SA NewsSA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
SA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Politics
  • Educational
  • Tech
  • History
  • Events
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Follow US
© 2024 SA News. All Rights Reserved.

Home » कुण्डलिनी शक्ति: अध्यात्म का मूल आधार

Spirituality

कुण्डलिनी शक्ति: अध्यात्म का मूल आधार

SA News
Last updated: March 14, 2025 12:35 pm
SA News
Share
कुण्डलिनी शक्ति: अध्यात्म का मूल आधार
SHARE

भारतीय योग और तंत्र परंपरा में कुण्डलिनी शक्ति को अत्यंत गूढ़ और रहस्यमय माना जाता है। यह शक्ति हमारे अस्तित्व की आधारभूत ऊर्जा है, जो मेरुदंड के मूल में स्थित होती है और जब यह जागृत होती है, तो व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति के शिखर तक पहुँच सकता है। इसे आत्मबोध, चेतना की परिपूर्णता और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के जागरण का स्रोत माना गया है। कुण्डलिनी शक्ति को आत्म-साक्षात्कार का द्वार भी कहा जाता है। यह न केवल आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाती है, बल्कि मानसिक और शारीरिक संतुलन को भी सुदृढ़ करती है।

Contents
  • कुण्डलिनी शक्ति का स्वरूप
  • सात चक्र और कुण्डलिनी जागरण
  • कुण्डलिनी जागरण की विधियाँ
    • 1. योग एवं ध्यान
    • 2. प्राणायाम
    • 3. मंत्र साधना
    • 4. शक्ति-पात
    • 5. मुद्रा और बंध
    • 6. गुरु की कृपा
    • 7. भक्ति योग
  • कुण्डलिनी जागरण के लाभ
    • 1. मानसिक एवं शारीरिक विकास
    • 2. आध्यात्मिक उत्थान
    • 3. रोगों से मुक्ति
    • 4. सकारात्मक ऊर्जा का संचार
  • कुण्डलिनी जागरण से जुड़ी सावधानियाँ
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण
  • संत रामपाल जी महाराज का तत्वज्ञान
  • निष्कर्ष

इस लेख में, हम कुण्डलिनी शक्ति की प्रकृति, उसकी जागृति की प्रक्रिया, उसके लाभ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

कुण्डलिनी शक्ति का स्वरूप

संस्कृत में “कुण्डलिनी” शब्द का अर्थ होता है “सर्पिणी” या कुंडली मारकर सोई हुई ऊर्जा। यह शक्ति मूलाधार चक्र (Root Chakra) में सुप्त अवस्था में रहती है और जब साधक उचित साधना द्वारा इसे जाग्रत करता है, तो यह क्रमशः ऊपर उठती हुई सहस्रार चक्र (Crown Chakra) तक पहुँचती है। इस यात्रा में यह विभिन्न सात चक्रों को सक्रिय करती है, जिससे साधक में विभिन्न आध्यात्मिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं।

सात चक्र और कुण्डलिनी जागरण

  1. मूलाधार चक्र (Root Chakra) – आत्मविश्वास और स्थिरता प्रदान करता है।
  2. स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra) – रचनात्मकता और इच्छाशक्ति को बढ़ाता है।
  3. मणिपुर चक्र (Solar Plexus Chakra) – आत्मबल और मानसिक शक्ति का केंद्र।
  4. अनाहत चक्र (Heart Chakra) – प्रेम और करुणा को जागृत करता है।
  5. विशुद्धि चक्र (Throat Chakra) – संचार और सत्य अभिव्यक्ति का स्रोत।
  6. आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) – अंतर्ज्ञान और मानसिक स्पष्टता को विकसित करता है।
  7. सहस्रार चक्र (Crown Chakra) – परम चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ता है।

जब कुण्डलिनी शक्ति सहस्रार चक्र तक पहुँचती है, तो साधक परम ज्ञान, आनंद और मुक्ति की अवस्था प्राप्त करता है।

कुण्डलिनी जागरण की विधियाँ

1. योग एवं ध्यान

कुण्डलिनी जागरण के लिए नियमित योग और ध्यान अत्यंत आवश्यक हैं। विशेष रूप से हठयोग, राजयोग, और क्रियायोग इस प्रक्रिया में सहायक होते हैं।

