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Home » One Nation One Election क्या है? क्या भारत में यह लागू हो सकता है?

Politics

One Nation One Election क्या है? क्या भारत में यह लागू हो सकता है?

SA News
Last updated: April 27, 2026 11:18 am
SA News
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One Nation One Election क्या है क्या भारत में यह लागू हो सकता है
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“One Nation One Election” या “समकालिक चुनाव” का सीधा सा मतलब है—देश में चुनाव अलग-अलग समय पर कराने के बजाय एक ही समय पर कराए जाएं।

Contents
  • One Nation One Election क्या है?
  • यह विचार शुरू कहाँ से हुआ?
  • क्या यह भारत में लागू हो सकता है?
  • इसके फायदे क्या हो सकते हैं?
  • इसकी चुनौतियाँ क्या हैं?
    • अलग-अलग कार्यकाल
    • सरकार का बीच में गिरना
    • संघीय ढांचा
    • राजनीतिक विविधता

सरकार की उच्च स्तरीय समिति (HLC) के अनुसार, इसका दायरा लोकसभा, सभी राज्य विधानसभाओं और आगे चलकर स्थानीय निकायों—जैसे नगरपालिकाओं और पंचायतों—तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, 2024 में पेश किए गए संविधान (129वें संशोधन) विधेयक में फिलहाल मुख्य फोकस लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव को एक साथ कराने पर है।

One Nation One Election क्या है?

अभी भारत में चुनाव एक तय समय पर एक साथ नहीं होते। लोकसभा और अलग-अलग राज्यों के विधानसभा चुनाव उनके अपने कार्यकाल और राजनीतिक हालात के हिसाब से होते रहते हैं।

इसी वजह से देश में लगभग हर साल कहीं न कहीं चुनाव चलते रहते हैं।

यहीं से “One Nation One Election” का विचार आता है। इसका मकसद है एक ऐसा चुनावी चक्र बनाना, जिसमें लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं, ताकि बार-बार चुनाव कराने की जरूरत न पड़े।

HLC के सुझाव के मुताबिक, इसे चरणों में लागू किया जा सकता है—पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ लाए जाएं, और बाद में स्थानीय निकायों को इसमें जोड़ा जाए।

यह विचार शुरू कहाँ से हुआ?

इस मुद्दे को गंभीरता से देखने के लिए केंद्र सरकार ने 2 सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई।

इस समिति ने:

  • करीब 65 बैठकें कीं
  • राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से बात की
  • और 14 मार्च 2024 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी

सरकार ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार भी कर लिया है।

इसके बाद दिसंबर 2024 में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया गया, जिसमें चुनावों को एक साथ कराने के लिए जरूरी संवैधानिक बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है।

क्या यह भारत में लागू हो सकता है?

सीधा जवाब है—हाँ, लेकिन आसान नहीं है।

इसे लागू करने के लिए:

  • संविधान में बदलाव करना होगा
  • सभी राजनीतिक दलों की सहमति जरूरी होगी
  • और पूरे चुनावी सिस्टम को नए तरीके से व्यवस्थित करना पड़ेगा

सरकार ने भी साफ किया है कि इस पर आगे बढ़ने से पहले सभी कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की जांच की जाएगी।

एक अहम बात यह भी है कि अगर किसी राज्य की सरकार बीच में गिर जाती है या विधानसभा भंग हो जाती है, तो उस स्थिति में पूरे सिस्टम को कैसे संभाला जाएगा।

HLC ने इसके लिए “unexpired term” का सुझाव दिया है—यानी ऐसे मामलों में सिर्फ बचे हुए कार्यकाल के लिए चुनाव कराए जाएं।

इसके फायदे क्या हो सकते हैं?

इस विचार के समर्थन में कई तर्क दिए जाते हैं:

  • बार-बार चुनाव कराने का खर्च कम होगा
  • प्रशासन और सुरक्षा बलों पर लगातार पड़ने वाला दबाव घटेगा
  • आदर्श आचार संहिता बार-बार लागू नहीं होगी, जिससे नीतिगत काम तेजी से हो सकेंगे
  • वोटर्स को बार-बार मतदान के लिए नहीं जाना पड़ेगा, यानी voter fatigue कम होगा
  • और सबसे अहम, शासन में स्थिरता और निरंतरता बढ़ेगी

समर्थकों का मानना है कि इससे सरकारें विकास और नीतियों पर ज्यादा फोकस कर पाएंगी।

इसकी चुनौतियाँ क्या हैं?

जहां फायदे हैं, वहीं कुछ बड़ी चुनौतियाँ भी हैं:

अलग-अलग कार्यकाल

लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल एक जैसा नहीं होता, जिससे उन्हें एक साथ लाना मुश्किल है।

सरकार का बीच में गिरना

अगर किसी राज्य या केंद्र सरकार का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अंत हो जाए, तो फिर चुनावी तालमेल बिगड़ सकता है।

संघीय ढांचा

भारत एक संघीय देश है, जहां हर राज्य की अपनी राजनीतिक स्थिति और मुद्दे होते हैं। ऐसे में सभी चुनाव एक साथ कराना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है।

राजनीतिक विविधता

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियां होने के कारण एक ही समय पर चुनाव कराना हमेशा संभव नहीं होता।

कुल मिलाकर, One Nation One Election एक बड़ा और महत्वपूर्ण सुधार का विचार है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित बनाना है।

यह पूरी तरह असंभव नहीं है—सरकार ने इस दिशा में कदम भी बढ़ाए हैं। लेकिन इसे लागू करने के लिए बड़े स्तर पर संवैधानिक बदलाव, राजनीतिक सहमति और ठोस तैयारी की जरूरत होगी।

इसलिए अभी के लिए इसे एक संभावना के रूप में देखा जा सकता है, न कि तुरंत लागू होने वाली व्यवस्था के रूप में।

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