Jal Jeevan Mission Scam: राजस्थान में चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में गिरफ्तार पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट ने शुक्रवार को तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया। ACB (एन्टी-करप्शन ब्यूरो) ने अदालत से पाँच दिन की रिमांड की मांग की थी, हालांकि न्यायालय ने आंशिक रूप से इसे स्वीकार करते हुए तीन दिन की अनुमति प्रदान की। इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान एसीबी अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि मामले में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और धन के लेनदेन के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन पहलुओं की गहन पड़ताल के लिए आरोपी से विस्तृत पूछताछ आवश्यक है।
- एसीबी कोर्ट पहुंचते ही सुबोध अग्रवाल का बड़ा बयान- “खुद आया हूं सहयोग के लिए”
- गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठे सवाल, वकीलों ने बताया नियमों का उल्लंघन।
- जल जीवन मिशन में टेंडर अनियमितताओं पर एसीबी की जांच तेज।
- फरार पूर्व आईएएस की तलाश में 51 दिनों तक चला सर्च ऑपरेशन, 260 ठिकानों पर दबिश।
सुबोध अग्रवाल बोले सरेंडर नहीं, सहयोग के लिए आया हूं
जयपुर में एसीबी कोर्ट में पेशी से पहले जब मीडियाकर्मियों ने पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल से सरेंडर को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो आत्मसमर्पण किया है और न ही उन्हें जबरन लाया गया है। अग्रवाल ने कहा, “मैं अपनी इच्छा से जांच में सहयोग करने के लिए आया हूं।
मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है- सत्यमेव जयते।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग करने के लिए तैयार हैं और उन्हें उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, जबकि जांच एजेंसी आगे की पूछताछ में जुटी हुई है।
वकीलों का दावा- सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए
पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के वकीलों ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यह मामला लंबे समय से लंबित है, ऐसे में अब अचानक गिरफ्तारी की आवश्यकता पर भी सवाल उठते हैं। वकीलों के अनुसार, न तो अभियुक्त और न ही उनके कानूनी प्रतिनिधियों को गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण बताए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार, रिमांड पेशी से पहले अभियुक्त को गिरफ्तारी के कारणों और रिमांड आवेदन की प्रति उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया का पालन न किया जाना कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
Jal Jeevan Mission Scam – टेंडर में गड़बड़ी के आरोप
राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले के तहत ACB ने गुरुवार को पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को नई दिल्ली से हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें जयपुर लाकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। अग्रवाल पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और अपने पद के कथित दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर लगभग 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
इस मामले में एसीबी अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। इन फरार आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
Also Read: राजस्थान में फर्जी डिग्री घोटाला: शिक्षा का शर्मनाक व्यापार, 700 फर्जी डिग्रियां बेचकर ठगे 10 करोड़
सुबोध अग्रवाल की तलाश में 260 ठिकानों पर छापेमारी
राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में फरार चल रहे रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को पकड़ने के लिए ACB ने व्यापक अभियान चलाया। एजेंसी ने 51 दिनों के दौरान 18 टीमों का गठन कर लगभग 260 ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन इसके बावजूद वे लगातार गिरफ्त से बाहर बने रहे। इस अवधि में उन्होंने 10 से अधिक स्थान बदलकर जांच से बचने का प्रयास किया।
बाद में एसीबी ने अदालत में संदिग्ध संपत्तियों की सूची प्रस्तुत कर स्थायी वारंट जारी करवाए। न्यायालय द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के अगले ही दिन सुबोध अग्रवाल सामने आ गए। अब उनकी संपत्तियों के कुर्क होने की आशंका भी जताई जा रही है। एसीबी की कार्रवाई के तहत सुबोध अग्रवाल के साथ-साथ एसई मुकेश गोयल, जितेंद्र शर्मा और निजी व्यक्ति संजीव गुप्ता को भी भगोड़ा घोषित किया गया था। अदालत के आदेश के बाद इन सभी की संदिग्ध संपत्तियों को चिन्हित कर कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इनमें से सुबोध अग्रवाल तो सामने आ चुके हैं, जबकि शेष तीन आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।

