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कृषि में ड्रोन का बढ़ता उपयोग: खेती की नई उड़ान

SA News
Last updated: February 24, 2026 11:35 am
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कृषि में ड्रोन का बढ़ता उपयोग: खेती की नई उड़ान
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भारत जैसे कृषि प्रधान देश में खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की जीवनरेखा है। वर्तमान परिदृश्य में बदलते समय के साथ  साथ खेती के तौर-तरीकों में भी बदलाव आ रहा है।  वर्तमान में पारंपरिक हल और ट्रैक्टर के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीक भी खेतों तक पहुंच चुकी है। इन्हीं तकनीकों में सबसे चर्चित और उपयोगी नवाचार है – कृषि ड्रोन।

Contents
  • ड्रोन, क्या है
  • फसल की निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव
  • कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव में सटीकता
  • लागत और समय की भी बचत 
  • डिजिटल खेती की ओर कदम
  • चुनौतियां और संभावनाएं

ड्रोन, क्या है

ड्रोन जिन्हें हम आम भाषा में उड़ने वाली मशीन या मानवरहित विमान कहा जाता है, आज किसानों के लिए खेती में भरोसेमंद सहायक बनते जा रहे हैं। पहले जहां खेतों की निगरानी, कीटनाशक छिड़काव या फसल का आकलन करने में कई घंटों का समय और काफी मजदूरों की आवश्यकता होती थी, वहीं अब ड्रोन यह काम कुछ ही मिनटों में कर रहे हैं।

फसल की निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव

ड्रोन तकनीक का  खेती सबसे बड़ा लाभ है फसल की सटीक निगरानी। उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे और सेंसर से लैस ड्रोन खेत के ऊपर उड़कर फसलों की स्थिति की स्पष्ट तस्वीरें और डेटा उपलब्ध कराते हैं। इससे किसान यह जान पाते हैं कि खेत में किस हिस्से में फसल स्वस्थ है और कहां पर बीमारी है या  फसल पर किस प्रकार का प्रकोप है।

पहले किसानों को खेत में घूम-घूमकर निरीक्षण करना पड़ता था, जिससे समय और श्रम दोनों अधिक लगते थे। अब ड्रोन के जरिए बड़ी से बड़ी जमीन का सर्वेक्षण कम समय में संभव हो गया है। इससे फसल की शुरुआती अवस्था में ही समस्याओं की पहचान हो जाती है और समय रहते उपचार किया जा सकता है।

कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव में सटीकता

कृषि में ड्रोन का एक महत्वपूर्ण उपयोग कीटनाशक और उर्वरकों के छिड़काव में  भी हो रहा है। पारंपरिक तरीकों में दवा का असमान वितरण होता है, जिससे कभी अधिक तो कभी कम मात्रा में छिड़काव होता है। इस तरह असमानता से फसल को  कभी कभी नुकसान भी हो सकता है और लागत भी बढ़ती है।

कम भूमि में दोगुना उत्पादन देने वाली ऊर्ध्वाधर खेती बनी आधुनिक कृषि का नया विकल्प

ड्रोन की मदद से निर्धारित मात्रा में और सही अनुपात में सटीक स्थान पर छिड़काव संभव है। इससे दवाइयों की बचत होती है, लागत कम होती है और पर्यावरण पर भी कम प्रभाव पड़ता है। साथ ही, किसानों को जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क में आने से भी राहत मिलती है, जिससे उनका स्वास्थ्य  भी सुरक्षित रहता है।

लागत और समय की भी बचत 

आज के समय में देखा जा रहा है खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। मजदूरी, बीज, खाद और पेस्टिसाइड दवाइयों का खर्च किसानों पर भारी पड़ता है। ड्रोन तकनीक लंबे समय में इन खर्चों को कम करने में सहायक सिद्ध हो रही है। एक बार ड्रोन सेवा उपलब्ध होने पर बड़े क्षेत्र में तेजी से कार्य किया जा सकता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

वर्तमान में विशेष रूप से बड़े किसानों और बागवानी उत्पादक किसान संगठनों के लिए यह तकनीक अधिक लाभकारी साबित हो रही है। कई जगहों पर ड्रोन सेवाएं किराये पर भी उपलब्ध हैं, जिससे छोटे और मध्यम किसान भी इसका लाभ उठा पा रहे हैं।

डिजिटल खेती की ओर कदम

ड्रोन का उपयोग केवल पेस्टिसाइड छिड़काव तक सीमित नहीं है। 

यह तकनीक भूमि की मैपिंग, सिंचाई प्रबंधन और फसल के अनुमान में भी सहायक है। खेत की सटीक डिजिटल मैपिंग से पानी के सही उपयोग की योजना बनाई जा सकती है। इससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

इसके अलावा, ड्रोन द्वारा जुटाए गए आंकड़े किसानों भाइयों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

ड्रोन के डेटा पर आधारित निर्णय लेने से किसानों को उत्पादन में वृद्धि औरसाथ में जोखिम में कमी भी संभव हो रही है।

चुनौतियां और संभावनाएं

हालांकि ड्रोन तकनीक के कई फायदे हैं, लेकिन फिर भी कुछ चुनौतियां आज भी मौजूद हैं। जैसे तकनीक की समझ, प्रारंभिक लागत और  ड्रोन प्रशिक्षण की आवश्यकता जैसी समस्याएं अभी भी सामने हैं। इसके लिए देश के ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है ताकि अधिक से अधिक किसान वोइसका लाभ उठा सकें।

फिर भी यह स्पष्ट है कि कृषि में ड्रोन का उपयोग भविष्य की खेती का  एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है। यह तकनीक न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि खेती को सुरक्षित, सटीक और पर्यावरण के अनुकूल भी बनाएगी।

कृषि में ड्रोन का बढ़ता उपयोग यह संकेत देता है कि भारतीय किसान अब परंपरा और तकनीक का संतुलित संगम अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह उड़ान और भी ऊंची हो सकती है, जो देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों को  एक नई मजबूती प्रदान करेगा।।

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