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Home » BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में उभरती वैश्विक शक्ति का बड़ा मंच, भारत की अध्यक्षता में सहयोग, नवाचार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर

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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में उभरती वैश्विक शक्ति का बड़ा मंच, भारत की अध्यक्षता में सहयोग, नवाचार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर

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Last updated: September 12, 2026 12:20 pm
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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 18वां शिखर सम्मेलन
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भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन शनिवार, 12 सितंबर से नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो गया है। दो दिवसीय यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहा है और ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, पश्चिम एशिया में संघर्ष, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों, व्यापारिक अनिश्चितताओं और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग जैसे गंभीर मुद्दों का सामना कर रही है। 

Contents
  • नई दिल्ली में दुनिया के प्रमुख उभरते देशों के नेता
  • BRICS का बढ़ता वैश्विक महत्व
  • भारत की प्राथमिकताएं: Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability
  • स्टार्टअप और नवाचार पर विशेष ध्यान
  • व्यापार और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर नजर
  • वैश्विक शासन में सुधार का मुद्दा
  • पश्चिम एशिया संकट और BRICS की एकता की परीक्षा
  • भारत-चीन संबंध भी रहेंगे महत्वपूर्ण
  • नई विकास वित्त व्यवस्था और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार
  • भारत के लिए आर्थिक अवसर
  • भारत की अध्यक्षता में 50 से अधिक पहल और परिणाम
  • 13 सितंबर को सामने आ सकता है अंतिम निष्कर्ष
  • भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रदर्शन
  • FAQs: BRICS Summit 2026 (Hindi)

भारत ने 2026 के लिए BRICS की अध्यक्षता संभालते हुए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण” को केंद्रीय विषय बनाया है। भारत सरकार के अनुसार इस अध्यक्षता का दृष्टिकोण जन-केंद्रित और मानवता-प्रधान है। 

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नई दिल्ली में दुनिया के प्रमुख उभरते देशों के नेता

2026 का BRICS सम्मेलन पिछले सम्मेलनों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक स्वरूप में आयोजित हो रहा है। समूह के विस्तार के बाद BRICS में अब 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं। मूल समूह में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ 2010 में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ था। बाद में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात तथा इंडोनेशिया जैसे नए सदस्यों के शामिल होने से समूह का भौगोलिक और आर्थिक प्रभाव काफी बढ़ा है। 

नई दिल्ली सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सहित कई प्रमुख नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ब्राजील का प्रतिनिधित्व उसके विदेश मंत्री माउरो विएरा कर रहे हैं। 

BRICS के सदस्य देशों के अलावा बड़ी संख्या में साझेदार देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी सम्मेलन को व्यापक वैश्विक मंच का रूप दे रही है। रिपोर्टों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित 32 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। 

The countdown ends. The 18th BRICS Summit begins.

Stay tuned as dialogue, deliberation and cooperation unfold in New Delhi.#BRICS2026 #BRICSIndia2026 #IndiaBRICSChairship pic.twitter.com/tNg7j8P4cY

— BRICS 2026 (@BricsIndia2026) September 12, 2026

BRICS का बढ़ता वैश्विक महत्व

BRICS की शुरुआत मुख्य रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक सहयोग के मंच के रूप में हुई थी, लेकिन पिछले वर्षों में इसका स्वरूप काफी बदल गया है। आज यह व्यापार, निवेश, विकास वित्त, ऊर्जा, स्वास्थ्य, तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक शासन जैसे विषयों पर सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।

विस्तार के बाद BRICS समूह लगभग आधी वैश्विक आबादी और क्रय शक्ति समानता के आधार पर दुनिया की अर्थव्यवस्था के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इस कारण नई दिल्ली सम्मेलन को केवल सदस्य देशों की बैठक के रूप में नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक शक्ति-संरचना के संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है। 

भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली एक ऐसे BRICS की मेजबानी कर रही है जिसका आकार और प्रभाव उसके पिछले अध्यक्षीय कार्यकालों की तुलना में काफी बड़ा है।

भारत की प्राथमिकताएं: Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability

भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों को सामने रखा है—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता।

लचीलेपन के अंतर्गत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर है जो अंतरराष्ट्रीय संकटों के बावजूद स्थिर बनी रहें।

नवाचार के तहत डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों में BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में पहल की जा रही है। भारत की अध्यक्षता में BRICS Incubator Network और BRICS Startup Innovation Fund जैसी पहलों को आगे बढ़ाने की तैयारी है। 

