दिल्ली के बाद यूपी में स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए हाई अलर्ट कर दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वाइन फ्लू के संक्रमण को कम करने का उपाय बचाव व चिकित्सक परामर्श को बताया। साथ ही जनता से सतर्कता बरतने की अपील की। मामूली सर्दी-ज़ुकाम को भी नजरअंदाज न करने व जांच करवाने के आदेश दिए। प्रदेश में स्वाइन फ्लू से एक 50 वर्षीय महिला की मौत हो गई। जो स्वाइन फ्लू से होने वाली पहली मौत हैं। इसके बाद प्रदेश में स्वाइन फ्लू को गंभीर रूप से लेते हुए सावधानी बरतने को कहा गया।
स्वाइन फ्लू से यूपी में अलर्ट से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु :-
- स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यूपी में अलर्ट जारी कर दिया है।
- यूपी सीएम योगी ने स्वाइन फ्लू के प्रति सतर्कता बरतने व मामूली सर्दी-ज़ुकाम को भी नजरअंदाज न करने की अपील की।
- लखनऊ में रहने वाली 50 वर्षीय महिला ने स्वाइन फ्लू के चलते दम तोड़ दिया। जो प्रदेश में स्वाइन फ्लू की पहली मौत हैं।
- महिला के परिजनों ने अस्पताल की लापरवाही को मौत का कारण बताया। पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने से उन्होंने अपनी आखिरी सांसें ली।
स्वाइन फ्लू से यूपी में अलर्ट
यूपी में स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप को दिखते हुए हाई अलर्ट कर दिया है। यह मामला संजय गांधी पीजीआई से सामने आया। जहां स्वाइन फ्लू के साथ कोरोना से संबंधित मरीजों की पुष्टि हुई है। जिसमें ओपीडी से संबंधित विभिन्न संस्थाएं शामिल हैं। हालांकि बड़ा मामला यह नहीं है कि संक्रमित पाया गया जबकि यह हैं कि इस मामले को संस्थान प्रशासन द्वारा दबवाया गया।
संस्थान की पीआरओ कुसुम यादव ने बताया कि संस्था की ओपीडी में मरीज़ इन्फ्लूएंजा -लाइक इलनेस (आरएलआई) जैसे लक्षणों के साथ आएं । जिसमें सभी मरीज संक्रमित नहीं है। अधिकांश को मामूली का सर्दी ज़ुकाम है लेकिन कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। सांस संबंधित मामूली लक्षण भी देखने को मिले।
अस्पताल में जांच के द्वारा स्पष्ट हुआ की काफी मरीज एच1एन1 के संक्रमण से ग्रस्त हैं और यह संक्रमण ओपीडी तक सीमित नहीं रह कर पूरे संस्थान में फैला हुआ हैं। इसी के चलते विभिन्न विभागों में अन्य बीमारियों और इलेक्टिव सर्जरी के लिए भर्ती हुए मरीजों से एच1एन1 से संबंधित लक्षण पाए गए। साथ ही कोरोना लक्षण भी देखने को मिला।
जनता से सीएम योगी की अपील
सीएम योगी जी ने बढ़ते स्वाइन फ्लू के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। उन्होंने स्वाइन फ्लू की सही जांच के लिए स्वास्थ्य अधिकारी, जिलाधिकारीयों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को सतर्क रहने व निगरानी के आदेश दिए। सीएम ने अधिकारियों को प्रदेश में लगातार निगरानी और और नियमित समीक्षा करने को कहा।
इसके अलावा उन्होंने किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज न करने का आदेश दिया। सीएम ने अस्पतालों में चिकित्सा संबंधी उपयोगी दवाईयों और मरीजों के लिए पर्याप्त उपचार को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए। ताकि स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रभाव को तुरंत कम किया जा सके और उचित दवाईयां दी जा सके।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बढ़ते स्वाइन फ्लू को कम करने ना आसान तरीका सतर्कता को बताया। उन्होंने स्वाइन फ्लू से न घबराने की अपील की। साथ ही छोटी से छोटी सर्दी, ज़ुकाम को नजरअंदाज न करने व जांच के निर्देश दिए। चिकित्सा संबंधी सलाह लेने पर जोर दिया। सीएम ने चिकित्सा संबंधी अधिकारियों को सतर्क रहने व सही प्रकार से मरीजों की जांच के लिए कहां। चिकित्सा संबंधी सेवाओं की उपलब्धता और मरीजों के लिए अच्छे उपचार करने के लिए जरूरी आदेश दिए।
स्वाइन फ्लू से हुई महिला की मौत
युपी में बढ़ते स्वाइन फ्लू से एक 50 वर्षीय महिला की मौत हो गई। दावा है कि उपलब्ध ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण महिला ने अपना दम तोड़ दिया। यह केस यूपी के केपीटल लखनऊ की हैं। जहां महिला एच1एन1 से संक्रमित पाई गई थीं, उनको पर्याप्त उपचार नहीं मिलने के कारण महिला की मौत हो गई।
यह लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल की हैं। यहां शुक्रवार को महिला एच1एन1 से संक्रमित पाई गई थी। इस घटनाक्रम के बाद यूपी सरकार ने स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी कर दिया। साथ ही किसी छोटी सर्दी ज़ुकाम को भी नजरअंदाज न करने व सतर्कता बरतने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
अस्पताल की लापरवाही को बताया कारण
स्वाइन फ्लू से पहले महिला को मामूली सर्दी-ज़ुकाम और सांस से संबंधित समस्या थी। यह महिला लखनऊ के इंदिरानगर की रहने वाली हैं। 25 अगस्त को महिला को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां 24 अगस्त को एक निजी पैथोलॉजी की जांच में स्वाइन फ्लू का पता चला।
जहां अस्पताल में जांच के दौरान महिला ने अपनी आखिरी सांसें ली। परिजनों ने बताया कि अस्पताल की लापरवाही की वजह से महिला की मौत हुई है। साथ ही मौत होने के पश्चात् स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट पाॅजिटिव देखाएं जाने के बात अस्पताल में हड़कंप मच गया। इलाज़ के दौरान शामिल डॉक्टरों को आइसोलेशन में रहने को कहा। ताकि संक्रमण ज्यादा न फैले।

