teachers और employers के बीच संस्थान की perception को देखा जाता है।
Faculty और research की तस्वीर क्या बताती है?
Ranking में शामिल data से यह भी पता चलता है कि teaching और research के बीच कितना मजबूत संबंध है।
Overall category में कुल 3,46,671 faculty members के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें:
- 2,03,015 PhD holders — 58.56%
- 1,43,656 Master’s degree holders — 41.44%
Top 100 institutions में PhD-qualified faculty की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक रही। इससे यह संकेत मिलता है कि highly qualified faculty और research capability संस्थानों के academic performance में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Research के मामले में भी top institutions का योगदान काफी बड़ा रहा। वर्ष 2021 से 2023 के बीच Overall category में 6,11,693 research publications दर्ज किए गए। इनमें top 100 institutions का योगदान 3,45,990 publications यानी 56.56% रहा।
यह आंकड़ा एक दूसरी तस्वीर भी सामने लाता है। भारत में research activity बढ़ रही है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा अभी भी कुछ प्रमुख institutions में concentrated है। दूसरे संस्थानों के लिए research infrastructure, funding और skilled faculty को मजबूत करना आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती रहेगी।
2025 की रैंकिंग में क्या बदला?
इस साल framework में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
पहला, SDGs को नई category के रूप में जोड़ा गया है।
दूसरा, Overall, Engineering, Universities और Research Institutions में retracted publications को ध्यान में रखते हुए negative marking की व्यवस्था की गई है।
तीसरा, institution-level data में self-citations को हटाने की प्रक्रिया जारी रखी गई है।
इन बदलावों का उद्देश्य ranking को research quality और institutional performance की वास्तविक तस्वीर के करीब लाना है।
विद्यार्थियों के लिए यह ranking कितनी उपयोगी है?
किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय की ranking देखकर shortlist बनाना आसान हो सकता है, लेकिन admission का फैसला केवल ranking देखकर नहीं लेना चाहिए।
मान लीजिए किसी institution की overall ranking अच्छी है, लेकिन आपका पसंदीदा course वहां मजबूत नहीं है। ऐसी स्थिति में केवल overall rank आपके लिए ज्यादा मायने नहीं रखेगी।
Admission से पहले इन चीजों को भी देखना चाहिए:
- संबंधित course की मान्यता
- फीस और scholarship
- placement record
- faculty
- campus और hostel facilities
- internships और research opportunities
- विद्यार्थियों का अनुभव और feedback
इस तरह ranking को एक starting point की तरह इस्तेमाल करना बेहतर है, final decision का अकेला आधार बनाना नहीं।
निष्कर्ष
India Rankings 2025 की तस्वीर से भारतीय higher education system में हो रहे विस्तार और बदलाव दोनों दिखाई देते हैं। 7,692 unique institutions और 14,163 applications की भागीदारी बताती है कि national ranking process में संस्थानों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
इस साल SDGs को शामिल करना भी एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे ranking का दायरा teaching और research से आगे बढ़कर sustainability और social impact तक पहुंचता है।
वहीं research publications में top institutions की बड़ी हिस्सेदारी यह सवाल भी सामने रखती है कि देश के बाकी higher education institutions में research ecosystem को कैसे मजबूत किया जाए।
विद्यार्थियों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि ranking को जानकारी के एक उपयोगी स्रोत की तरह देखें। किसी institution को चुनते समय course, faculty, fees, placement और campus facilities को साथ में देखना ज्यादा समझदारी होगी।
शिक्षा से आध्यात्मिक ज्ञान तक: सही ज्ञान की भूमिका
India Rankings 2025 से स्पष्ट होता है कि किसी संस्थान की गुणवत्ता केवल उसकी प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध, शिक्षक, संसाधन और विद्यार्थियों के परिणामों जैसे विभिन्न मानकों से समझी जाती है। इसी प्रकार आध्यात्मिक जीवन में भी केवल किसी परंपरा या मान्यता को मान लेना पर्याप्त नहीं है; सही आध्यात्मिक ज्ञान और शास्त्रसम्मत भक्ति को समझना आवश्यक है।
जैसे विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए बेहतर संस्थान और सही पाठ्यक्रम का चुनाव करता है, वैसे ही आत्मिक उन्नति के लिए भी सही ज्ञान और साधना का चयन जरूरी है। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान में शास्त्रसम्मत भक्ति और सही आध्यात्मिक ज्ञान को महत्वपूर्ण बताया गया है। उनके आध्यात्मिक ज्ञान और मानव सेवा कार्यों के बारे में जानने के लिए संत रामपाल जी महाराज यूट्यूब चैनल देखें।
FAQs: India Rankings 2025
India Rankings 2025 कब जारी हुई?
India Rankings 2025 को शिक्षा मंत्रालय ने 4 सितंबर 2025 को जारी किया।
India Rankings 2025 में कितनी categories हैं?
2025 की ranking में कुल 17 categories और subject areas शामिल हैं, जिनमें 9 categories और 8 subject areas हैं।
NIRF Ranking में सबसे ज्यादा weightage किसे दिया गया है?
Teaching, Learning and Resources तथा Research and Professional Practice दोनों को 30-30 प्रतिशत weightage दिया गया है।
क्या SDGs को पहली बार शामिल किया गया है?
हां। India Rankings 2025 में Sustainable Development Goals यानी SDGs को नई category के रूप में शामिल किया गया है।
India Rankings 2025 में कितने applications मिले?
इस वर्ष अलग-अलग categories और subject areas के लिए कुल 14,163 applications प्राप्त हुए।
क्या केवल NIRF ranking देखकर कॉलेज चुनना चाहिए?
नहीं। Ranking के साथ course की quality, fees, placement, faculty, facilities और विद्यार्थियों के feedback को भी देखना चाहिए।

