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Home » CBSE Class 9 Third Language Evaluation: नौवीं कक्षा में तीसरी भाषा के मूल्यांकन का बदला नियम, अब रटने पर नहीं बल्कि स्किल पर लगेगा ज़ोर 

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CBSE Class 9 Third Language Evaluation: नौवीं कक्षा में तीसरी भाषा के मूल्यांकन का बदला नियम, अब रटने पर नहीं बल्कि स्किल पर लगेगा ज़ोर 

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Last updated: August 23, 2026 10:51 am
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CBSE Class 9 Third Language Evaluation: नौवीं कक्षा में तीसरी भाषा के मूल्यांकन का बदला नियम
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CBSE Class 9 Third Language Evaluation: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने भारत की शिक्षा प्रणाली को और अधिक व्यावहारिक तथा आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बोर्ड ने कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाने वाली तीसरी भाषा की मूल्यांकन प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर बदलाव किए हैं। अब तक छात्रों को भाषा के पेपर में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए व्याकरण और साहित्य के लंबे-लंबे उत्तरों को रटना पड़ता था, लेकिन अब इस पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त किया जा रहा है। 

Contents
  • CBSE Class 9 Third Language से जुड़े मुख्य बिंदु
  • कौशल आधारित मूल्यांकन की ओर बढ़ता CBSE 
  • थ्योरी के बजाय ASL पर ज़ोर 
  • NEP 2020 का वास्तविक क्रियान्वयन
  • प्रोजेक्ट वर्क और व्यावहारिक गतिविधियों को मिली प्राथमिकता
  • भविष्य की नींव और कक्षा 10वीं के लिए तैयारी
  • रटी-रटाई मान्यताओं से परे यथार्थ ज्ञान
  • FAQs about CBSE Class 9 Third Language

CBSE Class 9 Third Language से जुड़े मुख्य बिंदु

  • CBSE ने कक्षा 9 में तीसरी भाषा संस्कृत, फ्रेंच, जर्मन आदि के मूल्यांकन में बड़ा बदलाव करते हुए रटने की प्रथा को कर दिया है, खत्म।
  • अब छात्रों का मूल्यांकन केवल थ्योरी परीक्षा से नहीं, बल्कि उनके भाषा कौशल के आधार पर होगा।
  • नई मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह से NEP 2020 पर आधारित है, जिसका उद्देश्य है, छात्रों का समग्र मानसिक विकास करना।
  • स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रोजेक्ट वर्क, रोल प्ले और ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से भाषा के व्यावहारिक ज्ञान का असेसमेंट करें।
  • नए असेसमेंट मॉडल को सही ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को दी जा रही है, विशेष ट्रेनिंग।

कौशल आधारित मूल्यांकन की ओर बढ़ता CBSE 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अपने पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में लगातार ऐसे बदलाव कर रहा है जो आज के समय की मांग हैं। कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा जैसे संस्कृत, उर्दू, फ्रेंच, जर्मन या कोई क्षेत्रीय भाषा को लेकर छात्रों में हमेशा एक डर और अरुचि का माहौल रहता था। छात्र इसे केवल पास होने वाले एक अतिरिक्त विषय के रूप में देखते थे। लेकिन अब CBSE ने इसके मूल्यांकन के तरीके को पूरी तरह से पलट दिया है। नई व्यवस्था के तहत भाषा को व्याकरण के जटिल नियमों में बांधने के बजाय, छात्रों के बोलने, सुनने और समझने की वास्तविक क्षमता को जांचने पर सबसे अधिक बल दिया जा रहा है।

थ्योरी के बजाय ASL पर ज़ोर 

इस नए मूल्यांकन सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी हिस्सा ASL यानी असेसमेंट ऑफ स्पीकिंग एंड लिसनिंग है। पुरानी व्यवस्था में भाषा का मूल्यांकन मुख्य रूप से एक लिखित परीक्षा के माध्यम से किया जाता था, जिसमें छात्र किताबों से रटे हुए उत्तर लिखकर अच्छे अंक ले आते थे। लेकिन, अब कक्षा 9वीं के छात्रों को तीसरी भाषा में केवल लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं परखा जाएगा। इसके बजाय, उनके सुनने और बोलने की क्षमता के लिए अलग से विशेष अंक निर्धारित किए गए हैं। कक्षा में शिक्षक छात्रों को कोई ऑडियो क्लिप सुनाकर उस पर आधारित प्रश्न पूछेंगे, जिससे यह पता चलेगा कि छात्र भाषा को सुनकर कितना समझ पाते हैं। 

