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अमरनाथ यात्रा 2026: शुरू होते ही चंद दिनों के भीतर करीब 90% पिघला हिमलिंग

SA News
Last updated: July 11, 2026 9:39 am
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अमरनाथ यात्रा 2026: शुरू होते ही चंद दिनों के भीतर करीब 90% पिघला हिमलिंग
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जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ गुफा मंदिर के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिमलिंग वर्ष 2026 की यात्रा के पहले ही सप्ताह में करीब 90 प्रतिशत तक पिघल गया है। यह वार्षिक तीर्थयात्रा 3 जुलाई को पहलगाम और बालटाल के दोहरे बेस कैंपों से शुरू हुई थी। ‘बाबा बर्फानी’ के रूप में पूजे जाने वाले इस पवित्र हिमलिंग के तेजी से सिकुड़ने के बावजूद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

Contents
  • अमरनाथ हिमलिंग के सिकुड़ने की टाइमलाइन
  • अमरनाथ यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की संख्या
  • अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं
  • पिघलने के कारणों पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
  • हिमलिंग पिघलने के बावजूद जारी है यात्रा
  • क्या अमरनाथ यात्रा से मोक्ष सम्भव हैं?

गुफा के अंदर से सामने आईं तस्वीरों से पता चलता है कि यह प्राकृतिक स्टैलेग्माइट (हिमलिंग) कुछ ही दिनों में अपने मूल आकार के एक बहुत छोटे हिस्से में सिमट गया है। कश्मीर हिमालय में लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र गुफा तक केवल पैदल, खच्चर या पालकी के जरिए ही पहुंचा जा सकता है।

अमरनाथ हिमलिंग के सिकुड़ने की टाइमलाइन

गुफा की छत से टपकने वाले पानी के परत-दर-परत जमने से हर साल यह हिमलिंग प्राकृतिक रूप से स्टैलेग्माइट का आकार लेता है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा जारी तस्वीरों के अनुसार, 23 मई को हिमलिंग की ऊंचाई लगभग सात फीट थी। 29 जून को पहली पूजा के दिन यह घटकर करीब पांच फीट रह गया। वहीं, यात्रा शुरू होने के महज चार से पांच दिनों के भीतर, यानी 7 जुलाई तक, यह लगभग 90 प्रतिशत तक सिकुड़ गया। कुछ रिपोर्टों में इसके पूरी तरह पिघलने का भी दावा किया जा रहा है।

यह लगातार तीसरा वर्ष है जब यात्रा शुरू होने के एक सप्ताह बाद ही हिमलिंग का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। इसके विपरीत, साल 2018 और 2022 में शिवलिंग कई हफ्तों तक 12 से 15 फीट की ऊंचाई के साथ अडिग रहा था।

अमरनाथ यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की संख्या

3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाली इस 57 दिवसीय यात्रा में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल देखा गया है। शुरुआती तीन दिनों में ही 56,000 से अधिक तीर्थयात्रियों ने इस गुफा के दर्शन किए, जो 2025 की समान अवधि की तुलना में लगभग 18.6 प्रतिशत अधिक है। इस साल की यात्रा के लिए चार लाख से अधिक भक्तों ने पंजीकरण कराया है।

‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 5 जुलाई तक 32,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चन कर ली थी, जिसमें अकेले दूसरे दिन 20,000 से अधिक लोग पहुंचे। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस संख्या को पिछले चार वर्षों की तुलना में “भारी उछाल” बताया है।

The Amarnath Yatra, a year after the Pahalgam terror attack, which hit tourism and pilgrimage, has drawn record pilgrims. But the sacred ice lingam in the cave shrine has shrunk dramatically in just five days. Over 50 days of the pilgrimage are still to go. Is climate change… pic.twitter.com/WNnZzsb96s

— IndiaToday (@IndiaToday) July 10, 2026

अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए हिमलिंग के समय से पहले पिघलने पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने इसके लिए जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, अवैध खनन, खराब अपशिष्ट प्रबंधन और क्षेत्र में घटते जल स्तर को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने एक दीर्घकालिक पर्यावरण और पर्यटन नीति की मांग करते हुए कहा कि कश्मीर की राजनीति में पर्यावरण के मुद्दे गौण हो गए हैं।

