नई दिल्ली: डिजिटल युग में सोशल मीडिया लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। Facebook, Instagram और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हर दिन करोड़ों लोग अपनी बात साझा करते हैं। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के साथ Deepfake, फर्जी सूचना और आपत्तिजनक सामग्री जैसी चुनौतियां भी तेजी से सामने आई हैं।
- Deepfake: AI तकनीक का दूसरा पहलू
- CSAM कंटेंट पर सख्त निगरानी की आवश्यकता
- कंटेंट मॉडरेशन क्यों बना बड़ी चुनौती?
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो हटाने का मामला
- भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ती जिम्मेदारी
- समाज के हित में होना चाहिए उपयोग
- Meta और डिजिटल सुरक्षा: AI के दौर में सोशल मीडिया की बढ़ती जिम्मेदारियां के प्रश्न ?
इसी बीच Meta के CEO मार्क जकरबर्ग और कंपनी के अधिकारियों ने भारत सरकार के साथ हुई बैठकों में Deepfake, बच्चों से जुड़े यौन शोषण (CSAM) कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन से संबंधित कुछ कमियों को स्वीकार किया है। कंपनी ने कहा है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मॉडरेशन सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
Deepfake: AI तकनीक का दूसरा पहलू
Artificial Intelligence ने कई क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा की हैं, लेकिन इसका दुरुपयोग भी बढ़ा है। Deepfake तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा या वीडियो को इस तरह बदला जा सकता है कि वह वास्तविक प्रतीत हो।
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ऐसे फर्जी वीडियो न केवल लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि समाज में भ्रम और गलत सूचना फैलाने का कारण भी बन सकते हैं।
CSAM कंटेंट पर सख्त निगरानी की आवश्यकता
बच्चों से जुड़े यौन शोषण (CSAM) कंटेंट को दुनिया भर में गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे कंटेंट को रोकना और तुरंत हटाना सोशल मीडिया कंपनियों की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
Meta ने कहा है कि वह इस दिशा में अपनी तकनीकी क्षमता और मॉडरेशन प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने पर काम कर रही है।
कंटेंट मॉडरेशन क्यों बना बड़ी चुनौती?
Facebook और Instagram पर प्रतिदिन लाखों पोस्ट, फोटो और वीडियो अपलोड किए जाते हैं। इतनी बड़ी मात्रा में कंटेंट की निगरानी करना किसी भी प्लेटफॉर्म के लिए चुनौतीपूर्ण है।
हालांकि AI और मानव मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक सामग्री को हटाने की प्रक्रिया चलती रहती है, फिर भी कई बार गलत कंटेंट प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाता है। यही कारण है कि कंटेंट मॉडरेशन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो हटाने का मामला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को हटाए जाने का मामला भी चर्चा में रहा। हालांकि इस विषय पर Meta की ओर से अब तक कोई अलग सार्वजनिक माफी सामने नहीं आई है।
भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ती जिम्मेदारी
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है। ऐसे में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यूजर्स की सुरक्षा, गोपनीयता और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
समाज के हित में होना चाहिए उपयोग
संत रामपाल जी महाराज अपने सत्संगों में बताते हैं कि मनुष्य को सत्य, ईमानदारी और जिम्मेदारी के मार्ग पर चलना चाहिए। किसी भी माध्यम का उपयोग यदि समाज के हित में किया जाए तो वह कल्याणकारी बनता है, जबकि असत्य और भ्रम फैलाने वाला कार्य समाज को नुकसान पहुंचाता है।
आज डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी विवेक, सत्य और नैतिक मूल्यों के साथ किया जाना समय की आवश्यकता है। संत रामपाल जी महाराज की पवित्र पुस्तक ‘ज्ञान गंगा’ की अपनी पूरी तरह से मुफ़्त कॉपी ऑर्डर करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
Meta और डिजिटल सुरक्षा: AI के दौर में सोशल मीडिया की बढ़ती जिम्मेदारियां के प्रश्न ?
प्रश्न 1. Meta ने किस मामले में अपनी कमियां स्वीकार की हैं?
उत्तर: -कंपनी ने Deepfake, CSAM कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चुनौतियों को स्वीकार किया है।
प्रश्न 2. Deepfake क्या है?
उत्तर: -AI तकनीक से तैयार किया गया ऐसा नकली वीडियो या ऑडियो, जो वास्तविक जैसा दिखाई देता है।
प्रश्न 3.CSAM का क्या अर्थ है?
उत्तर:- CSAM का अर्थ Child Sexual Abuse Material है, जो बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी अवैध कंटेंट को दर्शाता है।
प्रश्न 4.सोशल मीडिया उपयोग करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर:- किसी भी वायरल वीडियो या जानकारी को सत्यापित किए बिना साझा नहीं करना चाहिए और केवल विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए।
प्रश्न 5. Meta ने आगे क्या कदम उठाने की बात कही है?
उत्तर: – कंपनी ने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बढ़ाने, कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने और आपत्तिजनक सामग्री पर तेजी से कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।

