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Home » बाज़ार में भूचाल! गिरावट ने बढ़ाई हलचल, जानिए मार्च में क्या रहेगा रुख

Finance

बाज़ार में भूचाल! गिरावट ने बढ़ाई हलचल, जानिए मार्च में क्या रहेगा रुख

SA News
Last updated: March 1, 2025 1:32 pm
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बाज़ार में भूचाल! गिरावट ने बढ़ाई हलचल, जानिए मार्च में क्या रहेगा रुख
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शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। फरवरी के अंतिम शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने लगभग 2% की गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स 1.9% (1414 अंक) की कमी के बाद 73,198 अंक पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी ने 1.86% (420 अंक) की गिरावट के साथ 22,124 अंक पर ट्रेडिंग समाप्त की। सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्सों में भी गिरावट देखने को मिली। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के मार्केट कैप में आज 8.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई।

Contents
  • मुख्य बिंदु:- शेयर बाजार में गिरावट 
  • बाज़ार में गिरावट के मुख्य कारण
  • क्या मार्च में बाजार संभलेगा या जारी रहेगी गिरावट?
  • क्या कहती है एक्सपर्ट्स की राय?

आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निफ्टी आईटी 4.18% की गिरावट के साथ कमजोर हो गया। साथ ही, निफ्टी ऑटो 3.92%, मीडिया 3.48% और एफएमसीजी 2.62% नीचे गिर गए।

मुख्य बिंदु:- शेयर बाजार में गिरावट 

  • बाजार में बड़ी हलचल, किसे हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?
  • बाजार में गिरावट के रहे ये मुख्य करण।
  •  मार्च में रिकवरी की उम्मीद बनी रहेगी या मंदी का असर जारी रहेगा ।
  • विशेषज्ञों की राय के अनुसार आगे बाज़ार का रुख यही रहेगा।

कौन सबसे ज्यादा बिखरा, किसने संभाली इज्जत?

निफ्टी के प्रदर्शन में सबसे तेज गिरावट इंडसइंड बैंक के शेयरों में देखी गई, जहाँ 7.11% की कमी आई। इसके बाद टेक महिंद्रा ने 6.44%, विप्रो ने 5.43%, भारती एयरटेल ने 4.93% और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 4.82% की गिरावट दर्ज की। वहीं, श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में 2% की तेजी देखने को मिली, जबकि एचडीएफसी बैंक और कोल इंडिया ने 1% से अधिक की तेजी दिखाई। ट्रेंट और हिंडाल्को भी निफ्टी के शीर्ष लाभदायक शेयरों में शामिल रहे।

बीएसई के टॉप 30 में से 28 शेयरों ने कमजोर प्रदर्शन किया। सबसे अधिक नुकसान टाटा मोटर्स को हुआ, जिसने 35% की गिरावट दिखाई। इसके बाद एशियन पेंट्स (32% गिरावट), पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (30% गिरावट) और इंडसइंड बैंक (28% गिरावट) क्रमशः रहे। दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस और कोटक महिंद्रा बैंक ने क्रमशः 12% और 2.3% की बढ़त हासिल की, जो 26 सितंबर 2024 और 27 फरवरी 2025 के दौरान दर्ज की गई।

बाज़ार में गिरावट के मुख्य कारण

मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में बाज़ार की धारणा पर कई कारकों का प्रभाव पड़ा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की गई भारी बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, रुपये में आई कमजोरी, तीसरी तिमाही की धीमी आय वृद्धि और उच्च मूल्यांकन ने बाज़ार पर दबाव बनाया है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लिए गए टैरिफ से जुड़े निर्णयों ने भी बाज़ार की दिशा को प्रभावित किया है।

क्या मार्च में बाजार संभलेगा या जारी रहेगी गिरावट?

मार्च का महीना ऐतिहासिक रूप से निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित होता आया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते 15 वर्षों में बेंचमार्क इंडेक्स ने 10 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है, जिससे निवेशकों को अच्छी कमाई हुई है। इतना ही नहीं, 30 साल पहले भी मार्च में बाज़ार ने मजबूती दिखाई थी।

क्या कहती है एक्सपर्ट्स की राय?

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का मानना है कि मार्च में बाज़ार में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक संकेतक और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिक्री की धीमी रफ्तार हो सकते हैं। चूंकि लार्जकैप स्टॉक्स का मूल्यांकन संतुलित दिख रहा है, इसलिए बीते कुछ महीनों जैसी आक्रामक बिकवाली की संभावना कम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह समय अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के लिए उपयुक्त हो सकता है। भारतीय इक्विटी बाजार की संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार व्यक्त करते हुए, ओल्ड ब्रिज म्यूचुअल फंड के सीआईओ और ओल्ड ब्रिज कैपिटल मैनेजमेंट के संस्थापक एवं निदेशक केनेथ एंड्रेड ने कहा कि भारत की विकास गति सकारात्मक दिख रही है। हालांकि, इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं, जिन पर निवेशकों को ध्यान देने की आवश्यकता है।