Only a week into Amarnath Yatra and the naturally formed lingam has already melted. Climate change from mindlessly axing trees, illegal mining, waste mismanagement & dangerous depletion of water levels are major factors. Unfortunately environment has become a casualty in… https://t.co/1R719GkUGR

— Iltija Mufti (@IltijaMufti_) July 8, 2026

इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत श्रद्धालुओं की संख्या पहले से ही सीमित (कैप) की गई है। उन्होंने कहा कि हिमलिंग का निर्माण प्रकृति द्वारा होता है और इसकी अवधि किसी भी प्राधिकारी या बोर्ड के नियंत्रण में नहीं है।

हालांकि श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने इस साल तेजी से बर्फ पिघलने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन बोर्ड बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर पंजीकरण, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का प्रबंधन लगातार देख रहा है।

पिघलने के कारणों पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

जलवायु वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसके लिए कई प्रमुख कारकों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें क्षेत्रीय तापमान में वृद्धि, सर्दियों में कम बर्फबारी और हर दिन गुफा में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या से उत्पन्न होने वाली गर्मी (बॉडी हीट) शामिल है। व्यस्त दिनों (पीक डेज) में रोजाना 13,000 से 20,000 श्रद्धालु गुफा के दर्शन करते हैं।

‘नेचर रिव्यूज अर्थ एंड एनवायरनमेंट’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 1950 के बाद से हिमालय के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक तेजी से गर्म हुए हैं। इस शोध से जुड़े जलवायु वैज्ञानिक निक पेपिन ने कहा कि यह रुझान दर्शाता है कि हिमालय की बर्फ हमारी पिछली समझ से कहीं अधिक तेजी से घट रही है।

हिमलिंग पिघलने के बावजूद जारी है यात्रा

हिमलिंग के सिकुड़ने के बावजूद यात्रा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बर्फ पिघलने के कारण यात्रा में किसी भी तरह के बदलाव की कोई योजना नहीं है और श्रद्धालु भारी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। समाचार माध्यमों से बातचीत में कई श्रद्धालुओं ने कहा कि हिमलिंग की दृश्यता कम होने से गुफा की पवित्रता के प्रति उनकी अटूट आस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

क्या अमरनाथ यात्रा से मोक्ष सम्भव हैं?

अमरनाथ हिमलिंग के तेजी से पिघलने और यात्रा के बदलते स्वरूप के बीच, प्रख्यात समाज सुधारक और तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने इस तीर्थ स्थल के वास्तविक आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डाला है। अमरनाथ मुख्य रूप से वह ऐतिहासिक स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को एकांत में आध्यात्मिक ज्ञान और अमरता का गुप्त मंत्र प्रदान किया था। माता पार्वती को जो आध्यात्मिक लाभ हुआ, वह उस भौतिक स्थान पर जाने से नहीं, बल्कि भगवान शिव से प्राप्त हुए उस अनमोल मंत्र और उपदेश के कारण हुआ था।

आज तत्वज्ञान (सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान) के अभाव में श्रद्धालु केवल तीर्थ स्थलों की यात्रा और शारीरिक दर्शन को ही मोक्ष का साधन मान बैठते हैं। वास्तविकता यह है कि केवल किसी स्थान विशेष पर जाने या प्राकृतिक हिम संरचनाओं के दर्शन मात्र से पूर्ण मोक्ष संभव नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, मनमाना आचरण और शास्त्र-विरुद्ध साधना मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त नहीं करा सकती।

सच्चे सुख, पूर्ण मोक्ष और वास्तविक 

आध्यात्मिक मार्ग को गहराई से समझने के लिए पाठकों को संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित अद्वितीय पुस्तकें “ज्ञान गंगा” और “जीने की राह” अवश्य पढ़नी चाहिए। ये पुस्तकें पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता, वेदों और अन्य प्रामाणिक धर्मग्रंथों के तथ्यों के आधार पर मानव जीवन के मूल उद्देश्य और सच्ची भक्ति विधि का सप्रमाण मार्गदर्शन करती हैं।

इस विषय को गहराई से समझने और अमरनाथ धाम के प्रामाणिक इतिहास को जानने के लिए आप अमरनाथ धाम की स्थापना और शिव-पार्वती की अमर कथा देख सकते हैं। यह वीडियो विस्तार से समझाता है कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस स्थान का क्या महत्व है और शास्त्रों के अनुसार वास्तविक मोक्ष का मार्ग क्या है।

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