2. प्राणायाम

सही ढंग से प्राणायाम करने से शरीर में ऊर्जा संतुलित होती है और कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने में सहायता मिलती है। अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, और कपालभाति प्राणायाम इस दिशा में प्रभावी माने जाते हैं।

3. मंत्र साधना

कुछ विशेष मंत्रों का जाप कुण्डलिनी जागरण में सहायक होता है। “ॐ”, “सोऽहं”, और “गायत्री मंत्र” जैसे मंत्र उच्च ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।

4. शक्ति-पात

कई आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा अपने शिष्यों को कुण्डलिनी शक्ति का अनुभव कराने के लिए “शक्ति-पात” नामक विधि का उपयोग किया जाता है। इसमें गुरु की दिव्य ऊर्जा शिष्य को स्थानांतरित की जाती है।

5. मुद्रा और बंध

योग में कुछ विशेष मुद्राएँ (जैसे केचित मुद्रा) और बंध (जैसे मूलबंध, जालंधर बंध) कुण्डलिनी शक्ति को जाग्रत करने में मदद करते हैं।

6. गुरु की कृपा

कुण्डलिनी जागरण के लिए सही गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि यह एक अत्यंत शक्तिशाली और संवेदनशील प्रक्रिया है।

7. भक्ति योग

भक्ति योग को सहज और श्रेष्ठ मार्ग के रूप में जाना जाता है जो सच्चे सतगुरू के मार्गदर्शन से सहज की जागृत होती है और साधक को शारीरिक मानसिक और अध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और मोक्ष तक पहुंच जाता है।

कुण्डलिनी जागरण के लाभ

1. मानसिक एवं शारीरिक विकास

कुण्डलिनी जागरण से मानसिक स्पष्टता, स्मरण शक्ति और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है। यह शरीर में ऊर्जा और संतुलन बनाए रखता है।

2. आध्यात्मिक उत्थान

यह साधक को आत्मबोध और ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ता है, जिससे वह अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान पाता है।

3. रोगों से मुक्ति

कुण्डलिनी ऊर्जा शरीर की आंतरिक शुद्धि करती है और कई शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों को दूर करने में सहायक होती है।

4. सकारात्मक ऊर्जा का संचार

यह जीवन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति को बढ़ाती है।

कुण्डलिनी जागरण से जुड़ी सावधानियाँ

कुण्डलिनी शक्ति अत्यंत प्रबल होती है, और यदि इसे अनुचित तरीके से जागृत किया जाए, तो इसके दुष्परिणाम हो सकते हैं, जैसे – मानसिक असंतुलन, भावनात्मक अस्थिरता और शारीरिक कष्ट। इसलिए यह आवश्यक है कि साधना किसी अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही की जाए।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आधुनिक विज्ञान भी कुण्डलिनी शक्ति की उपस्थिति को स्वीकार कर रहा है। न्यूरोसाइंस के अनुसार, कुण्डलिनी जागरण के दौरान मस्तिष्क के कुछ विशिष्ट हिस्से सक्रिय होते हैं, जिससे साधक की जागरूकता और मानसिक क्षमताएँ बढ़ती हैं।

योग विज्ञान के अनुसार, यह ऊर्जा नाड़ी तंत्र (Nervous System) में प्रवाहित होती है और पीनियल ग्लैंड (Pineal Gland) को सक्रिय कर सकती है, जो आत्मबोध और उच्च चेतना के लिए महत्वपूर्ण होती है।

संत रामपाल जी महाराज का तत्वज्ञान

वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र तत्वदर्शी संत हैं, जो शास्त्रानुसार सतभक्ति और साधना पद्धति का मार्ग दिखा रहे हैं। उनके बताए गए आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर लाखों-करोड़ों लोग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ सहज ही प्राप्त कर रहे हैं। असाध्य रोगों जैसे कैंसर, एड्स आदि से मुक्ति पाने वाले उनके अनुयायी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन चमत्कारों को देखकर वैज्ञानिक और डॉक्टर भी आश्चर्यचकित हैं। यह सभी चमत्कार केवल तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों को ही कैसे प्राप्त हो रहे हैं? इसका उत्तर उनकी आध्यात्मिक शक्ति के विशाल भंडार में निहित है।

