बाड़मेर/जोधपुर। राजस्थान की युवा कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। परिवार का आरोप है कि एक गलत या जहरीले इंजेक्शन के कारण उनकी जान चली गई। अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है और कई लोग सीबीआई जांच की भी मांग कर रहे हैं।
- गले में खराश के इलाज के लिए बुलाया गया था कंपाउंडर
- अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी मौत
- “मुझे न्याय दिलाना” – पिता का दावा
- पोस्टमॉर्टम और जांच को लेकर विवाद
- पहले से विवादों में रहा है नाम
- बचपन से भक्ति की ओर झुकाव
- आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जीवन का उद्देश्य
- अब उठ रही है निष्पक्ष जांच की मांग
- निजता के उल्लंघन पर गंभीर सवाल
साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ (जिन्हें गुरुजी के नाम से जाना जाता है) का कहना है कि इंजेक्शन लगाए जाने के महज 30 सेकंड के भीतर उनकी बेटी की हालत अचानक बिगड़ गई। उन्होंने बताया कि प्रेम बाईसा को सांस लेने में परेशानी होने लगी, वे चीखने लगीं और मुंह-नाक से कफ निकलने लगा। कुछ ही पलों में वे बेहोश हो गईं और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।
गले में खराश के इलाज के लिए बुलाया गया था कंपाउंडर
वीरमनाथ के अनुसार, 28 जनवरी की सुबह प्रेम बाईसा को हल्की गले की खराश और जुकाम की शिकायत थी। अगले कुछ दिनों में उनके बड़े धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तावित थे, जिनमें देश के कई प्रमुख साधुओं और राजनेताओं की मौजूदगी संभावित थी। इसी कारण उन्होंने स्थानीय स्तर पर इलाज कराने का फैसला किया।
इलाज के लिए एक कंपाउंडर को आश्रम बुलाया गया, जो पहले भी दवाइयां दे चुका था। इस बार उसने इंजेक्शन लगाया। परिवार का आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही प्रेम बाईसा की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी मौत
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में सीपीआर देने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पूरी घटना कुछ ही मिनटों में घटित हो गई। पिता का दावा है कि कंपाउंडर ने फोन पर इंजेक्शन को “सामान्य” बताया था और कहा था कि वह स्थिति संभाल लेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
“मुझे न्याय दिलाना” – पिता का दावा
वीरमनाथ ने दावा किया कि अंतिम क्षणों में प्रेम बाईसा ने उनसे कहा था – *“गुरुजी, मुझे न्याय दिलाना।”* पिता के अनुसार, इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए घटना के लगभग चार घंटे बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की गई।
उनका कहना है कि यह मामला किसी प्रकार की मारपीट या सामान्य तबीयत बिगड़ने का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर गलत इलाज और संदिग्ध इंजेक्शन से जुड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कुछ लोगों ने हंगामा किया, मोबाइल छीन लिया और शव को एम्बुलेंस से आश्रम ले जाने में बाधा डाली।
पोस्टमॉर्टम और जांच को लेकर विवाद
परिवार का कहना है कि वे मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराना चाहते थे, ताकि मौत के असली कारण सामने आ सकें। हालांकि बाद में परंपरा के अनुसार आश्रम परिसर में समाधि दी गई। इस फैसले को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
पहले से विवादों में रहा है नाम
प्रेम बाईसा इससे पहले भी एक विवाद के कारण चर्चा में आ चुकी थीं। जुलाई 2025 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसे लेकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई थी। बाद में उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बताया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति उनके पिता थे और वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया।
इस मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। साध्वी ने उस समय सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे अपनी सच्चाई साबित करने के लिए हर तरह की परीक्षा देने को तैयार हैं।
बचपन से भक्ति की ओर झुकाव
पिता के अनुसार, प्रेम बाईसा का बचपन संघर्षों में बीता। बहुत कम उम्र में मां का साया उठ गया और वे ननिहाल में पली-बढ़ीं। बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर था। उन्होंने कम उम्र में कथा वाचन शुरू किया और देश के कई हिस्सों में धार्मिक कथाएं कीं। साथ ही वे स्नातक की पढ़ाई भी कर रही थीं।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जीवन का उद्देश्य
प्रत्येक आत्मा मूल रूप से परमात्मा के लोक सतलोक की निवासी है। कहा जाता है कि हम सभी वहां से काल के लोक में आए हैं, जहां यह संसार हमारा स्थायी निवास नहीं है। इसी कारण जीवन में दुख, अशांति और अस्थिरता बनी रहती है। परमात्मा की भक्ति के मार्ग पर चलकर ही आत्मा को यहां के कष्टों से मुक्ति मिलती है और पुनः अपने वास्तविक स्थान, सतलोक, की ओर लौटने का मार्ग मिलता है। यही कारण है कि अच्छी आत्माएं परमात्मा प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर होती हैं।
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अब उठ रही है निष्पक्ष जांच की मांग
साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इंजेक्शन सही था? क्या इलाज में लापरवाही हुई? क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हुई है? इन्हीं सवालों के जवाब पाने के लिए अब स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
निजता के उल्लंघन पर गंभीर सवाल
किसी व्यक्ति का निजी वीडियो रिकॉर्ड करना, सीसीटीवी डेटा चुराना या बिना अनुमति सार्वजनिक रूप से वायरल करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनन भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
खासतौर पर जब ऐसा कृत्य किसी संस्थान में काम करने वाला कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करके करे और वीडियो वायरल करने या बदनाम करने की धमकी देकर पैसे मांगे, तो यह विश्वासघात और आपराधिक कृत्य माना जाता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता होती है, ताकि समाज में किसी की निजता और सम्मान के साथ खिलवाड़ न हो।

