SA NewsSA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
SA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Politics
  • Educational
  • Tech
  • History
  • Events
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Follow US
© 2024 SA News. All Rights Reserved.

Home » क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त: स्वतंत्रता संग्राम का एक अमर नायक

History

क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त: स्वतंत्रता संग्राम का एक अमर नायक

SA News
Last updated: July 21, 2025 2:49 pm
SA News
Share
क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त स्वतंत्रता संग्राम का एक अमर नायक
SHARE

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो संघर्ष के साथ-साथ अपने विचारों और आत्मबल के लिए भी याद किए जाते हैं। इन्हीं अमर सेनानियों में से एक नाम है बटुकेश्वर दत्त। वे न केवल भगत सिंह के विश्वसनीय साथी थे, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के सबसे साहसी योद्धाओं में से एक थे। आइए, उनके जीवन, संघर्ष और बलिदान को विस्तार से जानें।

Contents
  • प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
  • क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत
  • केंद्रीय विधानसभा बम कांड: एक साहसी प्रदर्शन
  • गिरफ्तारी और लाहौर षड्यंत्र केस
  • काला पानी की सजा और भूख हड़तालें
  • स्वतंत्र भारत में योगदान
  • निधन और अंतिम विदाई
  • विरासत और स्मृति
  • मनुष्य जन्म की सफलता परमार्थ में
  • FAQs: बटुकेश्वर दत्त
    • 1. बटुकेश्वर दत्त कौन थे?
    • 2. उन्होंने बम क्यों फेंका था, क्या इससे किसी को नुकसान हुआ था?
    • 3. बटुकेश्वर दत्त को क्या सजा दी गई थी?
    • 4. आजादी के बाद उनका जीवन कैसा रहा?
    • 5. उनकी मृत्यु कब और कहाँ हुई?
  • Connect With Us on the Following Social Media Platforms

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

बटुकेश्वर दत्त का जन्म 18 नवम्बर 1910 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान ज़िले के ओअरी नामक गाँव में हुआ था। बचपन से ही उनका स्वभाव गंभीर और जिज्ञासु रहा। पढ़ाई में तेज़ थे। उन्होंने कानपुर के पी.पी.एन. हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। कानपुर में ही उनकी मुलाकात महान क्रांतिकारी नेता भगत सिंह से हुई। दत्त चंद्रशेखर आज़ाद के भी मित्र थे।

क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत

image 44

कानपुर में पढ़ाई के दौरान ही 1924 में उनकी मुलाकात भगत सिंह से हुई। इस मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। वे हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से जुड़ गए और क्रांति के पथ पर चल पड़े। इस संगठन के लिए उन्होंने कानपुर में कार्य करना शुरू किया और बम बनाना सीखा, जो आगे चलकर उन्हें इतिहास में विशेष स्थान दिलाने वाला था।

केंद्रीय विधानसभा बम कांड: एक साहसी प्रदर्शन

image 47

8 अप्रैल 1929 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली स्थित केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर ब्रिटिश साम्राज्य की दमनकारी नीति का विरोध किया। यह बम विस्फोट जानबूझकर इस तरह से किया गया था कि किसी को नुकसान न हो। इनका उद्देश्य केवल “सुनो! हम तुम्हें जागृत करने आए हैं” जैसे नारों और पर्चों के माध्यम से अपनी बात पहुँचाना था।

Also Read: 19वीं सदी के गुमनाम भारतीय योद्धा: जिन्हें इतिहास ने भुला दिया

इस दिन ब्रिटिश सरकार ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ और ‘ट्रेड डिस्प्यूट बिल’ पारित करना चाहती थी, जिससे स्वतंत्रता सेनानियों पर सख्ती की की जा सके। लेकिन इस प्रदर्शन के कारण यह बिल महज एक वोट से अस्वीकार हो गया।

गिरफ्तारी और लाहौर षड्यंत्र केस

image 45

बम कांड के बाद दोनों क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 12 जून 1929 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। बाद में इन्हें लाहौर फोर्ट जेल ले जाया गया, जहां लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के अभियोग में ‘लाहौर षड्यंत्र केस’ चलाया गया। यह वही केस था जिसमें भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा दी गई थी।

काला पानी की सजा और भूख हड़तालें

बटुकेश्वर दत्त को ‘काला पानी’ (सेल्यूलर जेल, अंडमान) की सजा दी गई। जेल में रहकर उन्होंने 1933 और 1937 में दो बार भूख हड़ताल की, जिनसे उनकी साहसिक प्रवृत्ति का परिचय मिलता है। 1937 में उन्हें पटना के बांकीपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया गया और 1938 में रिहा किया गया, लेकिन बीमारी के बावजूद उन्हें फिर गिरफ्तार किया गया और 1945 तक जेल में रखा गया।

स्वतंत्र भारत में योगदान

भारत की स्वतंत्रता के बाद नवम्बर 1947 में बटुकेश्वर दत्त ने अंजलि दत्त से विवाह किया और पटना में बस गए। 1963 में उन्हें बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया, जो उनके योगदान की सरकारी मान्यता थी।

निधन और अंतिम विदाई

image 46

कई वर्षों तक बीमारी से जूझने के बाद 20 जुलाई 1965 को नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार उनका दाह संस्कार हुसैनीवाला (पंजाब) में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की समाधि स्थल के पास किया गया।

