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Delhi High Court: प्राइवेट स्कूल टीचर्स को भी मिलेगी Child Care Leave, कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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Last updated: June 14, 2026 10:53 am
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प्राइवेट स्कूल टीचर्स को भी मिलेगी Child Care Leave
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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के अधिकार और लैंगिक न्याय (Gender Justice) को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी (प्राइवेट) मान्यता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षक भी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की तरह ही ‘चाइल्ड केयर लीव’ (Child Care Leave – CCL) यानी बाल देखभाल अवकाश की हकदार हैं।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी सिर्फ सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं की नहीं होती। एक मां की ममता, उसके कर्तव्य और बच्चे की ज़रूरतें चाहे वह प्राइवेट सेक्टर में हो या सरकारी में, दोनों के लिए बिल्कुल समान हैं। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूलों की महिला शिक्षकों को इस अधिकार से वंचित करना दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (DSEA) के प्रावधानों और समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

Delhi High Court Child Care leave से संबंधित मुख्य बिंदु:

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों की महिला टीचरों को भी चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 
  • अदालत ने कहा कि बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्र की माताओं के लिए समान हैं। 
  • दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम के तहत प्राइवेट स्कूलों के नियम और सुविधाएं सरकारी स्कूलों के समान होनी चाहिए। 
  • महिला शिक्षक अपनी पूरी सर्विस के दौरान दो बड़े बच्चों के लिए अधिकतम 730 दिन की छुट्टी ले सकेंगी।
  • यह फैसला निजी क्षेत्र की शिक्षिकाओं को करियर और परिवार के बीच सही संतुलन बनाने में मदद करेगा। 
  • कोर्ट के इस कदम से प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत लाखों महिला शिक्षकों को मानसिक और कानूनी राहत मिलेगी। 

क्या है दिल्ली हाईकोर्ट का पूरा मामला?

यह ऐतिहासिक फैसला दिल्ली के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल की शिक्षिका द्वारा दायर याचिका पर आया है। शिक्षिका ने अपने बच्चे की बोर्ड परीक्षाओं और बीमारी के दौरान उसकी देखभाल के लिए स्कूल प्रबंधन से चाइल्ड केयर लीव (CCL) की मांग की थी। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने यह कहते हुए उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था कि यह सुविधा केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है और प्राइवेट संस्थान इसे देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं।

स्कूल के इस फैसले के खिलाफ शिक्षिका ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गहराई से समीक्षा की और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 10(1) का हवाला दिया। इस धारा के अनुसार, निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, छुट्टी और सेवानिवृत्ति के लाभ किसी भी हाल में सरकारी स्कूलों के समकक्ष कर्मचारियों से कम नहीं होने चाहिए।

यह भी पढ़ें: UGC NET 2026: जानें! योग्यता, परीक्षा पैटर्न और नए नियमों की पूरी जानकारी

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां: मातृत्व और कामकाजी जीवन में संतुलन

फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने समाज में महिलाओं की दोहरी भूमिका और उनके अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:

समानता का अधिकार: अदालत ने कहा कि बच्चों के पालन-पोषण में आने वाली कठिनाइईयाँ सभी माताओं के लिए एक जैसी होती हैं, चाहे उनके रोज़गार का स्वरूप कुछ भी हो।

अधिनियम का पालन ज़रूरी: दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल नियमों से ऊपर नहीं हैं। उन्हें अपने कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के समान ही छुट्टियां और सुविधाएं देनी होंगी।

कानून की प्रगतिशील व्याख्या: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रोज़गार के नियम ऐसे होने चाहिएं जो महिलाओं को करियर और परिवार के बीच किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न करें, बल्कि दोनों में संतुलन बनाने में मदद करें।

प्राइवेट स्कूल टीचर्स के लिए CCL के नियम और फायदे

इस फैसले के बाद अब दिल्ली के मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में काम करने वाली महिला शिक्षकों को भी सरकारी नियमों के तहत चाइल्ड केयर लीव का लाभ मिल सकेगा। केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियमावली [CCS (Leave) Rules] के तहत मिलने वाली इस सुविधा की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

730 दिनों का अवकाश: महिला कर्मचारी अपनी पूरी सेवा अवधि (Service Period) के दौरान अधिकतम दो साल यानी 730 दिनों की चाइल्ड केयर लीव ले सकती हैं।

दो बड़े बच्चों के लिए मान्य: यह छुट्टी केवल दो सबसे बड़े जीवित बच्चों की देखभाल (जैसे बीमारी, परीक्षा या पालन-पोषण) के लिए ली जा सकती है।

