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Home » Indian Railways Two-Wheeler Transport: ट्रेन से दूसरे शहर भेजनी है अपनी बाइक? जानिए पार्सल के नियम, खर्च और ज़रूरी कागज़ात 

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Indian Railways Two-Wheeler Transport: ट्रेन से दूसरे शहर भेजनी है अपनी बाइक? जानिए पार्सल के नियम, खर्च और ज़रूरी कागज़ात 

SA News
Last updated: September 8, 2026 1:10 pm
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Indian Railways Bike Parcel
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नौकरी बदलने, पढ़ाई करने या किसी अन्य कारण से जब लोग दूसरे शहर शिफ्ट होते हैं, तो सबसे बड़ी समस्या अपनी बाइक या स्कूटर को साथ ले जाने की होती है। ट्रेन से सफर करना जितना आसान और मज़ेदार है, अपनी गाड़ी को ट्रेन से भेजना भी उतना ही सुविधाजनक हो सकता है, बशर्ते आपको भारतीय रेलवे के सही नियमों की जानकारी हो। अक्सर लोग रेलवे स्टेशन के पार्सल ऑफिस के नियमों को लेकर कन्फ्यूज़ रहते हैं और बिना सही जानकारी के उन्हें काफी भागदौड़ करनी पड़ती है। रेलवे ने टू-व्हीलर के ट्रांसपोर्टेशन के लिए पार्सल और लगेज के तहत स्पष्ट नियम, फीस और दस्तावेजों की सूची तय की हुई है। 

Contents
  • Indian Railways Two-Wheeler Transport मुख्य बिंदु
  • फ्री लगेज में नहीं ले जा सकते गाड़ी
  • कैसे करें ट्रेन से अपना टू-व्हीलर पार्सल?
  • पार्सल ऑफिस की प्रक्रिया और अनिवार्य कागज़ात 
  • पेट्रोल खाली करना और पैकिंग का खर्च
  • किराया, रसीद और डिलीवरी की शर्तें
  • FAQs about Indian Railways Two-Wheeler Transport

Indian Railways Two-Wheeler Transport मुख्य बिंदु

  • साइकिल या बाइक को ‘फ्री लगेज’ नहीं माना जाता है, इसके लिए पार्सल या लगेज के तौर पर अलग से बुकिंग करनी पड़ती है।
  • गाड़ी बुक करते समय ओरिजिनल आरसी (RC), फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस और एक वैलिड आईडी दिखाना अनिवार्य।
  • रेलवे के सुरक्षा नियमों के तहत गाड़ी पार्सल करते समय पेट्रोल की टंकी पूरी तरह से खाली होना जरूरी।
  • अगर गाड़ी का मालिक कोई और है, तो ओरिजिनल कागजात के साथ अथॉरिटी लेटर होना भी बेहद जरूरी।
  • स्टेशन पर मौजूद वेंडर द्वारा गाड़ी की साइज़ के अनुसार पैकिंग का चार्ज 300 से 600 रुपये तक लिया जाता है।
  • अगर आप डेस्टिनेशन स्टेशन पर 6 दिन से ज़्यादा समय तक अपनी गाड़ी रिसीव नहीं करते हैं, तो रेलवे एक्स्ट्रा चार्ज या जुर्माना वसूलता है।

फ्री लगेज में नहीं ले जा सकते गाड़ी

भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, साइकिल या मोटरसाइकिल को आपके सामान्य सूटकेस या बैग की तरह ‘फ्री लगेज’ का हिस्सा नहीं माना जाता है। आप भले ही किसी भी क्लास में सफर कर रहे हों, टू-व्हीलर को हमेशा एक अलग पार्सल या लगेज के तौर पर बुक करना पड़ता है। बुकिंग के बाद इसे ट्रेन के गार्ड वाले डिब्बे में रखा जाता है। हालांकि, अगर आपके पास फोल्डिंग साइकिल है जो आसानी से एक बैग में आ जाती है, तो उसे कुछ शर्तों के साथ केबिन में ले जाने की इजाज़त मिल सकती है।

कैसे करें ट्रेन से अपना टू-व्हीलर पार्सल?

अगर आप उसी ट्रेन से सफर कर रहे हैं जिससे आपकी बाइक जा रही है, तो इसे ‘लगेज’ के रूप में बुक किया जा सकता है। इसके लिए यात्रा वाले दिन अपनी ट्रेन छूटने से करीब दो-तीन घंटे पहले स्टेशन के पार्सल ऑफिस पहुंचना होता है। वहां अपना कंफर्म टिकट और आईडी दिखाकर फीस भरनी होती है और लगेज की रसीद लेनी होती है। अगर बिना रसीद कटवाए गाड़ी को प्लेटफॉर्म या डिब्बे में ले जाया जाता है, तो चेकिंग स्टाफ इसे ज़ब्त कर सकता है और पार्सल चार्ज का कई गुना जुर्माना भी लगा सकता है।

