SA NewsSA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
SA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Politics
  • Educational
  • Tech
  • History
  • Events
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Follow US
© 2024 SA News. All Rights Reserved.

Home » जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहा मलिहाबाद, घटती पैदावार और बढ़ती लागत ने बढ़ाई आम किसानों की चिंता

Hindi News

जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहा मलिहाबाद, घटती पैदावार और बढ़ती लागत ने बढ़ाई आम किसानों की चिंता

SA News
Last updated: June 7, 2026 12:11 pm
SA News
Share
जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहा मलिहाबाद
SHARE

दुनियाभर में अपनी खास पहचान रखने वाला मलिहाबाद का दशहरी आम आज गंभीर संकट का सामना कर रहा है। कभी बेहतरीन उत्पादन और प्राकृतिक खेती के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब जलवायु परिवर्तन, अनियमित मौसम, बढ़ते कीट-रोग और रसायनों पर बढ़ती निर्भरता की चुनौतियों से घिर गया है। बदलते मौसम चक्र ने न केवल आम के उत्पादन को प्रभावित किया है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी कमजोर कर दिया है।

Contents
  • जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहा मलिहाबाद से संबंधित मुख्य बिंदु 
  • मौसम की अनिश्चितता से टूट रही किसानों की उम्मीदें
  • उत्पादन में लगातार गिरावट
  • बढ़ती लागत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाईं
  • उत्पादन बचाने के लिए रसायनों का बढ़ता उपयोग 
  • कीट और रोग बन रहे नई चुनौती
  • प्राकृतिक संतुलन पर पड़ रहा असर
  • केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों ने जताई चिंता 
  • बदलते मौसम चक्र ने बिगाड़ी खेती की व्यवस्था
  • भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
  • जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहा मलिहाबाद से संबंधित मुख्य FAQs

जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहा मलिहाबाद से संबंधित मुख्य बिंदु 

🔹 बेमौसम बारिश, आंधी, बढ़ते कीट-रोग और बदलते मौसम चक्र ने मलिहाबाद की आम खेती को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

🔹 पहले एक एकड़ में लगभग 500 कैरेट आम का उत्पादन होता था, जो अब घटकर 350-400 कैरेट तक रह गया है।

🔹 सिंचाई, दवाइईयों और बाग प्रबंधन पर किसानों को करीब 25,000 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है, जबकि आमदनी लगातार घट रही है।

🔹 जहां पहले बागों में 1-2 बार सिंचाई करनी पड़ती थी, वहीं अब बदलते मौसम के कारण 4-5 बार सिंचाई करनी पड़ रही है।

🔹 देश के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 34 प्रतिशत है, जिससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है।

🔹 मलिहाबाद, माल और काकोरी क्षेत्र में करीब 11,500 हेक्टेयर भूमि पर आम की खेती होती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण इस प्रसिद्ध आम पट्टी का भविष्य चिंता का विषय बनता जा रहा है।

यह भी पढ़ें मानसून का आगमन: मौसम विभाग ने दी चेतावनी, अगले 72 घंटों में इन राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश

मौसम की अनिश्चितता से टूट रही किसानों की उम्मीदें

मलिहाबाद के किसान हर साल बेहतर फसल की उम्मीद के साथ आम के बौर आने का इंतजार करते हैं। इस वर्ष भी पेड़ों पर अच्छी मात्रा में बौर आए थे, लेकिन अचानक आई तेज आंधी और बारिश ने बड़ी संख्या में बौर गिरा दिए। किसानों का कहना है कि अब मौसम का कोई निश्चित पैटर्न नहीं रह गया है, जिससे फसल का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।

image 1

उत्पादन में लगातार गिरावट

कुछ वर्षों पहले तक एक एकड़ में लगभग 500 कैरेट आम का उत्पादन होता था, लेकिन अब यह घटकर 350 से 400 कैरेट तक पहुंच गया है। बेमौसम बारिश, तापमान में उतार-चढ़ाव और फूलों के समय मौसम में बदलाव के कारण फलों का विकास प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है।

बढ़ती लागत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाईं

उत्पादन घटने के साथ-साथ खेती की लागत भी तेज़ी से बढ़ रही है। पहले जहां बागों में एक-दो बार सिंचाई करनी पड़ती थी, वहीं अब चार से पांच बार पानी देना पड़ रहा है। सिंचाई, दवाईयों, उर्वरकों और मज़दूरी पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि आमदनी कम होती जा रही है। इससे किसानों का मुनाफा घटता जा रहा है।

उत्पादन बचाने के लिए रसायनों का बढ़ता उपयोग 

मलिहाबाद के किसान अब पैक्लोब्यूट्राजोल (कल्टार) जैसे रसायनों का सहारा लेने लगे हैं। इसका उपयोग पेड़ों में नियमित रूप से फूल लाने के लिए किया जाता है ताकि हर साल उत्पादन बना रहे। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि अत्यधिक रासायनिक उपयोग लंबे समय में पेड़ों की वृद्धि, आयु और उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है।

कीट और रोग बन रहे नई चुनौती

जलवायु परिवर्तन के कारण कीटों और रोगों का प्रकोप भी बढ़ गया है। किसानों को पहले की तुलना में कई गुना अधिक बार दवाईयों का छिड़काव करना पड़ रहा है। इससे उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है और पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित हो रहा है।