सहयोग के क्षेत्र में व्यापार, निवेश, वित्त, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास जैसे विषयों को महत्व दिया जा रहा है। वहीं सततता के तहत जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।

स्टार्टअप और नवाचार पर विशेष ध्यान

भारत ने BRICS 2026 के दौरान स्टार्टअप और नवाचार को महत्वपूर्ण प्राथमिकता दी है। प्रस्तावित BRICS Incubator Network का उद्देश्य सदस्य देशों के राष्ट्रीय संस्थानों, इनक्यूबेटरों और स्टार्टअप्स को एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है।

इसके अलावा BRICS Startup Innovation Fund के माध्यम से शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और उद्यमियों को सहयोग देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पूंजी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि BRICS देशों के बीच तकनीकी और कारोबारी साझेदारी को भी बढ़ावा देना है। 

भारत के लिए यह पहल विशेष महत्व रखती है क्योंकि देश स्वयं दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक बन चुका है। ऐसे में भारतीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, फिनटेक, स्वास्थ्य तकनीक, AI और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के अनुभव को BRICS देशों के साथ साझा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

व्यापार और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर नजर

सम्मेलन के महत्वपूर्ण विषयों में व्यापार और आपूर्ति शृंखला की मजबूती भी शामिल है। हाल के वर्षों में कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों से जुड़े जोखिमों ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर किया है।

इसी पृष्ठभूमि में BRICS Logistics Supply-Chain Cooperation Framework को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच परिवहन, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति शृंखला सहयोग को मजबूत करना है। 

विशेष रूप से ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा BRICS देशों के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। समूह में दुनिया के बड़े ऊर्जा उत्पादक और बड़े उपभोक्ता दोनों शामिल हैं। इसलिए ऊर्जा बाजार में स्थिरता और आपूर्ति सुरक्षा पर सामूहिक बातचीत का व्यापक आर्थिक प्रभाव हो सकता है।

वैश्विक शासन में सुधार का मुद्दा

BRICS लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक शासन की अन्य व्यवस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की मांग करता रहा है।

नई दिल्ली सम्मेलन में भी वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और विकासशील देशों की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने का मुद्दा महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। सम्मेलन के एजेंडे में बहुपक्षवाद और वैश्विक शासन सुधार प्रमुख विषयों में शामिल हैं। 

भारत का रुख रहा है कि वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक प्रभावी स्थान मिलना चाहिए। BRICS इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराता है।

पश्चिम एशिया संकट और BRICS की एकता की परीक्षा

इस वर्ष का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में गंभीर सैन्य और राजनीतिक तनाव जारी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष की स्थिति ने BRICS के भीतर भी जटिल परिस्थितियां पैदा की हैं, क्योंकि ईरान स्वयं BRICS का सदस्य है जबकि संयुक्त अरब अमीरात भी समूह का हिस्सा है।

इस संकट के कारण BRICS देशों के लिए एक साझा राजनीतिक रुख तैयार करना आसान नहीं है। Reuters के अनुसार पश्चिम एशिया का संघर्ष समूह की एकता और संभावित संयुक्त घोषणा के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है। 

इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध भी सम्मेलन की पृष्ठभूमि में मौजूद महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मुद्दा है। हालांकि BRICS को किसी सैन्य गठबंधन के रूप में नहीं देखा जाता, लेकिन उसके कई सदस्य वैश्विक संघर्षों और पश्चिमी प्रतिबंधों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं।

भारत-चीन संबंध भी रहेंगे महत्वपूर्ण

नई दिल्ली में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी भारत के लिए विशेष कूटनीतिक महत्व रखती है। 2020 के सीमा विवाद के बाद भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा। हालांकि 2024 के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव कम करने और द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठे हैं। 

BRICS सम्मेलन भारत और चीन को बहुपक्षीय मंच पर संवाद का अवसर भी देता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा स्थिति, वैश्विक शासन और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे विषय व्यापक रणनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी भारत के लिए अहम है। भारत-रूस संबंधों में रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और व्यापार प्रमुख क्षेत्र हैं। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी इन संबंधों को आगे बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

नई विकास वित्त व्यवस्था और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार

BRICS के एजेंडे में विकास वित्त और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार भी लगातार महत्वपूर्ण रहा है। समूह से जुड़ा New Development Bank (NDB) सदस्य देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए स्थापित किया गया था।