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GST पूरे UPI भुगतान की राशि पर नहीं लगेगा, बल्कि जहां MDR लागू होगा, वहां केवल MDR शुल्क पर 18% GST लगेगा। 5. GST-पंजीकृत पात्र व्यापारी MDR पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं, जिससे उनकी GST देनदारी में इसका समायोजन किया जा सकता है। 6. Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर MDR लागू नहीं होगा, इसलिए ऐसे व्यक्तिगत UPI ट्रांसफर पहले की तरह शुल्क मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के UPI भुगतान में नहीं लगेगा MDR नए नियम के अनुसार ₹2,000 तक के P2M UPI भुगतान पर MDR शून्य रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि इस सीमा तक होने वाले मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा और इसलिए MDR से जुड़ा GST भी नहीं बनेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार UPI के मर्चेंट लेनदेन की मात्रा में 96 प्रतिशत से अधिक भुगतान ₹2,000 तक के हैं। इसलिए बड़ी संख्या में रोज़मर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे। ₹1 लाख तक UPI प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी भी दायरे से बाहर NPCI ने छोटे व्यापारियों के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था भी बताई है। UPI QR के जरिए अपने बैंक खाते में हर महीने ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों पर MDR नहीं लगेगा। खास बात यह है कि ऐसे व्यापारी किसी एक लेनदेन में ₹2,000 से अधिक प्राप्त करें, तब भी निर्धारित शर्तों के अंतर्गत उन्हें MDR से छूट मिलेगी। इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडर्स को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाना है। GST पूरे UPI भुगतान पर नहीं, सिर्फ MDR पर लगेगा MDR को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान की पूरी रकम पर 18 प्रतिशत GST लगेगा। NPCI के स्पष्टीकरण के अनुसार ऐसा नहीं है। GST UPI से भेजी गई पूरी रकम पर नहीं, बल्कि लागू होने वाले MDR यानी भुगतान सेवा शुल्क पर लगेगा। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 के पात्र मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR के हिसाब से शुल्क ₹40 होगा। 18 प्रतिशत GST इसी ₹40 के सेवा शुल्क पर लगेगा, न कि पूरे ₹10,000 पर। ₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR 15 अक्टूबर से निर्धारित पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। इसका मतलब है कि बड़े भुगतान में भी MDR अनिश्चित रूप से नहीं बढ़ेगा। कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग रियायती व्यवस्था रखी गई है, जिसमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। GST-पंजीकृत व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ NPCI की सफाई में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। जो व्यापारी GST के तहत पंजीकृत हैं और पात्रता पूरी करते हैं, वे MDR पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। इसे उनकी बिक्री पर बनने वाली आउटपुट GST देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है। हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट का वास्तविक लाभ व्यापारी की GST स्थिति और उसके कारोबार की प्रकृति पर निर्भर करेगा। इसलिए हर व्यापारी के लिए इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा। आम ग्राहक से MDR वसूलने की अनुमति नहीं MDR का ढांचा व्यापारी भुगतान के पीछे काम करने वाले पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है। सरकार के अनुसार यह ग्राहक से UPI भुगतान करने के लिए अलग से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहक पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रदाताओं को भी छिपे हुए प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से रोकने की व्यवस्था बताई गई है। Person-to-Person UPI पहले की तरह मुफ्त रहेगा नए MDR ढांचे का असर Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांसफर पर नहीं पड़ेगा। दो व्यक्तियों के बीच पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले UPI लेनदेन किसी भी राशि के हों, वे MDR के दायरे में नहीं आएंगे। यानी किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर इस नए मर्चेंट शुल्क की व्यवस्था लागू नहीं होगी। NPCI ने छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव की आशंका को बताया गलत MDR पर GST को लेकर सामने आई चिंताओं पर NPCI ने कहा है कि छोटे व्यापारियों पर व्यापक अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका सही नहीं है। इसका आधार यह है कि ₹2,000 तक के अधिकांश मर्चेंट भुगतान MDR से बाहर हैं और ₹1 लाख तक की मासिक UPI प्राप्ति वाले पात्र छोटे व्यापारी भी MDR छूट में आते हैं। इसके अलावा पात्र GST-पंजीकृत व्यापारी MDR पर दिए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। नए नियम का मकसद UPI व्यवस्था को लंबे समय तक चलाने की तैयारी सरकार ने नए MDR ढांचे को UPI के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ा है। सरकार के अनुसार MDR से प्राप्त राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होगी। साथ ही MDR संग्रह का 5 प्रतिशत हिस्सा छोटे व्यापारियों और UPI के विस्तार से जुड़े फंड में देने का प्रावधान भी बताया गया है। कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला बदलाव हर UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की व्यवस्था नहीं है। ₹2,000 तक के P2M भुगतान, पात्र छोटे व्यापारियों के भुगतान और सभी P2P लेनदेन MDR से बाहर रहेंगे। ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू होगा, लेकिन GST पूरे UPI भुगतान पर नहीं बल्कि MDR सेवा शुल्क पर लगेगा। इसी आधार पर NPCI ने छोटे व्यापारियों पर व्यापक अतिरिक्त GST बोझ की आशंका को गलत बताया है। UPI MDR पर GST को लेकर NPCI की सफाई से संबंधित मुख्य FAQs 1. क्या UPI से पेमेंट करने पर अब 18% GST लगेगा? नहीं। 18% GST पूरे UPI भुगतान की राशि पर नहीं लगेगा। जहां MDR लागू होगा, वहां GST केवल MDR शुल्क पर लगेगा। 2. क्या ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर MDR लगेगा? अधिकतर पात्र ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान MDR से बाहर रहेंगे। इसलिए इन लेनदेन पर MDR से जुड़ा GST भी नहीं लगेगा। 3. छोटे दुकानदारों के लिए UPI MDR का नया नियम क्या है? ₹1 लाख तक मासिक UPI प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से छूट दी जाएगी। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का बोझ कम रखना है। 4. ₹2,000 से ज़्यादा UPI पेमेंट करने पर कितना MDR लगेगा? निर्धारित पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। 5. क्या UPI से पैसे भेजने वाले ग्राहक को MDR देना होगा? MDR व्यापारी भुगतान से जुड़ा शुल्क है। इसे ग्राहक से अलग से वसूलने की अनुमति नहीं है। 6. क्या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI भेजने पर MDR लगेगा? नहीं। Person-to-Person यानी P2P UPI लेनदेन नए MDR ढांचे के दायरे में नहीं आते।
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