आज संपूर्ण विश्व में संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जो उनके दिव्य ज्ञान, अलौकिक शक्तियों और चमत्कारों को प्रमाणित करता है।

निष्कर्ष

कुण्डलिनी शक्ति अध्यात्म का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार और उच्च चेतना की अवस्था तक ले जाती है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है, बल्कि मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संतुलन भी बनाए रखती है।

वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज सभी धर्म ग्रंथों पवित्र गीता , कुरआन, बाइबिल, गुरुग्रंथ साहिब, वेद और पुराणों से शास्त्रानुसार प्रमाणित भक्ति और साधना पद्धति बता रहे हैं। उनके लाखों-करोड़ों अनुयायियों को प्राप्त चमत्कारिक लाभों ने उनके जीवन को खुशहाल और अर्थपूर्ण बना दिया है।

हालांकि, कुण्डलिनी जागरण एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई विधि से यह सहज ही ऊर्ध्वगामी हो जाती है तथा सांसारिक लाभ स्वतः ही प्राप्त हो जाते हैं, जिनके लिए गुरु आज्ञा, अनुशासन और मर्यादा का पालन अनिवार्य है।

आप भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताए गए सतभक्ति और साधना पद्धति को समझने के लिए Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें और वेबसाइट www.jagatgururampalji.org पर विजिट करें।

Share This Article
Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
BySA News
Follow:
Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.
Previous Article होली पर दिल्ली-एनसीआर में बारिश की संभावना जानें मौसम का ताजा हाल होली पर दिल्ली-एनसीआर में बारिश की संभावना: जानें मौसम का ताजा हाल
Next Article Tech Industry in 2025 Opportunities and Challenges for Freshers Tech Industry in 2025: Opportunities and Challenges for Freshers
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Popular Posts

Unnoticed Miracle of God: The Human Physiology and Anatomy

The Human Physiology and Anatomy: Human body is a complex structure made of different types…

By SA News

पीएम नरेंद्र मोदी ने किया जेड मोड़ सुरंग का उद्घाटन

13 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के सोनमार्ग में स्थित जेड मोड़ सुरंग…

By SA News

10 Mind blowing Advantages of Mixed Learning for Present day Mentoring

Mixed learning hardens standard eye to eye coaching with web based learning contraptions, making planning…

By SA News

You Might Also Like

संत रामपाल जी महाराज का बोध दिवस: 11 सतलोक आश्रमों में 35 लाख श्रद्धालुओं ने भंडारा किया
Spirituality

संत रामपाल जी महाराज का बोध दिवस: 11 सतलोक आश्रमों में 35 लाख श्रद्धालुओं ने भंडारा किया, अद्भुत आध्यात्मिक समागम का हुआ आयोजन

By SA News
नुआखाई त्योहार 2025 पवित्र शास्त्र नुआखाई के बारे में क्या कहते हैं
Spirituality

नुआखाई त्योहार 2025: पवित्र शास्त्र नुआखाई के बारे में क्या कहते हैं?

By SA News
सच्ची भक्ति बनाम अंधविश्वास: आध्यात्मिक जीवन में संतुलन की आवश्यकता
Spirituality

सच्ची भक्ति बनाम अंधविश्वास: आध्यात्मिक जीवन में संतुलन की आवश्यकता

By SA News
jeene-ki-rah-book-in-brel-lipi
Spirituality

ब्रेल लिपि में प्रकाशित हुई ‘जीने की राह’ पुस्तक | बैंगलोर में 85 पुस्तकें हुईं वितरित

By SA News
SA NEWS LOGO SA NEWS LOGO
748kLike
340kFollow
13kPin
216kFollow
1.75MSubscribe
3kFollow

About US


Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.

Top Categories
  • Politics
  • Health
  • Tech
  • Business
  • World
Useful Links
  • About Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Copyright Notice
  • Contact Us
  • Official Website (Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj)

© SA News 2025 | All rights reserved.