विरासत और स्मृति

बटुकेश्वर दत्त की एक पुत्री भारती बागची आज भी पटना में रहती हैं। उनके एक सहयोगी इंद्र कुमार ने उन्हें “राजनीतिक महत्वाकांक्षा से दूर, सच्चे देशभक्त” के रूप में वर्णित किया। दत्त जीवन भर निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक रहे।

मनुष्य जन्म की सफलता परमार्थ में

या तो माता भक्त जनें या दाता या सुर।

ना तो रहले बाँझड़ी, क्यों व्यर्थ गंवाए नूर।।

संत रामपाल जी महाराज जी का तत्व ज्ञान हमें बताता है कि भक्त, दाता और शूर वीर बेटे से ही माता का महत्व है, नहीं तो निकम्मे औलाद पैदा करने से अच्छा है वो बेऔलाद ही रहे। 

आज संत रामपाल जी महाराज जी लाखों और करोड़ों अनुयायियों द्वारा भक्ति, दान और परमार्थ के कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आज संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम में निर्धन और बेसहारा लोगों को राशन सामग्री और आवास की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। और भी कई परमार्थ और जनकल्याणकारी कार्यों में हिस्सा बनकर अपना जीवन सफल बना रहे हैं।

आप जी भी संत रामपाल जी महाराज जी के तत्व ज्ञान को समझने और उनसे उपदेश प्राप्त कर अपने मानव जीवन को सफल बनाने के लिए www.jagatgururampalji.org पर visit करें।

बटुकेश्वर दत्त जी का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रेरणास्पद गाथा है। उन्होंने न केवल ब्रिटिश साम्राज्य का साहसिक विरोध किया, बल्कि आज़ादी के बाद भी सादगीपूर्वक जीवन व्यतीत किया। आज की युवा पीढ़ी को उनसे देशभक्ति, त्याग और साहस की प्रेरणा लेनी चाहिए। ऐसे वीर क्रांतिकारी का इतिहास में नाम सदैव अमर रहेगा।

FAQs: बटुकेश्वर दत्त

1. बटुकेश्वर दत्त कौन थे?

उत्तर: बटुकेश्वर दत्त भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी थे जिन्होंने भगत सिंह के साथ 1929 में दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर ब्रिटिश सरकार के दमनकारी कानूनों का विरोध किया था।

2. उन्होंने बम क्यों फेंका था, क्या इससे किसी को नुकसान हुआ था?

उत्तर: नहीं, बम जानबूझकर ऐसे स्थान पर फेंका गया जहाँ किसी को चोट न लगे। उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना और अंग्रेजी हुकूमत को जगाना था।

3. बटुकेश्वर दत्त को क्या सजा दी गई थी?

उत्तर: उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और कुख्यात ‘काला पानी’ (सेल्यूलर जेल, अंडमान) भेजा गया।

4. आजादी के बाद उनका जीवन कैसा रहा?

उत्तर: वे पटना में रहे और 1963 में बिहार विधान परिषद के सदस्य बनाए गए। उन्होंने हमेशा सादगी से जीवन जिया और राजनीति से दूर रहे।

5. उनकी मृत्यु कब और कहाँ हुई?

उत्तर: उनकी मृत्यु 20 जुलाई 1965 को नई दिल्ली के AIIMS अस्पताल में हुई। उनका अंतिम संस्कार हुसैनीवाला (पंजाब) में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के स्मारक के पास किया गया।

Connect With Us on the Following Social Media Platforms

WhatsApp ChannelFollow
Telegram Follow
YoutubeSubscribe
Google NewsFollow

Share This Article
Email Copy Link Print
What do you think?
Love1
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
BySA News
Follow:
Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.
Previous Article जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही का बड़ा सवाल जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग : न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही का बड़ा सवाल
Next Article Zoology The Study of Animal Life in a Simple Way Zoology The Study of Animal Life in a Simple Way
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Popular Posts

NHPC Admit Card 2025 Released: How to Download, Exam Pattern, and Important Details

The NHPC Admit Card 2025 for the Junior Engineer exam has been released on the…

By Reetesh Pal

मोटापा और डायबिटीज़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं

पिछले कुछ दशकों से दुनिया भर में खानपान के तौर तरीको में काफी बदलाव आ…

By SA News

EWS Result 2025-26 Out on www.edudel.nic.in : Check The Direct Link Here

EWS Result 2025-26: Delhi EWS Admission Result 2025-26: On 5th March, 2025, Delhi Directorate of…

By SA News

You Might Also Like

Gyan Bharatam | National Initiative to Preserve India’s Manuscript Heritage
History

Gyan Bharatam | National Initiative to Preserve India’s Manuscript Heritage

By SA News
From Samurai to Superpower A Deep Dive into Japan’s Rich History and Cultural Evolution
WorldHistory

From Samurai to Superpower: A Deep Dive into Japan’s Rich History and Cultural Evolution

By SA News
Amelia Earhart’s Wings of Courage and Enduring Legacy
History

Amelia Earhart’s Wings of Courage and Enduring Legacy

By SA News
History of the European Union From War-Torn Continent to Unified Bloc
History

History of the European Union: From War-Torn Continent to Unified Bloc

By Jyoti Rajput
SA NEWS LOGO SA NEWS LOGO
748KLike
340KFollow
13KPin
216KFollow
1.8MSubscribe
3KFollow

About US


Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.

Top Categories
  • Politics
  • Health
  • Tech
  • Business
  • World
Useful Links
  • About Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Copyright Notice
  • Contact Us
  • Official Website (Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj)

© SA News 2025 | All rights reserved.