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Science

Cloud in a Box Experiment: वैज्ञानिकों ने धातु के बॉक्स में बनाया कृत्रिम बादल, अब मौसम और बारिश का हर राज़ आएगा सामने

SA News
Last updated: February 23, 2026 1:15 pm
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Cloud in a Box Experiment वैज्ञानिकों ने धातु के बॉक्स में बनाया कृत्रिम बादल
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Cloud in a Box Experiment: मौसम और जलवायु परिवर्तन के रहस्यों को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक प्रयोग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। अमेरिका की ब्रुकहेवन नेशनल लेबोरेटरी (Brookhaven National Laboratory) के शोधकर्ताओं ने एक धातु के बॉक्स के अंदर बिल्कुल असली जैसा बादल बनाने में कामयाबी हासिल की है। क्लाउड इन ए बॉक्स नाम के इस प्रयोग को कन्वेक्शन क्लाउड चैंबर के ज़रिए किया गया है। यह नया प्रयोग वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि बादल कैसे बनते हैं, उनमें बारिश की बूंदें कैसे तैयार होती हैं और प्रदूषण का बादलों पर क्या असर पड़ रहा है।

Contents
  • Cloud in a Box Experiment से जुड़े मुख्य बिंदु:
  • कैसे काम करता है क्लाउड इन ए बॉक्स?
  • नमक से बनाए गए बादलों के बीज
  • लेज़र और रडार से रखी जा रही है नज़र 
  • इस प्रयोग से दुनिया को क्या फायदा होगा?
  • FAQs about Cloud in a Box Experiment:

Cloud in a Box Experiment से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • ब्रुकहेवन लैब के वैज्ञानिकों ने एक क्यूबिक मीटर के कस्टमाइज्ड मेटल बॉक्स में बनाया कृत्रिम बादल।
  • प्रयोग में बादल बनाने के लिए तापमान को नियंत्रित करके 100 प्रतिशत से ज़्यादा नमी की गई पैदा।
  • बादलों की बूंदों को बनाने के लिए साधारण नमक को बीज की तरह किया गया इस्तेमाल।
  • बूंदों को ट्रैक करने के लिए फ्लोरोसेंट डाई, लेज़र और टेराहर्ट्ज (THz) रडार तकनीक का किया जा रहा है उपयोग।
  • इस तकनीक से मौसम की सटीक भविष्यवाणी और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का गहन अध्ययन किया जा सकेगा।

कैसे काम करता है क्लाउड इन ए बॉक्स?

ब्रुकहेवन नेशनल लेबोरेटरी ने 17 फरवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर इस सफल प्रयोग का डेटा और जानकारी जारी की है। वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग को अंजाम देने के लिए एक विशेष धातु का बॉक्स तैयार किया है, जिसकी क्षमता एक क्यूबिक मीटर है।

वातावरण तैयार करना: सबसे पहले बॉक्स के निचले हिस्से (बेसप्लेट) में पानी भरा जाता है और उसे गर्म किया जाता है। इससे पानी भाप बनकर ऊपर उठता है।

नमी का जादू: बॉक्स का ऊपरी पैनल बेहद ठंडा रखा जाता है। जब गर्म भाप ठंडी हवा से मिलती है, तो बॉक्स के अंदर ऐसा वातावरण बन जाता है जहां नमी 100 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है। असली बादल बनने के लिए यह स्थिति सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

नमक से बनाए गए बादलों के बीज

इस सुपरसैचुरेटेड वातावरण में बादलों की बूंदें बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने एयरोसोल कणों का इस्तेमाल किया। साधारण नमक को बॉक्स के अंदर इंजेक्ट किया गया। यह नमक बादलों के बीज का काम करता है। हवा में मौजूद पानी की भाप जब नमक के इन कणों पर जमती है, तो बादलों की छोटी-छोटी बूंदें बनने लगती हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया की बिल्कुल सटीक नकल है।

लेज़र और रडार से रखी जा रही है नज़र 

इस प्रयोग की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक ट्रैकिंग तकनीक है, जिससे डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। वैज्ञानिक फ्लोरोसेंट डाई का इस्तेमाल करके एयरोसोल कणों को टैग कर रहे हैं। जब इन कणों पर लेज़र लाइट पड़ती है, तो वे चमकने लगते हैं, जिससे यह पता चलता है कि कौन से कण सक्रिय होकर बूंद में बदल गए हैं। इसके अलावा, बादलों के अंदर बूंदाबांदी को डिटेक्ट करने और बूंदों के गिरने की गति को मापने के लिए वैज्ञानिक अत्याधुनिक टेराहर्ट्ज (THz) रडार का उपयोग कर रहे हैं।

इस प्रयोग से दुनिया को क्या फायदा होगा?

वर्तमान में मौसम की भविष्यवाणी करने वाले मॉडल बादलों के अंदर की सूक्ष्म प्रक्रियाओं को पूरी तरह समझ नहीं पाते हैं। इस कृत्रिम बादल के ज़रिए वैज्ञानिक प्रदूषण और बादलों के बीच के संबंध को गहराई से समझ सकेंगे। इससे यह पता चलेगा कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्न में क्या बदलाव आएंगे, जिससे बाढ़ या सूखे जैसी स्थितियों का पहले से और अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।

FAQs about Cloud in a Box Experiment:

क्लाउड इन ए बॉक्स प्रयोग किस लैब में किया गया है?

उत्तर: यह प्रयोग अमेरिका की ब्रुकहेवन नेशनल लेबोरेटरी (Brookhaven National Laboratory) में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

बादल बनाने के लिए कौन सी स्थिति सबसे ज़्यादा ज़रूरी होती है?

उत्तर: असली बादल बनने के लिए हवा में 100 प्रतिशत से अधिक नमी का होना अनिवार्य है।

इस प्रयोग में बादलों का बीज बनाने के लिए किसका इस्तेमाल किया गया?

उत्तर: वैज्ञानिकों ने बादलों की बूंदें बनाने के लिए साधारण नमक को एयरोसोल बीज के रूप में इस्तेमाल किया।

बूंदों को ट्रैक करने के लिए कौन सी तकनीक अपनाई गई है?

उत्तर: बूंदों को ट्रैक करने और उनकी गति मापने के लिए फ्लोरोसेंट डाई, लेजर बीम और टेराहर्ट्ज (THz) रडार का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य बादलों के बनने की प्रक्रिया को समझना और जलवायु परिवर्तन की सटीक भविष्यवाणी के लिए मौसम के मॉडल को बेहतर बनाना है।

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