उम्र सीमा: इस छुट्टी का लाभ बच्चे के 18 साल पूरे होने तक ही लिया जा सकता है, जबकि दिव्यांग बच्चों के मामले में इसके लिए किसी उम्र की सीमा लागू नहीं होती।

वेतन की सुरक्षा: सीसीएल के पहले 365 दिनों के दौरान महिला कर्मचारी को 100% पूरा वेतन मिलता है, जबकि अगले 365 दिनों के लिए यह 80% वेतन के साथ स्वीकृत की जाती है।

शिक्षा जगत और कामकाजी महिलाओं पर इस फैसले का प्रभाव

दिल्ली हाईकोर्ट का यह निर्णय केवल एक शिक्षिका की जीत नहीं है, बल्कि यह प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाली लाखों महिला कर्मचारियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से प्राइवेट स्कूलों में महिला शिक्षकों के शोषण पर लगाम लगेगी और उनके नौकरी की सुरक्षा (Job Security) की भावना बढ़ेगी। अक्सर देखा जाता है कि मातृत्व या बच्चों की ज़िम्मेदारी के कारण कई योग्य महिला शिक्षकों को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती है। अब इस कानूनी संरक्षण से वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपने करियर को आगे बढ़ा सकेंगी।

यह फैसला आने वाले समय में अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों और निजी क्षेत्रों के लिए भी एक नजीर (Precedent) साबित होगा, जिससे देश में श्रम कानूनों और महिला अधिकारों को अधिक मज़बूती मिलेगी।

कानूनी अधिकार के साथ ज़रूरी है बच्चों के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संस्कार

दिल्ली हाईकोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला सराहनीय है, जो माताओं को बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य और सांसारिक शिक्षा की देखरेख के लिए समय प्रदान करता है। परंतु, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अनुसार, सच्ची ‘चाइल्ड केयर’ केवल भौतिक सुखों तक सीमित नहीं है; बच्चों को मानसिक अवसाद और विकारों से बचाकर उत्तम संस्कार व सतभक्ति देना ही माता-पिता का असली कर्तव्य है। 

संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं पवित्र ऋग्वेद के अनुसार, कबीर साहेब ही संपूर्ण सृष्टि के रचयिता और हमारे वास्तविक माता-पिता हैं, जिनकी मर्यादा में रहकर भक्ति करने से जीवन के असाध्य रोग और घोर संकट भी टल जाते हैं। अतः जहाँ यह कानूनी अधिकार माताओं को पारिवारिक संतुलन की राह दिखा रहा है, वहीं मानव जीवन के मूल उद्देश्य यानी मोक्ष की प्राप्ति के लिए हमें बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान से भी जोड़ना होगा। इस अनमोल आध्यात्मिक मार्ग को विस्तार से समझने के लिए अपने मोबाइल के play store से डाउनलोड करें SANT RAMPAL JI MAHARAJ APP.

Delhi High Court Child Care Leave से संबंधित FAQs:

Q1. दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार क्या प्राइवेट स्कूल टीचर्स को Child Care Leave (CCL) मिलेगी?

Ans: हाँ, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों की महिला शिक्षक भी सरकारी शिक्षकों की तरह 730 दिनों की CCL की हकदार हैं।

Q2. प्राइवेट स्कूलों में CCL के लिए बच्चों की उम्र सीमा क्या तय की गई है?

Ans: महिला शिक्षक अपने दो सबसे बड़े जीवित बच्चों की 18 वर्ष की आयु होने तक इस छुट्टी का लाभ ले सकती हैं (दिव्यांग बच्चों के लिए कोई उम्र सीमा नहीं है)।

Q3. क्या चाइल्ड केयर लीव (CCL) के दौरान पूरा वेतन मिलता है?

Ans: सरकारी नियमों के तहत पहले 365 दिनों की छुट्टी के दौरान 100% पूरा वेतन मिलता है, जबकि अगले 365 दिनों के लिए 80% वेतन दिया जाता है।

Q4. दिल्ली हाईकोर्ट ने किस कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों को यह आदेश दिया?

Ans: कोर्ट ने ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 10(1)’ का हवाला दिया, जिसके तहत प्राइवेट और सरकारी स्कूल कर्मचारियों की सुविधाएं समान होनी चाहिए।

Q5. संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार बच्चों की सच्ची ‘चाइल्ड केयर’ क्या है?

Ans: केवल सांसारिक परवरिश ही नहीं, बल्कि बच्चों को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सतभक्ति और नैतिक संस्कार देकर उनका आत्मिक कल्याण कराना ही सच्ची चाइल्ड केयर है।

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