भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित लोक भवन में माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती के अवसर पर ₹200 का स्मारक सिक्का जारी किया। इस विशेष सिक्के में माता साहिब हासी देवी जी की छवि, उनकी जयंती से जुड़ी जानकारी और शदाणी दरबार का उल्लेख शामिल है। जानिए इस स्मारक सिक्के का वजन, आकार, धातु संरचना, डिजाइन और इससे जुड़ी प्रमुख बातें।
मुख्य जानकारी एक नजर में
- सिक्का किसने जारी किया: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- जारी करने की तारीख: 22 अक्टूबर 2026
- स्थान: लोक भवन, रायपुर, छत्तीसगढ़
- अवसर: माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती
- अंकित मूल्य: ₹200
- मानक वजन: 35 ग्राम
- व्यास: 44 मिलीमीटर
- धातु संरचना: 50% चांदी, 40% तांबा, 5% निकेल और 5% जस्ता
- जारी करने वाला विभाग: भारत सरकार का वित्त मंत्रालय
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रायपुर में कब जारी किया ₹200 का सिक्का?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती के अवसर पर ₹200 का स्मारक सिक्का जारी किया। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने इस विशेष सिक्के को जारी किया है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सिंधी समाज के सैकड़ों सदस्यों ने भाग लिया।
राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक डिजिटल लाइब्रेरी और आकाशवाणी समाचार ने भी इस कार्यक्रम की पुष्टि की है। यह पहल माता साहिब हासी देवी जी के आध्यात्मिक योगदान और सिंधी समाज की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने से जुड़ी है।
₹200 के स्मारक सिक्के की खासियत क्या है?
भारत सरकार ने इस सिक्के के आकार, वजन, धातु और डिजाइन से संबंधित नियम 9 जुलाई 2026 को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से प्रकाशित किए थे। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
| विशेषता | विवरण |
| अंकित मूल्य | ₹200 |
| आकार | गोल |
| व्यास | 44 मिलीमीटर |
| मानक वजन | 35 ग्राम |
| किनारे पर निशान | 200 दाँतेदार निशान |
| चांदी | 50% |
| तांबा | 40% |
| निकेल | 5% |
| जस्ता | 5% |
सिक्के के दोनों ओर क्या अंकित है?
सिक्के के एक तरफ माता साहिब हासी देवी जी की छवि है। इसके साथ हिंदी और अंग्रेजी में उनका नाम, 200वीं जयंती का उल्लेख तथा वर्ष 1826 और 2026 अंकित हैं। इस तरफ शदाणी दरबार तीर्थ, रायपुर की पंचम पीठाधीश होने का विवरण भी दिया गया है।
दूसरी तरफ अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष, ‘सत्यमेव जयते’, ‘भारत’, ‘INDIA’, रुपये का चिह्न और ₹200 का अंकित मूल्य है।
यह एक विशेष स्मारक सिक्का है। इसका अंकित मूल्य और संग्रहकर्ता बाजार में इसकी कीमत अलग-अलग हो सकती है।
माता साहिब हासी देवी जी कौन थीं? शदाणी दरबार से क्या संबंध था?
माता साहिब हासी देवी जी सिंधी समाज की पूजनीय आध्यात्मिक विभूतियों में गिनी जाती हैं। वे रायपुर स्थित ऐतिहासिक शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश थीं। शदाणी दरबार सिंधी समुदाय का एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है।
उनकी 200वीं जयंती पर स्मारक सिक्का जारी करने का उद्देश्य उनके जीवन और आध्यात्मिक योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। इस आयोजन से सिंधी समाज की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी सार्वजनिक पहचान मिली है।
स्मारक सिक्के के अनावरण के बाद श्रद्धालुओं और सिक्का संग्राहकों के लिए शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसे बुक करने की व्यवस्था की जानकारी भी दी गई है। बुकिंग और उपलब्धता की पुष्टि संबंधित इकाई से करनी चाहिए।
संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान के अनुसार आध्यात्मिक विरासत और सच्ची भक्ति का महत्व
माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती पर जारी स्मारक सिक्का उनकी आध्यात्मिक विरासत और सिंधी समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को याद करने का अवसर है। ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं हमें आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
हालांकि, आध्यात्मिक कल्याण के लिए केवल परंपराओं को जानना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि पूर्ण परमात्मा की पहचान और शास्त्रों के अनुसार सतभक्ति के मार्ग को समझना भी आवश्यक है। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान के अनुसार, मनुष्य को प्रमाणित शास्त्रों के आधार पर भक्ति की सही विधि समझकर सदाचार और मानवता के साथ जीवन जीना चाहिए। उनके आध्यात्मिक ज्ञान और मानव सेवा कार्यों के बारे में अधिक जानने के लिए अन्नपूर्णा मुहिम के यूट्यूब चैनल पर जाएं।
निष्कर्ष
माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ₹200 का स्मारक सिक्का जारी किया जाना छत्तीसगढ़ और सिंधी समाज के लिए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसर है। 35 ग्राम वजन और 44 मिलीमीटर व्यास वाला यह सिक्का चांदी, तांबा, निकेल और जस्ता से बना है। इसके डिजाइन में माता साहिब हासी देवी जी की छवि, उनकी 200वीं जयंती और शदाणी दरबार से जुड़ा विवरण शामिल है।
यह पहल उनकी आध्यात्मिक विरासत को याद करने और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम है। इस अवसर पर सांस्कृतिक विरासत के सम्मान के साथ सदाचार, मानवता और आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व पर विचार किया जा सकता है।
FAQs
1. माता साहिब हासी देवी जी का ₹200 का स्मारक सिक्का कब जारी हुआ?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 अक्टूबर 2026 को रायपुर स्थित लोक भवन में यह सिक्का जारी किया।
2. यह सिक्का किसकी 200वीं जयंती पर जारी किया गया?
यह सिक्का सिंधी समाज की पूजनीय आध्यात्मिक विभूति माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती के अवसर पर जारी किया गया।
3. ₹200 के स्मारक सिक्के का वजन और व्यास कितना है?
इसका मानक वजन 35 ग्राम और व्यास 44 मिलीमीटर है। इसके किनारे पर 200 दाँतेदार निशान हैं।
4. स्मारक सिक्का किन धातुओं से बना है?
इसमें 50% चांदी, 40% तांबा, 5% निकेल और 5% जस्ता है।
5. माता साहिब हासी देवी जी का शदाणी दरबार से क्या संबंध था?
वे रायपुर स्थित ऐतिहासिक शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश थीं।
6. स्मारक सिक्के की बुकिंग कहां की जा सकती है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से बुकिंग की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उपलब्धता और कीमत की पुष्टि संबंधित इकाई से करें।

