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Home » पुराने कपड़ों की रीसाइक्लिंग से मिलेगा रोज़गार, दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण’ केंद्र

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पुराने कपड़ों की रीसाइक्लिंग से मिलेगा रोज़गार, दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण’ केंद्र

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Last updated: July 19, 2026 11:23 am
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दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में  और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने एक नई पहल शुरू की है। इसके अनुसार राजधानी के 10 मेट्रो स्टेशनों पर ‘अर्पण’ नाम से विशेष संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक अपने पुराने और अनुपयोगी कपड़े दान कर सकेंगे। इन कपड़ों की रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग कर उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिनकी बिक्री भी इन्हीं केंद्रों पर की जाएगी।

Contents
  • दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण’ केंद्र से जुड़े मुख्य बाते 
  • डीएमआरसी और दिल्ली सरकार के बीच हुआ समझौता
  • इन 10 मेट्रो स्टेशनों पर शुरू होंगे अर्पण केंद्र पहले चरण में 
  • रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से तैयार होंगे नए उत्पाद
  • स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेंगे प्रशिक्षण और रोजगार
  • डिजिटल प्रक्रिया से होगा कपड़ों का दान
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था और स्वच्छ दिल्ली को मिलेगा बढ़ावा
  • भविष्य में अन्य प्रकार के कचरे के लिए भी बनेगी व्यवस्था
  • दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण’ केंद्र से संबंधित मुख्य FAQs

दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण’ केंद्र से जुड़े मुख्य बाते 

1.पहले चरण में दिल्ली के 10 मेट्रो स्टेशनों पर पुराने और अनुपयोगी कपड़े दान करने के लिए विशेष संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

2. दान किए गए कपड़ों से उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जबकि अनुपयोगी वस्त्रों को नए कच्चे माल में पुनर्चक्रित किया जाएगा।

3.अर्पण केंद्रों का संचालन एसएचजी की महिलाएं करेंगी, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

4. क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन पंजीकरण, कपड़ों का सत्यापन, डिजिटल प्रमाणपत्र और रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध होगी।

5. इस पहल से वस्त्र अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा, जिससे लैंडफिल साइटों पर जाने वाले कचरे में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

6. डीएमआरसी, दिल्ली सरकार और सहयोगी संस्थाओं की यह पहल चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए भविष्य में पूरे दिल्ली में विस्तारित की जाएगी।

डीएमआरसी और दिल्ली सरकार के बीच हुआ समझौता

इस परियोजना को लागू करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी), डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन (डीएलडब्ल्यूओ), दिल्ली सरकार के स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन (एसयूएलएम), क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. विकास कुमार सहित संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल दिल्ली को स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यावरण के प्रति अधिक ज़िम्मेदार शहर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इन 10 मेट्रो स्टेशनों पर शुरू होंगे अर्पण केंद्र पहले चरण में 

पहले चरण में शाहदरा, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज़ खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज़-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर अर्पण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर नागरिक प्रतिदिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक अपने पुराने, अनुपयोगी और अतिरिक्त कपड़े दान कर सकते है। भविष्य में इस योजना का विस्तार दिल्ली के अन्य मेट्रो स्टेशनों और क्षेत्रों तक भी कर सकते है।

रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से तैयार होंगे नए उत्पाद

दान किए गए कपड़ों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किए जाएंगे,अच्छी स्थिति वाले कपड़ों को अपसाइक्लिंग के माध्यम से बैग, होम डेकोर, सजावटी वस्तुएं और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदले जाएंगे। पूरी तरह अनुपयोगी कपड़ों को रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के जरिए नए कच्चे माल और अन्य उत्पादों में परिवर्तित किए जाएंगे। धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किए गए वस्त्रों और अन्य पवित्र सामग्री का भी सम्मानजनक तरीके से पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण किए जाएंगे,जिससे उनका उचित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेंगे प्रशिक्षण और रोजगार

अर्पण केंद्रों का संचालन दिल्ली सरकार के स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाएं करेंगी। उन्हें वस्त्रों की रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग का विशेष प्रशिक्षण दिए जाएंगे,ताकि वे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर सकें। इन उत्पादों की बिक्री से महिलाओं की आय बढ़ेगी और उन्हें स्थायी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। यह पहल महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को भी शसक्त बनाएगी।

