कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को वीर सावरकर से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को उनके खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत और लखनऊ की निचली अदालत की ओर से जारी समन को रद्द कर दिया। अदालत ने मामले में जरूरी कानूनी मंजूरी यानी सैंक्शन (Sanction) नहीं होने को कार्यवाही खत्म करने का महत्वपूर्ण आधार माना।
- यूपी सरकार के हलफनामे में नहीं मिला सैंक्शन का रिकॉर्ड
- जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनाया फैसला
- 2022 के भारत जोड़ो यात्रा के बयान से शुरू हुआ था विवाद
- अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने दर्ज कराई थी शिकायत
- 2024 में लखनऊ कोर्ट ने जारी किया था समन
- 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई थी नाराजगी
- कोर्ट ने महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी के संदर्भ का भी दिया था उदाहरण
- इस बार फैसला टिप्पणी पर नहीं, कानूनी प्रक्रिया पर आधारित रहा
- राहुल गांधी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
- सावरकर को लेकर राजनीतिक विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना
यूपी सरकार के हलफनामे में नहीं मिला सैंक्शन का रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे का भी उल्लेख हुआ। अदालत ने पाया कि हलफनामे में उस आवश्यक मंजूरी का कोई उल्लेख या रिकॉर्ड सामने नहीं आया, जिसके आधार पर इस तरह की आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सके। कोर्ट ने इसी कानूनी कमी को देखते हुए शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित समन आदेश को रद्द कर दिया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनाया फैसला
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने की, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू शामिल थे। पीठ ने साफ किया कि जहां कानून के अनुसार सैंक्शन जरूरी है और वह उपलब्ध नहीं है, वहां आपराधिक कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इस आधार पर राहुल गांधी को इस मामले में बड़ी राहत मिली है।
2022 के भारत जोड़ो यात्रा के बयान से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद साल 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र में दिए गए एक बयान से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी ने विनायक दामोदर सावरकर को लेकर टिप्पणी करते हुए उन पर अंग्रेजों के साथ सहयोग करने और अंग्रेजी शासन से पेंशन लेने जैसे आरोप लगाए थे। इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठी थी।
अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने दर्ज कराई थी शिकायत
राहुल गांधी के बयान को लेकर अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने शिकायत दाखिल की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी की टिप्पणी से समाज में वैमनस्य और नफरत फैलने की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद निचली अदालत ने मामले में संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था। मामला आगे चलकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
2024 में लखनऊ कोर्ट ने जारी किया था समन
दिसंबर 2024 में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में समन किया था। निचली अदालत के आदेश में उनके बयान को लेकर गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया था। राहुल गांधी ने इस कार्यवाही को चुनौती देते हुए पहले हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई थी नाराजगी
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की सावरकर संबंधी टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जिम्मेदारी से बयान देने की सलाह दी थी। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए राहुल गांधी को भविष्य में इस तरह की टिप्पणी से बचने को कहा था।
कोर्ट ने महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी के संदर्भ का भी दिया था उदाहरण
2025 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की ओर से सावरकर पर की गई टिप्पणी के ऐतिहासिक संदर्भ पर सवाल उठाया था। पीठ ने महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश अधिकारियों को लिखे गए पत्रों में इस्तेमाल भाषा का उदाहरण देते हुए कहा था कि इतिहास को व्यापक संदर्भ में समझना जरूरी है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि इंदिरा गांधी ने भी सावरकर की प्रशंसा की थी।
इस बार फैसला टिप्पणी पर नहीं, कानूनी प्रक्रिया पर आधारित रहा
14 अगस्त 2026 के ताजा फैसले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत को मुख्य रूप से आवश्यक सैंक्शन की अनुपस्थिति के आधार पर रद्द किया। यानी इस आदेश का केंद्र राहुल गांधी की सावरकर संबंधी टिप्पणी सही या गलत होने का फैसला करना नहीं था, बल्कि यह देखना था कि संबंधित आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई थी या नहीं।
राहुल गांधी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
इस फैसले से राहुल गांधी को इस विशेष मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। लखनऊ की अदालत में उनके खिलाफ चल रही शिकायत और उससे जुड़ा समन अब प्रभावी नहीं रहेगा। हालांकि, सावरकर से जुड़े दूसरे कानूनी विवादों को इससे स्वतः समाप्त मानना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग अदालतों में अलग शिकायतें और कार्यवाहियां रही हैं।
सावरकर को लेकर राजनीतिक विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना
वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से दिखाई देते रहे हैं। राहुल गांधी की टिप्पणियों ने इस बहस को कई बार तेज किया है। एक ओर कांग्रेस सावरकर के ऐतिहासिक और राजनीतिक आकलन को लेकर अपना पक्ष रखती रही है, वहीं भाजपा और सावरकर समर्थक उनकी टिप्पणियों का विरोध करते रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला कानूनी रूप से राहुल गांधी के लिए राहत भले ही हो, लेकिन सावरकर को लेकर राजनीतिक बहस खत्म होने की संभावना कम है।

