Bangladesh में खसरे का प्रकोप अब भयावह रूप ले चुका है। लगातार बढ़ते संक्रमण और बच्चों की मौतों ने पूरे देश में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। 8 मई 2026 तक सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। बीते 24 घंटों में 12 और बच्चों की मौत दर्ज की गई है, जबकि हजारों नए मामलों ने अस्पतालों पर भारी दबाव डाल दिया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह हाल के वर्षों में बांग्लादेश में सामने आया सबसे गंभीर खसरा प्रकोप माना जा रहा है। संक्रमण तेजी से देश के अधिकांश जिलों में फैल चुका है और हालात लगातार नियंत्रण से बाहर होते दिखाई दे रहे हैं।
24 घंटे में 12 बच्चों की मौत
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 8 मई 2026 की सुबह तक बीते 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण 12 बच्चों की मौत दर्ज की गई। इनमें से 6 मौतें केवल ढाका डिवीजन में हुई हैं। मृत बच्चों में से एक मामले की प्रयोगशाला जांच में खसरे की पुष्टि हुई है, जबकि बाकी बच्चों में भी खसरे जैसे गंभीर लक्षण पाए गए।
लगातार बढ़ती मौतों ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। अस्पतालों में बच्चों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और कई इलाकों में चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी की खबरें सामने आ रही हैं।
मार्च से अब तक 336 बच्चों की मौत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह प्रकोप लगभग 15 मार्च 2026 के आसपास शुरू हुआ था। तब से अब तक कुल 336 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें 57 मौतों की लैब जांच में खसरे की पुष्टि हुई है, जबकि 279 मौतें संदिग्ध खसरा संक्रमण से जुड़ी मानी जा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कई क्षेत्रों में परीक्षण सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में समय पर जांच नहीं हो पाने के कारण कई मामलों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पा रहा।
45 हजार से ज्यादा बच्चे प्रभावित
बीते 24 घंटों के दौरान ही 1,238 बच्चों में खसरे जैसे नए लक्षण दर्ज किए गए। इसके साथ ही अब तक 45,000 से अधिक बच्चों में संक्रमण जैसे लक्षण सामने आ चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इनमें से 31,000 से ज्यादा बच्चों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि बड़ी संख्या में बच्चे गंभीर बुखार, त्वचा पर चकत्ते, सांस लेने में दिक्कत और संक्रमण संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे हैं।
देश के अधिकांश जिलों में फैला संक्रमण
खसरे का यह प्रकोप अब केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के 64 जिलों में से लगभग 58 जिलों में संक्रमण फैल चुका है। राजधानी ढाका समेत कई क्षेत्रों में अस्पताल पूरी क्षमता से अधिक मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और अधिक चिंताजनक बताई जा रही है, जहां पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई परिवार बच्चों को समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंचा पा रहे।
क्यों बिगड़े हालात?
विशेषज्ञों और स्वास्थ्य एजेंसियों ने इस गंभीर स्थिति के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। सबसे बड़ा कारण हाल के वर्षों में टीकाकरण कवरेज में आई गिरावट को माना जा रहा है। खासतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में प्रतिरक्षा सुरक्षा का स्तर काफी कम पाया गया है। यही आयु वर्ग संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा, अंतरिम प्रशासन के दौरान वैक्सीन सप्लाई में आई बाधाएं और खरीद प्रक्रिया में बदलाव भी संकट की बड़ी वजह बने। समय पर पर्याप्त टीकों की उपलब्धता नहीं होने से लाखों बच्चे नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए।
टेस्टिंग किट की भारी कमी
स्थिति को और गंभीर बनाने वाला एक अन्य कारण परीक्षण किट की कमी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लैब टेस्टिंग किट की कमी के कारण बड़ी संख्या में नमूनों की जांच लंबित पड़ी है। इससे संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि सीमित जांच क्षमता के चलते कई मरीजों का समय पर इलाज शुरू नहीं हो पा रहा। यही वजह है कि संदिग्ध मामलों और मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
WHO और UNICEF ने पहले ही दी थी चेतावनी
World Health Organization और UNICEF सहित कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने पहले ही बांग्लादेश में खसरे के बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी दी थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कमजोर टीकाकरण व्यवस्था और घटती प्रतिरक्षा क्षमता को भविष्य के बड़े संकट का संकेत बताया था।
अब हालात बिगड़ने के बाद आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य छोटे बच्चों को जल्द से जल्द वैक्सीन उपलब्ध कराना है।
अस्पतालों पर बढ़ा भारी दबाव
देश के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी जा रही है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार बढ़ते मरीजों के दबाव के बीच काम कर रहे हैं। कई अस्पतालों में बच्चों के वार्ड पूरी तरह भर चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यदि संक्रमण की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल रोजाना नए मामले और मौतें सामने आ रही हैं, जिससे पूरे देश में चिंता का माहौल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी गंभीर बताई गई स्थिति
यह प्रकोप बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय यानी Directorate General of Health Services, स्थानीय मीडिया संस्थान The Daily Star तथा कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी गंभीर बताया गया है। विशेषज्ञ लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और आने वाले दिनों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

