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Home » सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम ‘सर्वोच्च न्यायालय’ करने की मांग पर हाई कोर्ट सख्त, DMRC से मांगा विस्तृत हलफनामा

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सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम ‘सर्वोच्च न्यायालय’ करने की मांग पर हाई कोर्ट सख्त, DMRC से मांगा विस्तृत हलफनामा

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Last updated: February 23, 2026 1:22 pm
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सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम ‘सर्वोच्च न्यायालय’
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राजधानी दिल्ली में ‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलकर “सर्वोच्च न्यायालय” करने की मांग को लेकर Delhi High Court में सुनवाई हुई। इस दौरान Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने कोर्ट को बताया कि वह इस बदलाव के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे सरकारी खज़ाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

Contents
  • ‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने पर बहस से संबंधित मुख्य बिंदु:
  • सुप्रीम कोर्ट’ स्टेशन के हिंदी नाम पर विवाद, अगली सुनवाई अप्रैल में
  • आधिकारिक भाषा कानून का हवाला, ‘सुप्रीम कोर्ट’ स्टेशन के हिंदी नाम की मांग
  • ‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने पर बहस से संबंधित मुख्य FAQs 

मुख्य न्यायाधीश D. K. Upadhyaya और न्यायमूर्ति Tushar Rao Gedela (note: adjust if needed) की पीठ के समक्ष DMRC ने दलील दी कि केवल एक स्टेशन पर साइनेज बदलने में ही लगभग 40 से 45 लाख रुपये का खर्च आएगा। इसके अलावा स्टेशन के भीतर और बाहर लगे साइन बोर्ड, रूट मैप, मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नाम बदलना होगा, जिससे कुल लागत और बढ़ सकती है।

DMRC के वकील ने यह भी कहा कि यदि एक स्टेशन का नाम बदला जाता है, तो अन्य स्टेशनों के नामों को लेकर भी इसी तरह की याचिकाएं दायर हो सकती हैं। इससे बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और वित्तीय प्रभाव पड़ने की आशंका है।

हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संभावित मुकदमों का डर किसी मांग का विरोध करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने DMRC को इस मामले में विस्तृत हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने पर बहस से संबंधित मुख्य बिंदु:

  • मामला Delhi High Court में विचाराधीन
  • ‘सुप्रीम कोर्ट’ स्टेशन का हिंदी नाम “सर्वोच्च न्यायालय” करने की मांग
  • Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने बदलाव का विरोध किया
  • साइनेज बदलने में 40–45 लाख रुपये खर्च का अनुमान
  • मुख्य न्यायाधीश D. K. Upadhyaya और न्यायमूर्ति 
  • Tushar Rao Gedela की पीठ में सुनवाई
  • याचिकाकर्ता: Umesh Sharma
  • आधिकारिक भाषा अधिनियम का हवाला
  • उदाहरण: Central Secretariat metro station का हिंदी नाम “केंद्रीय सचिवालय”
  • अगली सुनवाई अप्रैल में

यह भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को राहत देने से इनकार कर दिया, अब सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

सुप्रीम कोर्ट’ स्टेशन के हिंदी नाम पर विवाद, अगली सुनवाई अप्रैल में

सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम “सर्वोच्च न्यायालय” किए जाने की मांग पर अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। यह सुनवाई Delhi High Court में चल रही है।

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कोर्ट जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसे याचिकाकर्ता Umesh Sharma ने दायर किया है। उनकी दलील है कि हिंदी साइनेज पर “सुप्रीम कोर्ट” की जगह “सर्वोच्च न्यायालय” लिखा जाना चाहिए, ताकि हिंदी भाषा का सही रूप इस्तेमाल हो सके।

याचिकाकर्ता ने उदाहरण देते हुए कहा कि Central Secretariat metro station का हिंदी नाम “केंद्रीय सचिवालय” लिखा जाता है। ऐसे में, ‘सुप्रीम कोर्ट’ स्टेशन पर भी हिंदी नाम का प्रयोग किया जाना चाहिए।

आधिकारिक भाषा कानून का हवाला, ‘सुप्रीम कोर्ट’ स्टेशन के हिंदी नाम की मांग

मेट्रो स्टेशन के नाम को लेकर दायर याचिका में आधिकारिक भाषा अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि केंद्र सरकार से संबंधित सभी साइनेज, नेमप्लेट और दस्तावेज अंग्रेज़ी और हिंदी—दोनों भाषाओं में, देवनागरी लिपि में प्रदर्शित किए जाने चाहिए।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि Supreme Court of India की आधिकारिक वेबसाइट पर स्वयं हिंदी नाम “भारत का सर्वोच्च न्यायालय” लिखा है। ऐसे में मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनेज पर भी “सुप्रीम कोर्ट” के स्थान पर “सर्वोच्च न्यायालय” लिखा जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, देशद्रोह कानून पर लगाई रोक, नहीं होंगे नये मामले दर्ज

‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने पर बहस से संबंधित मुख्य FAQs 

Q1. विवाद किस बात को लेकर है?

‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम “सर्वोच्च न्यायालय” किए जाने की मांग को लेकर है।

Q2. DMRC ने क्या तर्क दिया है?

DMRC का कहना है कि नाम बदलने में 40–45 लाख रुपये खर्च होंगे और प्रशासनिक असर पड़ेगा।

Q3. याचिकाकर्ता का क्या कहना है?

उनका तर्क है कि आधिकारिक भाषा अधिनियम के अनुसार साइनेज हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में होना चाहिए।

Q4. कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि संभावित मुकदमों का डर विरोध का आधार नहीं हो सकता और DMRC को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

Q5. अगली सुनवाई कब है?

मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी।

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