प्राकृतिक संतुलन पर पड़ रहा असर

पद्मश्री से सम्मानित आम उत्पादक कलीमुल्लाह खान का कहना है कि कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से लाभकारी कीट भी नष्ट हो रहे हैं। ये कीट परागण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और फूलों को फल में बदलने में मदद करते हैं। इनके खत्म होने से उत्पादन क्षमता और अधिक प्रभावित हो रही है।

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों ने जताई चिंता 

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रकृति का अपना चक्र होता है। यदि उत्पादन बढ़ाने के लिए प्राकृतिक प्रक्रिया में अत्यधिक हस्तक्षेप किया जाएगा, तो भविष्य में पेड़ों की वृद्धि और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

बदलते मौसम चक्र ने बिगाड़ी खेती की व्यवस्था

पहले सर्दियों का मौसम नवंबर-दिसंबर में शुरू हो जाता था, लेकिन अब ठंड जनवरी-फरवरी तक खिसक गई है। आम की फसल को फूल आने और फल बनने के लिए विशेष तापमान की आवश्यकता होती है। मौसम के इस बदलाव ने पूरे उत्पादन चक्र को प्रभावित कर दिया है।

भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

भारत के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश की लगभग 34 प्रतिशत हिस्सेदारी है और मलिहाबाद इसकी प्रमुख पहचान है। यदि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में मलिहाबाद की विश्व प्रसिद्ध दशहरी आम बेल्ट गंभीर संकट में पड़ सकती है।

यह भी पढ़ें: कार्यस्थल पर अधिक उत्पादक बनने के 15 तरीके: प्रतिदिन अधिक कार्य पूरा करने की सिद्ध रणनीतियाँ

मलिहाबाद की आम खेती केवल एक कृषि गतिविधि नहीं बल्कि हजारों किसानों की आजीविका और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत, घटती पैदावार और रसायनों पर निर्भरता इस विरासत के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टिकाऊ खेती, वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है।

जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहा मलिहाबाद से संबंधित मुख्य FAQs

Q1. मलिहाबाद क्यों प्रसिद्ध है?

मलिहाबाद उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध क्षेत्र है, जो दशहरी आम के उत्पादन के लिए देश-विदेश में जाना जाता है।

Q2. आम उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ा है?

बेमौसम बारिश, आंधी, तापमान में बदलाव और मौसम की अनिश्चितता से उत्पादन लगातार घट रहा है।

Q3. किसानों की लागत क्यों बढ़ रही है?

सिंचाई, कीटनाशकों, उर्वरकों और मजदूरी पर खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।

Q4. पैक्लोब्यूट्राजोल (कल्टार) क्या है?

यह एक रसायन है जिसका उपयोग आम के पेड़ों में नियमित रूप से फूल लाने और उत्पादन बनाए रखने के लिए किया जाता है।

Q5. कीटनाशकों का प्राकृतिक संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

इनके अंधाधुंध उपयोग से लाभकारी कीट भी नष्ट हो रहे हैं, जो परागण और फल बनने में मदद करते हैं।

Q6. मलिहाबाद में आम की पैदावार कितनी घटी है?

पहले एक एकड़ में लगभग 500 कैरेट उत्पादन होता था, जो अब 350-400 कैरेट तक रह गया है ।

Share This Article
Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
BySA News
Follow:
Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.
Previous Article FCI के 20,000 करोड़ रुपये के साइलो प्रोजेक्ट पर उठे सवाल FCI के 20,000 करोड़ रुपये के साइलो प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
Next Article Government Approves Skymap Pharmaceuticals’ ₹121 Crore Acquisition of IMPCL Through Strategic Disinvestment Process
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Popular Posts

A Village Submerged in Water and Shattered Hopes: The Background of Beed Babran

Beed Babran, a small village in Hisar district of Haryana where life revolves around fields,…

By SA News

Delhi High Court Grants Umar Khalid Three-Day Interim Bail on Humanitarian Grounds

In a significant development in the 2020 Delhi riots “larger conspiracy” case, the Delhi High…

By SA News

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर से नकदी बरामद ? सुप्रीम कोर्ट ने जांच शुरू की !

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में हाल ही में आग…

By SA News

You Might Also Like

विकसित भारत बिल्डथॉन 2025 नवाचार की दिशा में भारत का एक ऐतिहासिक कदम
Hindi News

विकसित भारत बिल्डथॉन 2025: नवाचार की दिशा में भारत का एक ऐतिहासिक कदम

By Shivi Dhurve
दिल्ली IFS अधिकारी ने मानसिक तनाव के चलते की आत्महत्या, समाज के लिए बड़ा सवाल
Hindi NewsLocal

दिल्ली: IFS अधिकारी ने मानसिक तनाव के चलते की आत्महत्या, समाज के लिए बड़ा सवाल

By SA News
गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार महेश लांगा को जीएसटी धोखाधड़ी मामले में दी जमानत
LocalHindi News

गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार महेश लांगा को जीएसटी धोखाधड़ी मामले में दी जमानत

By SA News
एलन मस्क की अमेरिका पार्टी क्या बदल जाएगी अमेरिका की राजनीति
Hindi News

एलन मस्क की “अमेरिका पार्टी”: क्या बदल जाएगी अमेरिका की राजनीति?

By SA News
SA NEWS LOGO SA NEWS LOGO
748KLike
340KFollow
13KPin
216KFollow
1.8MSubscribe
3KFollow

About US


Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.

Top Categories
  • Politics
  • Health
  • Tech
  • Business
  • World
Useful Links
  • About Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Copyright Notice
  • Contact Us
  • Official Website (Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj)

© SA News 2025 | All rights reserved.