पार्सल ऑफिस की प्रक्रिया और अनिवार्य कागज़ात 

बाइक को पार्सल करने के लिए सबसे पहले बुकिंग ऑफिस से एक फॉर्म लेना होता है, जिसमें आपको मोबाइल नंबर, डेस्टिनेशन और गाड़ी की सारी डिटेल्स भरनी होती हैं। इसके बाद रेलवे अधिकारी गाड़ी का वजन करते हैं और उसकी जांच करते हैं। 

कागजातों की बात करें तो आपके पास आधार कार्ड, चालू मोबाइल नंबर, गाड़ी की आरसी (RC) और फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस होना बेहद ज़रूरी है। फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस इसलिए मांगा जाता है ताकि पार्सल के दौरान गाड़ी को कोई नुकसान होने पर क्लेम किया जा सके। अगर गाड़ी किसी दूसरे के नाम पर है, तो केवल फोटोकॉपी से काम नहीं चलता, बल्कि ओरिजिनल कागजात या अथॉरिटी लेटर की आवश्यकता होती है।

पेट्रोल खाली करना और पैकिंग का खर्च

रेलवे सुरक्षा नियमों को लेकर बहुत सख्त है, इसलिए आपकी बाइक की टंकी का पेट्रोल पूरी तरह से खाली होना चाहिए। पार्सल करने से पहले बाइक के साइड मिरर भी हटा लेने चाहिए। स्क्रैच से बचाने के लिए गाड़ी की मजबूत पैकिंग करवानी होती है। रेलवे स्टेशन पर ही मौजूद वेंडर गाड़ी के साइज और वजन के हिसाब से पैकिंग के लिए लगभग 300 रुपये से लेकर 600 रुपये तक चार्ज करते हैं।

किराया, रसीद और डिलीवरी की शर्तें

आपकी बाइक का किराया गाड़ी के वजन, तय की जाने वाली दूरी और ट्रेन की कैटेगरी पर निर्भर करता है। एक अनुमान के अनुसार, 800 किलोमीटर दूर बाइक भेजने का कुल खर्च पार्सल और पैकिंग मिलाकर लगभग 3,000 रुपये के आसपास आ सकता है। बुकिंग के बाद मिलने वाली ओरिजिनल रसीद को बहुत हिफाजत से रखना चाहिए, क्योंकि डेस्टिनेशन पर यही रसीद दिखाकर आपको आपकी बाइक वापस मिलती है। 

एक बात का ध्यान रखें, गाड़ी को समय पर रिसीव कर लें। यदि गाड़ी 6 दिन से ज्यादा स्टेशन पर खड़ी रहती है, तो रेलवे एक्स्ट्रा चार्ज वसूलता है। इसके अलावा, यह भी जरूरी नहीं है कि आपकी गाड़ी उसी ट्रेन से आए जिससे आप सफर कर रहे हैं, जगह न होने पर रेलवे इसे किसी अन्य ट्रेन से भी भेज सकता है।

FAQs about Indian Railways Two-Wheeler Transport

1. क्या ट्रेन में सफर करते समय बाइक को अपने साथ फ्री ले जा सकते हैं?

जी नहीं, साइकिल या बाइक को ‘फ्री लगेज’ नहीं माना जाता है; इसे ले जाने के लिए पार्सल या लगेज के तौर पर अलग से बुकिंग करानी पड़ती है।

2. रेलवे से बाइक पार्सल करने के लिए कौन-से डॉक्यूमेंट अनिवार्य हैं?

पार्सल बुकिंग के लिए आधार कार्ड, चालू मोबाइल नंबर, बाइक की ऑरिजिनल आरसी (RC) और फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस का होना बेहद जरूरी है।

3. क्या बाइक की टंकी में थोड़ा पेट्रोल छोड़कर पार्सल किया जा सकता है?

बिल्कुल नहीं, रेलवे सुरक्षा नियमों के तहत आग लगने के खतरे से बचने के लिए गाड़ी की पेट्रोल टंकी पूरी तरह से खाली होनी चाहिए।

4. रेलवे स्टेशन पर बाइक की पैकिंग करवाने का औसतन कितना खर्च आता है?

स्टेशन पर मौजूद वेंडर गाड़ी के आकार और वजन के हिसाब से पैकिंग के लिए 300 रुपये से 600 रुपये तक का चार्ज लेते हैं।

5. ट्रेन से 800 किमी दूर बाइक भेजने का कितना किराया लगता है?

Ans: 800 किलोमीटर की दूरी के लिए बाइक भेजने का कुल खर्च पार्सल और पैकिंग मिलाकर अनुमानित रूप से 3,000 रुपये के आसपास आता है।

6. यदि डेस्टिनेशन स्टेशन पर गाड़ी समय पर रिसीव न करें तो क्या होगा?

डेस्टिनेशन स्टेशन पर पहुंचने के बाद यदि आपकी गाड़ी 6 दिन से ज़्यादा समय तक वहां खड़ी रहती है, तो रेलवे आपसे एक्स्ट्रा चार्ज या जुर्माना वसूलेगा।

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