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Home » दिवाली के बाद दिल्ली की हवाओं में ज़हर किसने घोला?

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दिवाली के बाद दिल्ली की हवाओं में ज़हर किसने घोला?

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Last updated: October 22, 2025 3:54 pm
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दिवाली के बाद दिल्ली की हवाओं में ज़हर किसने घोला
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सोमवार की अंधेरी रात थी, चारों ओर दीपों की रौशनी से दिल्ली जगमगा रही थी और सियाराम के अयोध्या लौटने का अहसास दिला रही थी। हर तरफ खुशी का माहौल था और पटाखों की गड़गड़ाहट से पूरा देश गूंज रहा था। लेकिन फिर अचानक दिल्ली की हवाओं में ज़हर किसने घोल दिया, जानेंगे इस लेख में?

Contents
  • Diwali AQI: दिवाली रात दिल्ली का AQI
  • कितना AQI होना खतरनाक है?
  • दिल्ली में दिवाली पटाखों का प्रदूषण
  • दिवाली की रात पटाखे जलाना कितना उचित है?
  • श्री राम जी को मनमाना आचरण बिल्कुल पसंद नहीं 
  • शस्त्र विधि अनुसार सद्भक्ति क्या है?

Diwali AQI: दिवाली रात दिल्ली का AQI

दिवाली में “ग्रीन पटाखों” जलाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिया था। इसके बाद दिवाली की रात 20 तारीख से ही दिल्ली का AQI बढ़ कर “रेड जोन” में चला गया। CPCB की रिपोर्ट के मुताबिक 21 अक्टूबर को सुबह 01:00 बजे आनंद विहार का AQI 361 दर्ज किया गया। “रेड जोन” में AQI वायु के खराब गुणवत्ता को दर्शाता है। दिल्ली के अलावा कई शहरों का AQI 300 से पार यानी रेड जोन रहा। 

आज सुबह 22 अक्टूबर को 01:00 बजे भी दिल्ली AQI में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। दिल्ली का AQI 348 रहा है। गुरुग्राम का AQI 425 रहा है। ग्रेटर नॉएडा AQI 242 दर्ज किया गया है, वहीं गाजियाबाद का AQI 317 दर्ज किया गया है। 

कितना AQI होना खतरनाक है?

नीचे दिए गए टेबल के मुताबिक समझते हैं कि कितना AQI होना ज्यादा खतरनाक है। 

AQIश्रेणीअसर
0-50अच्छाकोई प्रभाव नहीं 
51-100संतोषजनकसंवेदनशील लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है
101-200मध्यमजिन लोगों को फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग या अस्थमा है, सांस लेने में दिक्कत होती है
201-300खराबलंबे समय तक रहने पर सांस लेने में दिक्कत हो सकती हैं
301-400बहुत खराबलंबे समय तक रहने पर सांस संबंधित बीमारियां हो सकती हैं
401-500गंभीरस्वस्थ लोगों को सांस संबंधित बीमारियां हो सकती हैं और बीमार लोगों की स्थिति गंभीर हो सकती है

दिल्ली में दिवाली पटाखों का प्रदूषण

दिवाली की रात हर साल दिल्ली में पटाखों के धुंए से वायु प्रदूषित हो जाती है। स्थिति को देखते हुए दिल्ली में पटाखे बेचने और जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह कुछ शर्तों को ध्यान में रखते हुए ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी थी। 

चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह अनुमति दी थी। बेंच की तरफ से केवल ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति मिली थी। हालांकि बेंच ने पर्यावरण से कोई समझौता नहीं करने का निर्देश दिया था। 

यह अनुमति केवल 18 से 21 अक्टूबर तक मिली थी।‌ इस दौरान लोग सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे तक और रात 8:00 बजे से 10:00 बजे तक पटाखे जला सकते हैं। 

इन सारे नियमों के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ,‌ स्थिति और गंभीर हो गई।

दिवाली की रात पटाखे जलाना कितना उचित है?

देश और दुनिया भर में आतिशबाज़ी (पटाखे जलाना) का इतिहास बहुत पुराना है। लेकिन भारत में इसका प्रचलन मुगल काल से बढ़ा और धीरे धीरे त्योहारों में आतिशबाज़ी आम होने लगा। हालांकि पूर्व काल में त्योहारों में पटाखें जलाने कोई इतिहास नहीं मिलता है। 

कोई भी त्योहार भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा को जागृत करने का अवसर प्रदान करता है। लेकिन इन त्योहारों में आतिशबाज़ी करने का प्रमाण हमारे किसी सद्ग्रंथों में नहीं है, जिस कारण यह मनमाना आचरण है। दिवाली के दिन पटाखें जलाना एक मनमाना आचरण है जो व्यर्थ है।

श्री राम जी को मनमाना आचरण बिल्कुल पसंद नहीं 

त्रेतायुग में श्री राम जी श्री विष्णु जी के अवतार हुए थे और द्वापर युग में श्री कृष्ण जी श्री विष्णु जी के अवतार थे। महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण जी के शरीर में ब्रह्म प्रवेश करके पवित्र गीता जी का ज्ञान दिया था। पवित्र गीता जी अध्याय 16 के श्लोक 23 में श्री राम जी उर्फ श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि “जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धि को प्राप्त होता है, न परमगति को, न सुख को ही।”

शस्त्र विधि अनुसार सद्भक्ति क्या है?

पवित्र गीता जी अध्याय 16 के श्लोक 24 में  कहा है कि “इससे तेरे लिये कर्तव्य और अकर्तव्य की व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण है। इसे जानकर शास्त्र विधि से नियत कर्म ही करने योग्य है।” अर्थात कौनसा धार्मिक क्रिया करना चाहिए और कौनसा नहीं करना चाहिए, इसके लिए शास्त्र यानी धार्मिक ग्रंथ ही प्रमाण है। 

अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़िए पवित्र पुस्तक “हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण”।

 दिवाली प्रदूषण से संबंधित FAQs 

Q1. AQI क्या होता है और दिल्ली में इसका स्तर क्यों बढ़ता है?

उत्तर- AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स, यह वायु प्रदूषण की मात्रा को दर्शाता है। दिवाली के दौरान प्रदूषण बढ़ने से यह स्तर खतरनाक हो जाता है।

Q2. सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर “हरे पटाखे” जलाने की अनुमति क्यों दी?

उत्तर- “हरे पटाखे” कम प्रदूषण फैलाते हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण कम करने की कोशिश में इन्हें अनुमति दी है।

Q3. प्रदूषण से बचने के लिए नागरिक क्या सावधानी बरतें?

उत्तर- मास्क पहनें, बाहर कम निकलें, पौधे लगाएं और प्रदूषण मुक्त क्षेत्रों में रहें।

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