भारत सहित कई BRICS देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग और डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के विकल्पों पर भी चर्चा करते रहे हैं। हालांकि साझा BRICS मुद्रा के बारे में अक्सर चर्चा होती है, लेकिन इसे तत्काल लागू किए जाने के बजाय भुगतान प्रणालियों और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन जैसे व्यावहारिक विकल्पों पर अधिक ध्यान दिया जाता रहा है।

भारत के लिए आर्थिक अवसर

भारत की BRICS अध्यक्षता से देश को आर्थिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर अवसर मिल रहे हैं। BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, रसायन, आभूषण और इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे अनेक क्षेत्रों में फैला हुआ है। 

रूस से भारत की ऊर्जा और रक्षा आवश्यकताएं जुड़ी हैं, चीन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार है, जबकि UAE और सऊदी अरब भारत के लिए ऊर्जा, निवेश और व्यापार के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ भी कृषि, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं।

इस दृष्टि से BRICS को भारत के लिए केवल भू-राजनीतिक मंच के रूप में नहीं बल्कि व्यापार और निवेश बढ़ाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

भारत की अध्यक्षता में 50 से अधिक पहल और परिणाम

भारतीय अधिकारियों के अनुसार 2026 की अध्यक्षता के दौरान BRICS के विभिन्न कार्य समूहों और बैठकों से 50 से अधिक व्यावहारिक परिणाम सामने आए हैं। ये पहल मुख्य रूप से resilience, innovation, cooperation और sustainability के चार व्यापक क्षेत्रों से जुड़ी हैं। 

इनमें स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और संगठित अपराध से मुकाबला जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वर्ष के दौरान BRICS के विभिन्न मंत्रिस्तरीय और विशेषज्ञ स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका अंतिम राजनीतिक स्तर पर मूल्यांकन नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में किया जा रहा है।

13 सितंबर को सामने आ सकता है अंतिम निष्कर्ष

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 13 सितंबर को होने की उम्मीद है। सम्मेलन के दौरान नेताओं की बैठक, द्विपक्षीय वार्ताएं और विभिन्न वैश्विक एवं आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद भारत की अध्यक्षता के प्रमुख निष्कर्ष सामने आएंगे। सम्मेलन के कार्यक्रम में नई दिल्ली घोषणा को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। 

हालांकि सदस्य देशों के बीच पश्चिम एशिया, रूस-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक व्यापार और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं। इसलिए एक सर्वसम्मत राजनीतिक घोषणा तैयार करना BRICS के लिए इस वर्ष की बड़ी कूटनीतिक चुनौती हो सकती है। 

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रदर्शन

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का भी प्रदर्शन है। दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की मेजबानी करते हुए भारत एक ओर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन, रूस, पश्चिम एशिया और अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ अपने स्वतंत्र और संतुलित संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।

भारत की अध्यक्षता का सबसे बड़ा परीक्षण यह होगा कि क्या वह BRICS के बढ़ते आकार और विविध राजनीतिक हितों के बावजूद व्यावहारिक सहयोग के लिए साझा एजेंडा तैयार कर पाता है। यदि स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, स्वास्थ्य और विकास वित्त जैसे क्षेत्रों में ठोस समझौते आगे बढ़ते हैं, तो 2026 की BRICS अध्यक्षता समूह को केवल राजनीतिक बयानबाजी से आगे ले जाकर वास्तविक आर्थिक और विकासात्मक सहयोग का मंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

निष्कर्ष:  नई दिल्ली में हो रहा BRICS Summit 2026 ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब विश्व व्यवस्था तेजी से बहुध्रुवीय हो रही है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के माध्यम से संघर्ष और मतभेदों के बीच लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को साझा आधार बनाने की कोशिश की है। अगले कुछ दिनों में होने वाले फैसले यह निर्धारित करेंगे कि विस्तारित BRICS आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कितना प्रभावी और एकजुट मंच बन पाता है। 

FAQs: BRICS Summit 2026 (Hindi)

1. BRICS Summit 2026 कहां आयोजित हो रहा है?
BRICS Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है।

2. BRICS Summit 2026 की थीम क्या है?
इस वर्ष की थीम है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability.”

3. 2026 में BRICS की अध्यक्षता किस देश के पास है?
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है।

4. BRICS Summit में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है?
व्यापार, वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, नवाचार, डिजिटल तकनीक, सतत विकास और वैश्विक शासन में सुधार प्रमुख मुद्दे हैं।

5. BRICS का वैश्विक महत्व क्या है?
BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक, राजनीतिक और विकासात्मक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने में इसकी अहम भूमिका है।

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