डिजिटल प्रक्रिया से होगा कपड़ों का दान

कपड़े दान करने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। नागरिक केंद्र पर उपलब्ध क्यूआर कोड स्कैन कर अपना नाम, मोबाइल नंबर और दान किए जाने वाले कपड़ों का विवरण ऑनलाइन दर्ज करेंगे। इसके बाद स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कपड़ों की जांच और सत्यापन करेंगी। सत्यापन पूरा होने पर दानकर्ता को डिजिटल प्रमाणपत्र और विशेष धन्यवाद संदेश भेजे जाएंगे ,साथ ही सभी अर्पण केंद्रों की ऑनलाइन रियल-टाइम ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी रहेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहेगी।

चक्रीय अर्थव्यवस्था और स्वच्छ दिल्ली को मिलेगा बढ़ावा

अर्पण केंद्रों पर पुनर्चक्रित सामग्री से बने उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष कियोस्क भी लगाए जाएंगे। इससे चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा मिलेगा, जो लैंडफिल में वस्त्र कचरे एकत्र होते थे वह कम होगी और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन दान किए गए कपड़ों के पृथक्करण, रीसाइक्लिंग, अपसाइक्लिंग तथा तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण का कार्य संभालेंगे।

भविष्य में अन्य प्रकार के कचरे के लिए भी बनेगी व्यवस्था

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सरकार केवल वस्त्र कचरे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षतिग्रस्त मूर्तियों, प्लास्टिक कचरे और अन्य प्रकार के अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए भी अलग-अलग समाधान विकसित किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से दिल्ली को स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल राजधानी बनाने का उदेश्य तेजी से पूरा होगा।

यह भी पढ़ें : एक देश एक चुनाव क्या है फायदे चुनौतियां और भारत की नई चुनावी नीति

दिल्ली सरकार और डीएमआरसी की ‘अर्पण’ पहल पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 10 मेट्रो स्टेशनों पर शुरू होने वाले इन केंद्रों के माध्यम से पुराने और अनुपयोगी कपड़ों की रीसाइक्लिंग एवं अपसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लैंडफिल में जाने वाले वस्त्र कचरे में कमी आएगी और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। डिजिटल प्रणाली, पुनर्चक्रित उत्पादों की बिक्री और भविष्य में पूरे दिल्ली में विस्तार की योजना इस पहल को एक टिकाऊ एवं जनभागीदारी आधारित मॉडल बनाती है, जो स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर दिल्ली के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 

दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण’ केंद्र से संबंधित मुख्य FAQs

1. ‘अर्पण’ केंद्र क्या हैं?

‘अर्पण’ केंद्र ऐसे संग्रहण केंद्र हैं, जहां नागरिक अपने पुराने और अनुपयोगी कपड़े दान कर सकेंगे। इन कपड़ों की रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग कर नए उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

2. पहले चरण में किन मेट्रो स्टेशनों पर अर्पण केंद्र शुरू होंगे?

पहले चरण में शाहदरा, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज़ खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज़-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर अर्पण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

3. नागरिक कपड़े कैसे दान कर सकेंगे?

नागरिक सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक अर्पण केंद्र जाकर क्यूआर कोड स्कैन करेंगे, डिजिटल फॉर्म भरेंगे और सत्यापन के बाद अपने कपड़े दान कर सकेंगे। उन्हें डिजिटल प्रमाणपत्र भी मिलेगा।

4. दान किए गए कपड़ों का क्या किया जाएगा?

अच्छी स्थिति वाले कपड़ों की अपसाइक्लिंग कर बैग, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाए जाएंगे, जबकि अनुपयोगी कपड़ों को रीसाइक्लिंग के जरिए नए कच्चे माल में बदला जाएगा।

5. इस योजना से किसे सबसे अधिक लाभ मिलेगा?

इस पहल से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार मिलेगा, पर्यावरण को लाभ होगा तथा लैंडफिल में जाने वाले वस्त्र कचरे में कमी आएगी।

6. इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस योजना का उद्देश्य वस्त्र अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा, महिला सशक्तिकरण और स्वच्छ एवं टिकाऊ दिल्ली के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

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