जयपुर ग्रामीण के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में शुक्रवार को सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर CJP कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच विवाद हो गया। CJP के प्रवक्ता एवं सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में कार्यकर्ता राजकीय प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे।
रिपोर्टों के अनुसार, गांव के कुछ लोगों ने CJP की टीम का विरोध किया और उन्हें स्कूल परिसर में जाने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। आरोप है कि ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से बाहर जाने के लिए मजबूर किया। घटना के दौरान कुछ लोगों द्वारा ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए जाने की बात भी BBC की रिपोर्ट में सामने आई है।
रांका ने भाजपा समर्थकों पर लगाया मारपीट का आरोप
घटना के बाद आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और कुछ लोगों ने उनकी गाड़ियों के शीशे भी तोड़ दिए। रांका ने दावा किया कि विरोध करने वाले लोगों को भाजपा से जुड़े लोगों ने बुलाया था। उन्होंने कहा कि CJP इस तरह के विरोध से डरने वाली नहीं है।
CJP की महिला कार्यकर्ताओं ने भी कथित मारपीट के आरोप लगाए हैं। हालांकि, भाजपा समर्थकों द्वारा मारपीट कराए जाने का आरोप फिलहाल रांका और CJP की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में ही सामने आया है और उपलब्ध रिपोर्टों में भाजपा की ओर से इस आरोप का विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।
ग्रामीणों ने बाहरी हस्तक्षेप का किया विरोध
विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल के विकास और मरम्मत के लिए सरकार की ओर से करीब 12 से 12.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है। उनका तर्क था कि स्कूल की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर सुधारी जा सकती है और किसी राजनीतिक संगठन के कार्यकर्ताओं को स्कूल का निरीक्षण करने की आवश्यकता नहीं है। ग्रामीणों ने CJP कार्यकर्ताओं को बाहरी बताते हुए गांव से वापस जाने के लिए कहा। The Lallantop की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने CJP पर स्कूल के मुद्दे को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया। एक ग्रामीण ने यह भी दावा किया कि स्कूल की मरम्मत का काम कराया जाएगा और इसके लिए राशि पहले ही स्वीकृत हो चुकी है।
स्कूल की जर्जर हालत पर CJP ने उठाए सवाल
CJP का कहना है कि उसका ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और भवनों की स्थिति का जायजा लेने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल की मुख्य इमारत जर्जर स्थिति में है और छत से जुड़ी क्षतिग्रस्त पट्टियों को लोहे के एंगल से सहारा दिया गया है।
CJP का दावा है कि सुरक्षा कारणों से बच्चों को मुख्य भवन से हटाकर करीब 50 मीटर दूर दूसरे स्थान पर पढ़ाया जा रहा है और कुछ बच्चे टीनशेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि स्कूल भवन की स्थिति खराब है तो बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
विवाद ने स्कूल व्यवस्था और राजनीति दोनों पर उठाए सवाल
इस पूरे विवाद ने सरकारी स्कूलों की स्थिति के साथ-साथ स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। CJP का आरोप है कि सरकारी स्कूलों की स्थिति सामने आने से रोकने के लिए मीडिया और आम लोगों के अनावश्यक प्रवेश पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल के विकास का काम सरकार और स्थानीय स्तर पर होना चाहिए तथा राजनीतिक संगठनों का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। मारपीट, गाड़ियों के शीशे तोड़ने और भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। ऐसे में घटना की पूरी तस्वीर पुलिस जांच और दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