NEP 2020 का वास्तविक क्रियान्वयन

NEP 2020 का सबसे मुख्य विजन यही है कि बच्चों को 21वीं सदी के कौशल सिखाए जाएं, जिनमें प्रभावी संचार सबसे ऊपर आता है। नई शिक्षा नीति यह मानती है कि किसी भी भाषा को सीखने का असली मकसद उस भाषा में अपने विचारों को व्यक्त करना और दूसरों के विचारों को समझना है। तीसरी भाषा को भी इसी श्रेणी में रखा गया है ताकि छात्र बहुभाषी बन सकें। बहुभाषी होना आज के ग्लोबल वर्ल्ड में एक बहुत बड़ा फायदा है।

प्रोजेक्ट वर्क और व्यावहारिक गतिविधियों को मिली प्राथमिकता

मूल्यांकन के नए मापदंडों के अनुसार, स्कूलों और शिक्षकों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे कक्षा के भीतर और बाहर ऐसी गतिविधियों का आयोजन करें जो छात्रों को भाषा का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। अब छात्रों को तीसरी भाषा में लंबे निबंध लिखने के बजाय छोटे-छोटे प्रोजेक्ट वर्क, प्रेजेंटेशन और ग्रुप डिस्कशन में हिस्सा लेना होगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र कक्षा 9वीं में फ्रेंच या संस्कृत पढ़ रहा है, तो उसे उस भाषा से जुड़ी संस्कृति, वहां के रहन-सहन या किसी विशेष त्योहार पर एक छोटी सी प्रेजेंटेशन तैयार करने के लिए कहा जा सकता है। 

भविष्य की नींव और कक्षा 10वीं के लिए तैयारी

कक्षा 9वीं को हमेशा से ही कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं की मज़बूत नींव माना जाता है। सीबीएसई का यह फैसला अब छात्रों को केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर ज़ोर दिया गया है। नया मूल्यांकन पैटर्न शिक्षा जगत में भारतीय शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तरीय मानकों के समकक्ष खड़ा करने वाला है। छात्रों को किताबी कीड़ा बनाने के बजाय एक सक्षम, आत्मविश्वासी और कुशल नागरिक बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। 

रटी-रटाई मान्यताओं से परे यथार्थ ज्ञान

जिस प्रकार आधुनिक शिक्षा प्रणाली अब रटने की प्रथा को खत्म करके विषय की वास्तविक समझ और कौशल विकास पर जोर दे रही है, ठीक उसी प्रकार आध्यात्मिक मार्ग में भी रटी-रटाई लोक मान्यताओं यानि लोकवेद का कोई महत्व नहीं है। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं कि बिना शास्त्रों को समझे केवल परंपराओं का अंधानुकरण करने से कोई भी आध्यात्मिक, शारीरिक एवं मानसिक लाभ प्राप्त नहीं हो सकता। जिस तरह कौशल आधारित स्कूली शिक्षा भविष्य संवारती है, उसी तरह पवित्र वेदों और गीता में प्रमाणित सत्यभक्ति ही आत्मा का स्थायी कल्याण कर सकती है। अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj youtube Channel विज़िट करें। 

FAQs about CBSE Class 9 Third Language

1. CBSE ने कक्षा 9वीं की तीसरी भाषा के मूल्यांकन में क्या मुख्य बदलाव किया है?

CBSE ने तीसरी भाषा के मूल्यांकन को रटने की प्रथा से हटाकर अब छात्रों की स्पीकिंग और लिसनिंग स्किल्स (ASL) पर पूरी तरह केंद्रित कर दिया है।

2. ASL क्या है और नए मूल्यांकन में इसका क्या काम है?

ASL के तहत छात्रों को ऑडियो सुनकर समझने और किसी विषय पर आत्मविश्वास से बोलने की क्षमता के आधार पर अंक दिए जाएंगे।

3. यह नया नियम NEP 2020 से किस प्रकार जुड़ा हुआ है?

यह नियम NEP 2020 पर आधारित है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय उनके व्यावहारिक और संचार कौशल का विकास करना है।

4. क्या इस नए असेसमेंट तरीके से छात्रों पर परीक्षा का मानसिक तनाव कम होगा?

जी हाँ, अब साल के अंत की भारी परीक्षा के बजाय पूरे साल ग्रुप डिस्कशन, रोल प्ले और प्रोजेक्ट वर्क से मूल्यांकन होगा, जिससे परीक्षा का डर काफी कम हो जाएगा।

5. शिक्षकों को इस नई मूल्यांकन प्रणाली के लिए किस प्रकार तैयार किया जा रहा है?

देश भर के शिक्षकों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

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